गुप्त साम्राज्य के पतन के पश्चात् भारत में अनेक क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरकर सामने आईं। इन्हीं में से एक प्रमुख शक्ति थी `मैत्रक वंश ( Maitraka Dynasty )`, जिसने गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र में अपनी सत्ता स्थापित की। इस वंश की राजधानी वलभी (Valabhi) थी, जो उस समय न केवल राजनीतिक सत्ता का केंद्र था, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और व्यापार का भी एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बन गया।
1. उत्पत्ति और स्थापना
- मैत्रक वंश की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी में हुई।
- इस वंश के संस्थापक भट्टारक सेनपति भट्टारक (Senapati Bhattarka) माने जाते हैं, जो मूल रूप से गुप्त साम्राज्य के अधीन एक सैन्य अधिकारी थे।
- गुप्त साम्राज्य की शक्ति क्षीण होने पर भट्टारक ने स्वतंत्र होकर अपनी सत्ता स्थापित की।
- उनकी राजधानी वलभी (आधुनिक भावनगर के समीप) बनी, जो समुद्रतटीय नगर होने के कारण व्यापार और सामरिक दृष्टि से उपयुक्त स्थान था।
2. महत्वपूर्ण शासक
मैत्रक वंश में कई शासक हुए, जिनमें कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं –
(क) भट्टारक (Senapati Bhattarka)
- इन्हें वंश का संस्थापक माना जाता है।
- प्रारंभिक काल में गुप्तों की अधीनता स्वीकार की थी, परन्तु बाद में स्वतंत्र हो गए।
(ख) धारासेन प्रथम (Dhruvasena I Baladitya / Dharasena I)
- भट्टारक के पुत्र और उत्तराधिकारी।
- इन्हीं के समय वंश ने स्थिरता पाई।
(ग) धरसेन द्वितीय बलादित्य (Dhruvasena II Baladitya)
- इस शासक का विशेष महत्व है क्योंकि इन्हें हर्षवर्धन (7वीं शताब्दी) का समकालीन माना जाता है।
- ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) के यात्रा विवरण में इनका उल्लेख मिलता है।
- ह्वेनसांग के अनुसार, बलादित्य ने उन्हें अत्यंत आदर और सम्मान प्रदान किया।
- इनके समय वलभी विश्वविद्यालय अपनी चरम स्थिति पर पहुँचा।
(घ) धरसेन तृतीय, सिलादित्य और अन्य शासक
- इनके समय वंश की शक्ति बनी रही, परन्तु धीरे-धीरे अन्य राजवंशों (चालुक्य, प्रतिहार, राष्ट्रकूट) से संघर्ष के कारण इसका पतन प्रारंभ हुआ।
3. राजधानी – वलभी
- वलभी आधुनिक गुजरात के भावनगर के समीप स्थित था।
- यह नगर व्यापार और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया।
- यहाँ से अरब देशों तक व्यापार होता था।
- यहाँ वलभी विश्वविद्यालय स्थापित था, जिसे प्राचीन भारत का एक प्रमुख शिक्षण केंद्र माना जाता है।
4. वलभी विश्वविद्यालय
- नालंदा विश्वविद्यालय की ही तरह वलभी विश्वविद्यालय भी प्रसिद्ध था।
- यह मुख्य रूप से बौद्ध शिक्षा का केंद्र था, विशेषकर हिनयान और महायान संप्रदायों के अध्ययन के लिए।
- यहाँ हजारों विद्यार्थी और सैकड़ों शिक्षक रहते थे।
- ह्वेनसांग ने वलभी विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए इसे नालंदा के समान दर्जा दिया।
- यहाँ वैदिक विषयों, व्याकरण, तर्कशास्त्र, औषधि विज्ञान, प्रशासन, राजनीति और वाणिज्य का भी अध्ययन कराया जाता था।
5. धर्म और संस्कृति
- मैत्रक शासक हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म दोनों का संरक्षण करते थे।
- कई शासकों ने बौद्ध संघों और विश्वविद्यालयों को दान दिया।
- विशेषकर ह्वेनसांग ने उल्लेख किया है कि बलादित्य (ध्रुवसेन द्वितीय) ने बौद्ध भिक्षुओं को बहुत संरक्षण दिया।
- इस वंश के शासकों ने अनेक मंदिरों और विहारों का निर्माण कराया।
6. प्रशासन और शासन व्यवस्था
- मैत्रक वंश की शासन व्यवस्था गुप्त प्रशासन से प्रभावित थी।
- शासक स्वयं को परमेश्वर और महाराजाधिराज की उपाधि देते थे।
- सामंत प्रथा का भी प्रचलन था।
- प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न प्रांतों और नगरों में नियुक्त किए जाते थे।
- भूमि अनुदान की परंपरा प्रचलित थी, जिससे ब्राह्मणों और बौद्ध संघों को भूमि दी जाती थी।
7. अर्थव्यवस्था और व्यापार
- वलभी समुद्र तट के निकट होने के कारण व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र था।
- अरब देशों और पश्चिमी एशिया के साथ व्यापारिक संबंध थे।
- कपड़ा, हाथी-दांत, मसाले और आभूषण प्रमुख निर्यात वस्तुएँ थीं।
- सिक्कों का प्रयोग व्यापक रूप से होता था।
8. कला और स्थापत्य
- वलभी काल में अनेक मंदिर और विहार बने।
- स्थापत्य शैली में गुप्त प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
- बौद्ध स्तूप और विहार, साथ ही हिंदू मंदिर, दोनों का निर्माण हुआ।
9. पतन
- 8वीं शताब्दी के अंत तक मैत्रक वंश की शक्ति क्षीण हो गई।
- चालुक्य, प्रतिहार और राष्ट्रकूट जैसे उभरते राजवंशों के संघर्ष में यह वंश धीरे-धीरे समाप्त हो गया।
- अंततः लगभग 8वीं शताब्दी ईस्वी में वंश का पूर्ण पतन हो गया।
10. महत्व और योगदान
- शिक्षा और संस्कृति – वलभी विश्वविद्यालय ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयाँ दीं।
- धार्मिक सहिष्णुता – हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों का संरक्षण किया।
- व्यापारिक महत्व – अरब देशों के साथ व्यापारिक संबंधों ने पश्चिम भारत को समृद्ध बनाया।
- राजनीतिक दृष्टि से – यह वंश गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पश्चिम भारत में स्थिरता का प्रतीक बना।
मैत्रक वंश (वलभी) गुप्तोत्तर भारत की एक महत्वपूर्ण शक्ति थी। इस वंश ने न केवल राजनीतिक सत्ता स्थापित की, बल्कि शिक्षा, धर्म, संस्कृति और व्यापार को भी प्रोत्साहन दिया। वलभी विश्वविद्यालय ने इसे विशेष ख्याति प्रदान की, और इसे भारत के सांस्कृतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण स्थान मिला।
मैत्रक वंश (Maitraka Dynasty) – FAQs
Q1. मैत्रक वंश की स्थापना किसने की थी?
मैत्रक वंश की स्थापना भट्टार्क (Bhatarka) ने 5वीं शताब्दी में की थी।
Q2. मैत्रक वंश की राजधानी कहाँ थी?
मैत्रक वंश की राजधानी वलभी (Valabhi) थी, जो आज गुजरात के भावनगर ज़िले में स्थित है।
Q3. मैत्रक वंश का उदय किस वंश के पतन के बाद हुआ?
मैत्रक वंश का उदय गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद हुआ।
Q4. वलभी विश्वविद्यालय किस वंश से संबंधित था?
वलभी विश्वविद्यालय मैत्रक वंश से संबंधित था और यह नालंदा विश्वविद्यालय के समकक्ष माना जाता था।
Q5. मैत्रक वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
ध्रुवभट्टार्क (Dhruvabhattaraka) और शिलादित्य मैत्रक वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
Q6. हर्षवर्धन और मैत्रक वंश के बीच क्या संबंध था?
हर्षवर्धन और वलभी के शासक ध्रुवभट्टार्क के बीच राजनीतिक और पारिवारिक संबंध थे।
Q7. मैत्रक वंश के पतन का कारण क्या था?
अरब आक्रमणों और आंतरिक कमजोरियों के कारण 8वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मैत्रक वंश का पतन हुआ।
Q8. मैत्रक शासक किस धर्म के अनुयायी थे?
अधिकांश मैत्रक शासक बौद्ध धर्म के संरक्षक थे, परंतु उन्होंने हिन्दू धर्म को भी संरक्षण दिया।
Q9. वलभी विश्वविद्यालय की विशेषता क्या थी?
यह विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा का केंद्र था और यहाँ से बड़ी संख्या में विद्वान तैयार हुए, जो दक्षिण-पूर्व एशिया तक प्रसिद्ध थे।
Q10. मैत्रक वंश का इतिहास जानना क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह वंश गुप्तोत्तर काल में पश्चिमी भारत की राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा।