आर्द्रता और वर्षण (Humidity and Precipitation)
वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा और उसके संघनन से बनने वाली वर्षा पृथ्वी की जलवायु और मौसम तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आर्द्रता और वर्षण की प्रक्रियाएँ जल चक्र (Hydrological Cycle) के आवश्यक घटक हैं। इस अध्याय में हम आर्द्रता के प्रकार, वर्षण की प्रक्रिया और इसके विभिन्न प्रकारों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
- संवहनीय वर्षा
- पर्वतीय वर्षा
- चक्रवातीय वर्षा
1. आर्द्रता (Humidity)
परिभाषा:
आर्द्रता वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को दर्शाती है। यह पृथ्वी के जलवायु तंत्र का एक महत्वपूर्ण तत्व है और वर्षा, कोहरा, बादल निर्माण आदि को प्रभावित करता है।
आर्द्रता के प्रकार
(i) पूर्ण आर्द्रता (Absolute Humidity)
- यह किसी विशिष्ट मात्रा की वायु में उपस्थित जलवाष्प के ग्राम में मापन को दर्शाता है।
- इसे ग्राम प्रति घन मीटर (g/m³) में मापा जाता है।
(ii) सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity – RH)
-
यह पूर्ण आर्द्रता और संतृप्त वायु की आर्द्रता के अनुपात का प्रतिशत होता है।
-
इसे निम्नलिखित सूत्र से मापा जाता है:
-
यदि सापेक्ष आर्द्रता 100% हो जाती है, तो वायु संतृप्त हो जाती है और वर्षा या संघनन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
(iii) विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity)
- यह जलवाष्प की मात्रा को कुल वायु द्रव्यमान के अनुपात में दर्शाता है।
- इसे ग्राम प्रति किलोग्राम (g/kg) में मापा जाता है।
2. वर्षण (Precipitation)
परिभाषा:
जब वायुमंडल में जलवाष्प संघनित होकर जल की बूंदों, हिमकणों, ओलों आदि के रूप में पृथ्वी की सतह पर गिरती है, तो इसे वर्षण कहा जाता है।
वर्षा बनने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
- वाष्पीकरण (Evaporation): समुद्र, झीलों, नदियों और वनस्पतियों से जल का वाष्पीकरण होता है।
- संवहन (Convection): गर्म हवा जलवाष्प के साथ ऊपर उठती है।
- संघनन (Condensation): उच्च ऊँचाई पर तापमान कम होने के कारण जलवाष्प बूँदों में परिवर्तित हो जाती है और बादल बनते हैं।
- वर्षण (Precipitation): जब बादल संतृप्त हो जाते हैं, तो जल की बूँदें पृथ्वी पर वर्षा, हिमपात या ओलों के रूप में गिरती हैं।
वर्षा के प्रकार (Types of Rainfall)
(i) संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall)
- यह वर्षा वायु के ऊर्ध्वाधर संवहन (Convection) के कारण होती है।
- यह मुख्य रूप से विषुवतीय क्षेत्रों (Equatorial Regions) में पाई जाती है।
- दिन के समय जब सूर्य की गर्मी से सतह गरम होती है, तो हवा ऊपर उठती है, संघनन होता है, और शाम के समय वर्षा होती है।
- उदाहरण: अमेज़न वर्षावन में प्रतिदिन होने वाली दोपहर की वर्षा।
(ii) पर्वतीय वर्षा (Orographic or Relief Rainfall)
- यह तब होती है जब नम हवा पहाड़ों से टकराती है और ऊँचाई पर उठकर ठंडी होकर संघनित हो जाती है।
- इसके कारण पहाड़ के एक तरफ अधिक वर्षा होती है, जिसे ऊर्ध्वपुष्ट भाग (Windward Side) कहा जाता है, जबकि दूसरी ओर छाया प्रदेश (Leeward Side) में कम वर्षा होती है।
- उदाहरण: पश्चिमी घाट के पश्चिमी हिस्से में अधिक वर्षा और पूर्वी हिस्से में कम वर्षा।
(iii) चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall)
- यह तब होती है जब दो अलग-अलग तापमान वाली वायु धाराएँ मिलती हैं और संघनन के कारण बादल बनते हैं।
- मुख्यतः शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में देखी जाती है।
- भारत में यह पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है।
आर्द्रता और वर्षण पृथ्वी के जलवायु तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। आर्द्रता जलवायु को प्रभावित करती है और वर्षा का निर्धारण करती है। संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवातीय वर्षा विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में पाई जाती हैं। इन प्रक्रियाओं की समझ मौसम पूर्वानुमान और जल प्रबंधन में सहायक होती है।