आर्थिक विकास और नियोजन (Economic Development and Planning)
- आर्थिक विकास की परिभाषा, दृष्टिकोण और मानक
- विकास के मॉडल: विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र
- भारत का आर्थिक विकास: औद्योगिकीकरण, हरित क्रांति, श्वेत क्रांति
- आर्थिक नियोजन और नीतियाँ: पंचवर्षीय योजना, राज्य और केंद्र सरकार की नीतियाँ
- वैश्विक विकास के मुद्दे: गरीबी, विकास असमानता, बेरोजगारी
1. आर्थिक विकास की परिभाषा, दृष्टिकोण और मानक (Definition, Approaches, and Standards of Economic Development)
(i) आर्थिक विकास की परिभाषा (Definition of Economic Development)
आर्थिक विकास का अर्थ है देश की उत्पादन क्षमता, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिकरण, जीवन स्तर, और सामाजिक-आर्थिक संरचना में सकारात्मक परिवर्तन।
(ii) आर्थिक विकास के दृष्टिकोण (Approaches to Economic Development)
- सांख्यिकीय दृष्टिकोण (Statistical Approach) – आर्थिक विकास को GDP (सकल घरेलू उत्पाद), GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद), और PCI (प्रति व्यक्ति आय) के आधार पर मापा जाता है।
- सामाजिक दृष्टिकोण (Social Approach) – शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा और गरीबी उन्मूलन को आर्थिक विकास का आधार माना जाता है।
- मानव विकास दृष्टिकोण (Human Development Approach) – संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के अनुसार, आर्थिक विकास को मानव विकास सूचकांक (HDI) द्वारा मापा जाता है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर को शामिल किया जाता है।
(iii) आर्थिक विकास के मानक (Standards of Economic Development)
- GDP और GNP में वृद्धि
- औद्योगीकरण और शहरीकरण
- आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास
- गरीबी, बेरोजगारी और असमानता में कमी
- सामाजिक सूचकांक (HDI, GII, MPI) में सुधार
2. विकास के मॉडल: विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र (Development Models: World Bank and United Nations)
(i) विश्व बैंक का विकास मॉडल (World Bank’s Development Model)
- विश्व बैंक आर्थिक विकास को पूंजी निवेश, औद्योगिकीकरण, और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित मानता है।
- यह विकासशील देशों को ऋण, तकनीकी सहायता और नीतिगत सुझाव प्रदान करता है।
- विश्व बैंक गरीबी उन्मूलन और सतत विकास (Sustainable Development) पर बल देता है।
(ii) संयुक्त राष्ट्र का विकास मॉडल (United Nations’ Development Model)
- संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्य (SDGs) निर्धारित किए हैं, जिनमें गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, जलवायु कार्रवाई आदि शामिल हैं।
- UNDP (United Nations Development Programme) आर्थिक विकास को मानव विकास के साथ जोड़ता है।
- UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development) विकासशील देशों में व्यापार और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
3. भारत का आर्थिक विकास (Economic Development of India)
(i) औद्योगिकीकरण (Industrialization)
- 1951 के बाद भारत में औद्योगीकरण तेज हुआ, जिसमें इस्पात, कोयला, पेट्रोकेमिकल्स, और ऑटोमोबाइल सेक्टर का विकास हुआ।
- नई औद्योगिक नीति 1991 के तहत निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण (LPG Reforms) को अपनाया गया।
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
(ii) हरित क्रांति (Green Revolution)
- 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू हुई, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाना था।
- उन्नत बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से धान और गेहूँ का उत्पादन बढ़ा।
- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश हरित क्रांति के मुख्य क्षेत्र बने।
(iii) श्वेत क्रांति (White Revolution)
- डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए श्वेत क्रांति शुरू की गई।
- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया।
- इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला और छोटे किसानों को आजीविका का नया साधन मिला।
4. आर्थिक नियोजन और नीतियाँ (Economic Planning and Policies)
(i) पंचवर्षीय योजनाएँ (Five-Year Plans)
भारत में 1951-2017 तक पंचवर्षीय योजनाएँ लागू की गईं, जिनका उद्देश्य संतुलित आर्थिक विकास करना था।
| योजना | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|
| पहली योजना (1951-56) | कृषि विकास और सिंचाई |
| दूसरी योजना (1956-61) | औद्योगिकीकरण |
| तीसरी योजना (1961-66) | कृषि और उद्योग में संतुलन |
| हरित क्रांति (1966-69) | खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि |
| छठी योजना (1980-85) | गरीबी उन्मूलन |
| नई आर्थिक नीति (1991) | उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण |
(ii) केंद्र और राज्य सरकार की नीतियाँ (Central and State Government Policies)
- मेक इन इंडिया (Make in India) – औद्योगीकरण और निवेश को बढ़ावा देना।
- स्टार्टअप इंडिया (Startup India) – नवाचार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देना।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) – किसानों को आर्थिक सहायता।
- मुद्रा योजना (MUDRA Yojana) – छोटे व्यापारियों को कर्ज उपलब्ध कराना।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) – डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना।
5. वैश्विक विकास के मुद्दे (Global Development Issues)
(i) गरीबी (Poverty)
- विश्व बैंक के अनुसार, अत्यधिक गरीबी की रेखा $2.15 प्रतिदिन तय की गई है।
- अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अब भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं।
- गरीबी को दूर करने के लिए रोजगार योजनाएँ, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा पर बल दिया जा रहा है।
(ii) विकास असमानता (Development Inequality)
- कुछ देशों में तेजी से विकास हो रहा है, जबकि कुछ देश पिछड़े रह गए हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश का लाभ केवल विकसित देशों को अधिक मिल रहा है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता विकासशील देशों में प्रमुख समस्या है।
(iii) बेरोजगारी (Unemployment)
- तकनीकी प्रगति के कारण कई नौकरियाँ समाप्त हो रही हैं।
- बेरोजगारी दर को कम करने के लिए नई औद्योगिक नीतियाँ और कौशल विकास कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं।
आर्थिक विकास केवल GDP और औद्योगीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक प्रगति, सतत विकास, और आर्थिक असमानताओं के समाधान से भी जुड़ा हुआ है। भारत ने औद्योगिकीकरण, हरित क्रांति, और श्वेत क्रांति जैसी पहल से आर्थिक विकास को गति दी है, लेकिन अभी भी गरीबी, बेरोजगारी, और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
भविष्य की रणनीतियाँ (Future Strategies)
- संतुलित आर्थिक विकास – कृषि, उद्योग, और सेवा क्षेत्र में समान विकास।
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर ध्यान केंद्रित करना।
- तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना।
- समानता और समावेशन (Inclusion) को प्राथमिकता देना।
इस तरह, “न्यायसंगत और समावेशी आर्थिक विकास” की दिशा में निरंतर प्रयास करना आवश्यक है।