स्थलरूप निर्माण प्रक्रियाएँ – Geomorphological Processes

स्थलरूप निर्माण प्रक्रियाएँ (Geomorphological Processes)


  • अंतर्जात बल (Endogenic Forces): वलन, भ्रंश, और ज्वालामुखीय क्रियाएँ
  • बहिर्जात बल (Exogenic Forces): कटाव, अपक्षय, निक्षेपण
  • प्रमुख स्थलरूप: पर्वत, पठार, मैदान, घाटियां
  • नदी, ग्लेशियर, पवन, और समुद्री प्रक्रियाओं से बने स्थलरूप
  • स्थलरूप निर्माण प्रक्रियाएँ (Geomorphological Processes) वे भूगर्भीय प्रक्रियाएँ हैं जो पृथ्वी की सतह के आकार, संरचना और विशेषताओं को प्रभावित करती हैं। ये प्रक्रियाएँ दो प्रमुख प्रकारों में विभाजित की जाती हैं:

    1. अंतर्जात बल (Endogenic Forces) – ये पृथ्वी के आंतरिक बलों से उत्पन्न होती हैं और वलन, भ्रंश, तथा ज्वालामुखीय क्रियाओं के रूप में प्रकट होती हैं।
    2. बहिर्जात बल (Exogenic Forces) – ये सूर्य, वायुमंडल, जल, बर्फ और हवा के प्रभाव से होने वाली प्रक्रियाएँ हैं, जो कटाव, अपक्षय, और निक्षेपण के रूप में कार्य करती हैं।

    इस अध्याय में हम स्थलरूप निर्माण की इन प्रक्रियाओं की विस्तृत चर्चा करेंगे।


    1. अंतर्जात बल (Endogenic Forces)

    अंतर्जात बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में उत्पन्न होते हैं और पृथ्वी की सतह पर विभिन्न भू-आकृतिक परिवर्तनों का कारण बनते हैं। इन्हें मुख्यतः दो प्रकारों में बाँटा जाता है:

    (A) वलन (Folding)

    वलन वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की परतों में दबाव के कारण सिलवटें उत्पन्न होती हैं। जब टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, तो तलछटी चट्टानें मुड़कर पर्वत श्रृंखलाओं का निर्माण करती हैं।

    प्रमुख उदाहरण:

    • हिमालय पर्वत (Himalayas) – भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराने से बना।
    • एल्प्स पर्वत (Alps) – यूरोप में स्थित, प्लेट संकुचन के कारण बना।

    (B) भ्रंश (Faulting)

    भ्रंश तब उत्पन्न होते हैं जब पृथ्वी की चट्टानें अत्यधिक दबाव या तनाव के कारण टूट जाती हैं और उनके खंड एक-दूसरे के सापेक्ष खिसक जाते हैं।

    प्रमुख भ्रंश प्रकार:

    1. सामान्य भ्रंश (Normal Fault) – जब एक भाग नीचे चला जाता है और दूसरा ऊपर उठ जाता है।
    2. रिवर्स भ्रंश (Reverse Fault) – जब संपीड़न बल के कारण एक भाग ऊपर उठ जाता है।
    3. स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश (Strike-Slip Fault) – जब चट्टानें क्षैतिज दिशा में खिसकती हैं।

    उदाहरण:

    • सैन एंड्रियास भ्रंश (San Andreas Fault, USA)
    • राइन भ्रंश घाटी (Rhine Rift Valley, यूरोप)

    (C) ज्वालामुखीय क्रियाएँ (Volcanic Activities)

    जब पृथ्वी के आंतरिक भाग से मैग्मा, गैस और राख बाहर निकलती है, तो इसे ज्वालामुखीय क्रिया कहते हैं।

    ज्वालामुखी के प्रकार:

    1. सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcanoes) – लगातार या समय-समय पर विस्फोट होते रहते हैं (जैसे माउंट एटना, इटली)।
    2. सुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcanoes) – लंबे समय तक शांत रहते हैं, लेकिन भविष्य में विस्फोट हो सकता है (जैसे माउंट फुजी, जापान)।
    3. मृत ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes) – अब विस्फोट नहीं होते (जैसे एडम्स पर्वत, अमेरिका)।

    महत्वपूर्ण ज्वालामुखी:

    • माउंट वेसुवियस (Mount Vesuvius, इटली)
    • क्राकाटोआ (Krakatoa, इंडोनेशिया)
    • माउंट सेंट हेलेंस (Mount St. Helens, USA)

    2. बहिर्जात बल (Exogenic Forces)

    बहिर्जात बल वे प्रक्रियाएँ हैं जो पृथ्वी की सतह पर बाहरी प्रभावों से स्थलरूपों को बदलती हैं। ये मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं:

    (A) कटाव (Erosion)

    कटाव वह प्रक्रिया है जिसमें पानी, हवा, बर्फ और समुद्री लहरें चट्टानों को धीरे-धीरे घिसकर नष्ट कर देती हैं।

    कटाव के प्रमुख कारक:

    • नदीय कटाव (Fluvial Erosion) – नदियाँ घाटियों और गहरे गड्ढों का निर्माण करती हैं।
    • पवन कटाव (Aeolian Erosion) – रेगिस्तानों में तेज हवाएँ चट्टानों को काटती हैं।
    • ग्लेशियर कटाव (Glacial Erosion) – बर्फीले क्षेत्रों में ग्लेशियर चट्टानों को घिसते हैं।
    • समुद्री कटाव (Marine Erosion) – समुद्री लहरें तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं।

    (B) अपक्षय (Weathering)

    अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसमें चट्टानें टूटकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाती हैं।

    अपक्षय के प्रकार:

    1. भौतिक अपक्षय (Physical Weathering) – तापमान परिवर्तन के कारण चट्टानों का टूटना।
    2. रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) – जल, ऑक्सीजन, और कार्बन डाइऑक्साइड के प्रभाव से चट्टानों का घुलना।
    3. जैविक अपक्षय (Biological Weathering) – पेड़-पौधों की जड़ें और जीवाणुओं के प्रभाव से चट्टानों का क्षरण।

    (C) निक्षेपण (Deposition)

    कटाव से उत्पन्न कण जब किसी स्थान पर जमा होते हैं, तो उसे निक्षेपण कहा जाता है।

    निक्षेपण के प्रमुख स्थल:

    • नदी के डेल्टा (River Deltas) – जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा।
    • रेगिस्तानों में बालू के टीले (Sand Dunes in Deserts)
    • ग्लेशियर द्वारा छोड़ी गई चट्टानें (Moraines in Glaciers)

    3. प्रमुख स्थलरूप: पर्वत, पठार, मैदान, और घाटियाँ

    पृथ्वी की सतह विविध स्थलरूपों से मिलकर बनी है, जो विभिन्न भूगर्भीय और बाह्य प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनते हैं। इन स्थलरूपों में पर्वत, पठार, मैदान, और घाटियाँ प्रमुख हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से प्लेट विवर्तनिकी, ज्वालामुखी गतिविधि, अपक्षय, कटाव, और निक्षेपण जैसी प्रक्रियाओं के कारण होता है।


    3.1. पर्वत (Mountains)

    पर्वत क्या हैं?

    पर्वत पृथ्वी की सतह पर उभरी हुई ऊँची संरचनाएँ होती हैं, जिनकी ढलान तेज और ऊँचाई अधिक होती है। पर्वतों का निर्माण मुख्यतः वलन, भ्रंश, और ज्वालामुखीय गतिविधियों से होता है।

    पर्वतों के प्रकार:

    (A) वलित पर्वत (Fold Mountains)

    वलित पर्वत तब बनते हैं जब दो टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह पर चट्टानें संकुचित होकर मुड़ जाती हैं और सिलवटें बना लेती हैं।
    उदाहरण:

    • हिमालय (Himalayas) – भारत, नेपाल, भूटान
    • एल्प्स (Alps) – यूरोप
    • एंडीज (Andes) – दक्षिण अमेरिका

    (B) भ्रंश पर्वत (Fault-Block Mountains)

    जब पृथ्वी की क्रस्ट में भ्रंश (Fault) के कारण एक हिस्सा ऊपर उठ जाता है और दूसरा नीचे चला जाता है, तो भ्रंश पर्वत बनते हैं।
    उदाहरण:

    • सिएरा नेवादा (Sierra Nevada) – अमेरिका
    • राइन ग्रैबेन (Rhine Graben) – यूरोप

    (C) ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountains)

    ज्वालामुखी पर्वत तब बनते हैं जब पृथ्वी के अंदर से मैग्मा बाहर निकलकर ठंडा हो जाता है और धीरे-धीरे परतें बनती हैं।
    उदाहरण:

    • माउंट फुजी (Mount Fuji) – जापान
    • माउंट वेसुवियस (Mount Vesuvius) – इटली
    • क्राकाटोआ (Krakatoa) – इंडोनेशिया

    (D) अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountains)

    ये पर्वत पुराने पर्वतों के अपक्षय और कटाव से बची हुई ऊँची संरचनाएँ होती हैं।
    उदाहरण:

    • अरावली पर्वत (Aravalli Range) – भारत
    • विंध्याचल पर्वत (Vindhya Range) – भारत

    3.2 पठार (Plateaus)

    पठार क्या हैं?

    पठार वे स्थलरूप होते हैं जो आसपास की भूमि से ऊँचे लेकिन अपेक्षाकृत समतल होते हैं। ये आमतौर पर कटाव या ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण बनते हैं।

    पठारों के प्रकार:

    (A) अंतरमहाद्वीपीय पठार (Intermontane Plateaus)

    ये पठार पर्वतों से घिरे होते हैं और अधिक ऊँचाई पर स्थित होते हैं।
    उदाहरण:

    • तिब्बती पठार (Tibetan Plateau) – विश्व का सबसे ऊँचा पठार

    (B) महाद्वीपीय पठार (Continental Plateaus)

    ये पठार महाद्वीपों के भीतरी हिस्सों में पाए जाते हैं।
    उदाहरण:

    • डेक्कन पठार (Deccan Plateau) – भारत
    • ब्राजीलियन पठार (Brazilian Plateau) – ब्राजील

    (C) ज्वालामुखीय पठार (Volcanic Plateaus)

    ये ज्वालामुखीय उद्गार से निकलने वाले लावा के ठंडा होने से बनते हैं।
    उदाहरण:

    • कोलंबिया बेसाल्ट पठार (Columbia Basalt Plateau) – अमेरिका

    (D) क्षरणीय पठार (Erosional Plateaus)

    ये पुराने पर्वतों के कटाव और अपक्षय से बनते हैं।
    उदाहरण:

    • छोटा नागपुर पठार (Chotanagpur Plateau) – भारत

    3.3 मैदान (Plains)

    मैदान क्या हैं?

    मैदान समतल या थोड़ा ढलान वाली भूमि होती है, जो मुख्य रूप से नदियों द्वारा लाई गई गाद, जलोढ़ मिट्टी या अन्य निक्षेपण से बनती है।

    मैदानों के प्रकार:

    (A) जलोढ़ मैदान (Alluvial Plains)

    नदियों द्वारा लाई गई गाद से बने मैदान।
    उदाहरण:

    • गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान (India, Bangladesh)
    • मिसीसिपी मैदान (Mississippi Plains) – USA

    (B) लैस मैदान (Loess Plains)

    हवा द्वारा लाई गई महीन मिट्टी से बने मैदान।
    उदाहरण:

    • चीन का लैस मैदान (Loess Plateau, China)

    (C) वायवीय मैदान (Aeolian Plains)

    हवा द्वारा लाई गई रेत से बने मैदान।
    उदाहरण:

    • थार मरुस्थल (Thar Desert) – भारत

    (D) ग्लेशियर मैदान (Glacial Plains)

    ग्लेशियर द्वारा लाई गई मिट्टी से बने मैदान।
    उदाहरण:

    • कनाडा का टुंड्रा क्षेत्र (Canadian Shield)

    3.4 घाटियाँ (Valleys)

    घाटियाँ क्या हैं?

    घाटियाँ पृथ्वी की सतह पर संकरी, गहरी और लंबी संरचनाएँ होती हैं, जो मुख्यतः नदी, ग्लेशियर, और भूकंपीय गतिविधियों से बनती हैं।

    घाटियों के प्रकार:

    (A) नदी घाटी (River Valley)

    नदियों के कटाव से बनी घाटियाँ।
    उदाहरण:

    • गंगा घाटी (Ganga Valley) – भारत
    • ग्रांड कैन्यन (Grand Canyon) – USA

    (B) ग्लेशियर घाटी (Glacial Valley)

    ग्लेशियर के कटाव से बनी घाटियाँ।
    उदाहरण:

    • स्विस आल्प्स (Swiss Alps) – यूरोप

    (C) वायवीय घाटी (Eolian Valley)

    हवा द्वारा बनी घाटियाँ।
    उदाहरण:

    • डेथ वैली (Death Valley) – USA

    पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूपों में पर्वत, पठार, मैदान और घाटियाँ महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। प्रत्येक स्थलरूप अपने निर्माण की प्रक्रिया, संरचना, और भौगोलिक महत्व के कारण अद्वितीय होता है। भूगर्भीय और बाह्य प्रक्रियाएँ लगातार इन संरचनाओं को प्रभावित करती हैं, जिससे वे समय के साथ बदलते रहते हैं।

    4. नदी, ग्लेशियर, पवन और समुद्री प्रक्रियाओं से बने स्थलरूप

    पृथ्वी की सतह निरंतर बदलती रहती है, और इसका निर्माण विभिन्न भू-आकृतिक प्रक्रियाओं (Geomorphological Processes) द्वारा होता है। इन प्रक्रियाओं को मुख्य रूप से नदी, ग्लेशियर, पवन, और समुद्री क्रियाओं में वर्गीकृत किया जाता है। प्रत्येक प्रक्रिया भिन्न-भिन्न स्थलरूपों (Landforms) का निर्माण करती है, जो पृथ्वी की सतह को विशिष्ट आकार और विशेषताएँ प्रदान करते हैं।


    4.1 नदी जनित स्थलरूप (Fluvial Landforms)

    नदियाँ अपनी कटाव (Erosion), निक्षेपण (Deposition) और परिवहन (Transportation) शक्तियों से अनेक स्थलरूपों का निर्माण करती हैं। नदी द्वारा निर्मित स्थलरूप तीन अवस्थाओं में देखे जाते हैं—ऊपरी प्रवाह क्षेत्र, मध्य प्रवाह क्षेत्र, और निचला प्रवाह क्षेत्र

    (A) ऊपरी प्रवाह क्षेत्र (Upper Course) में बनने वाले स्थलरूप:

    यहाँ नदी की ऊर्जा अधिक होती है, जिससे गहरा कटाव होता है।

    1. वी-आकृति घाटी (V-shaped Valley)

      • नदी के ऊर्ध्वाधर कटाव (Vertical Erosion) से बनती है।
      • उदाहरण: गंगा की ऊपरी घाटी।
    2. जलप्रपात (Waterfalls)

      • कठोर और नरम चट्टानों की परतों के बीच कटाव से बनते हैं।
      • उदाहरण: जोग फॉल्स (भारत), नियाग्रा फॉल्स (अमेरिका-कनाडा)।
    3. गर्ज (Gorge) और कैन्यन (Canyon)

      • गहरी और संकरी घाटियाँ होती हैं।
      • उदाहरण: ग्रांड कैन्यन (अमेरिका)।

    (B) मध्य प्रवाह क्षेत्र (Middle Course) में बनने वाले स्थलरूप:

    इस क्षेत्र में नदी का प्रवाह धीमा होता है, जिससे पार्श्वीय (Lateral) कटाव होता है।

    1. मैंदानी घाटियाँ (Valley Plains)

      • नदी द्वारा चौड़े समतल क्षेत्र का निर्माण।
    2. मियांडर (Meanders)

      • नदी के घुमावदार मोड़, जो क्षैतिज कटाव के कारण बनते हैं।
      • उदाहरण: गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में कई मियांडर।

    (C) निचला प्रवाह क्षेत्र (Lower Course) में बनने वाले स्थलरूप:

    यहाँ नदी की गति धीमी होती है और मुख्यतः निक्षेपण होता है।

    1. गाद मैदान (Flood Plains)

      • बाढ़ के दौरान निक्षेपित अवसादों से बनते हैं।
    2. डेल्टा (Delta)

      • नदी के मुहाने पर अवसाद जमा होने से बनते हैं।
      • उदाहरण: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन डेल्टा)।

    4.2 हिमानी (ग्लेशियर) जनित स्थलरूप (Glacial Landforms)

    ग्लेशियर (Glaciers) अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में कटाव और निक्षेपण के माध्यम से कई स्थलरूपों का निर्माण करते हैं।

    (A) हिमानी कटाव से बने स्थलरूप:

    1. यू-आकृति घाटी (U-shaped Valley)

      • ग्लेशियर के चलते समय कटाव से बनती है।
      • उदाहरण: यूरोप के आल्प्स में पाई जाने वाली घाटियाँ।
    2. सर्क (Cirque)

      • कटोरे जैसी गहरी संरचनाएँ, जहाँ बर्फ जमती है।
    3. हॉर्न (Horn)

      • जब ग्लेशियर कई दिशाओं से पर्वत को काटते हैं तो नुकीली चोटी बनती है।
      • उदाहरण: मैटरहॉर्न (स्विट्जरलैंड)।

    (B) हिमानी निक्षेपण से बने स्थलरूप:

    1. मोरेन (Moraine)

      • ग्लेशियर के साथ लाई गई चट्टानों का जमाव।
    2. ड्रमलिन (Drumlin)

      • छोटी अंडाकार पहाड़ियाँ जो हिमखंड के पिघलने से बनती हैं।

    4.3 पवन (Aeolian) जनित स्थलरूप (Wind Landforms)

    शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पवन कटाव और निक्षेपण के कारण विभिन्न स्थलरूप बनाती है।

    (A) पवन कटाव से बने स्थलरूप:

    1. पेडेस्टल रॉक (Pedestal Rock) या मशरूम चट्टान

      • हवा के कटाव से चट्टान का आधार पतला और ऊपरी हिस्सा चौड़ा हो जाता है।
    2. यार्डांग (Yardang)

      • लंबी, संकरी चट्टानी संरचनाएँ जो हवा के निरंतर कटाव से बनती हैं।
    3. इनसलबर्ग (Inselberg)

      • समतल मैदानों में अकेली खड़ी चट्टानें।
      • उदाहरण: आयर्स रॉक (ऑस्ट्रेलिया)।

    (B) पवन निक्षेपण से बने स्थलरूप:

    1. बालू के टीले (Sand Dunes)

      • हवा द्वारा उड़ाई गई रेत से बनते हैं।
      • उदाहरण: थार मरुस्थल, सहारा मरुस्थल।
    2. लैस मैदान (Loess Plains)

      • हवा द्वारा लाई गई महीन धूल के जमाव से बनते हैं।
      • उदाहरण: चीन का लैस पठार।

    4.4 समुद्री (Marine) जनित स्थलरूप (Marine Landforms)

    समुद्र की लहरें, ज्वार-भाटा, और धाराएँ तटीय क्षेत्रों में भू-आकृतिक परिवर्तन करती हैं।

    (A) समुद्री कटाव से बने स्थलरूप:

    1. समुद्री गुफाएँ (Sea Caves)

      • लहरों के निरंतर प्रहार से चट्टानों में गुफाएँ बन जाती हैं।
    2. समुद्री मेहराब (Sea Arch)

      • जब गुफाएँ और बड़ी हो जाती हैं तो वे मेहराब का रूप ले लेती हैं।
    3. समुद्री स्तंभ (Sea Stack)

      • जब समुद्री मेहराब गिर जाता है, तो अलग खड़े स्तंभ रह जाते हैं।

    (B) समुद्री निक्षेपण से बने स्थलरूप:

    1. समुद्री बीच (Beaches)

      • समुद्री लहरों द्वारा लाई गई रेत के जमाव से बनते हैं।
      • उदाहरण: मरीना बीच (भारत), कोपाकबाना बीच (ब्राजील)।
    2. लैगून (Lagoon)

      • जब बालू की पट्टी समुद्र का एक भाग अलग कर देती है।
      • उदाहरण: चिल्का झील (भारत)।

    नदी, ग्लेशियर, पवन, और समुद्री प्रक्रियाएँ पृथ्वी की सतह को निरंतर बदलती रहती हैं। ये सभी प्रक्रियाएँ भिन्न-भिन्न स्थलरूपों का निर्माण करती हैं, जो पृथ्वी के प्राकृतिक परिदृश्य को आकार देते हैं।

    स्थलरूप निर्माण प्रक्रियाएँ पृथ्वी की सतह को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंतर्जात बल पर्वतों, भ्रंशों और ज्वालामुखियों को जन्म देते हैं, जबकि बहिर्जात बल कटाव, अपक्षय और निक्षेपण से स्थलीय संरचनाएँ बनाते हैं। इन प्रक्रियाओं की समझ भूगोल और पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए आवश्यक है।