जलवायु और जलवायु प्रदेश (Climate and Climatic Regions)
जलवायु किसी स्थान की दीर्घकालिक औसत वायुमंडलीय परिस्थितियों को दर्शाती है, जो तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन प्रवाह और अन्य जलवायु तत्वों पर निर्भर करती है। पृथ्वी पर विभिन्न जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं, जो अक्षांश, ऊँचाई, महासागरीय धाराओं और स्थलाकृति से प्रभावित होते हैं। इस अध्याय में हम जलवायु वर्गीकरण, विभिन्न जलवायु प्रदेशों की विशेषताओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
- जलवायु वर्गीकरण: कोपेन का वर्गीकरण
- विभिन्न जलवायु प्रदेशों की विशेषताएँ
- जलवायु परिवर्तन और इसका प्रभाव
1. जलवायु वर्गीकरण (Climate Classification)
भौगोलिक दृष्टि से पृथ्वी की जलवायु को विभिन्न आधारों पर विभाजित किया जाता है। कई वैज्ञानिकों ने जलवायु वर्गीकरण के सिद्धांत विकसित किए हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध कोपेन जलवायु वर्गीकरण (Köppen Climate Classification) है।
(i) कोपेन का जलवायु वर्गीकरण (Köppen Climate Classification)
जर्मन जलवायु वैज्ञानिक व्लादिमीर कोपेन (Wladimir Köppen) ने 1918 में यह वर्गीकरण प्रस्तुत किया था। उन्होंने विभिन्न जलवायु प्रदेशों को अक्षांश, तापमान और वर्षा के आधार पर पाँच मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया:
| कोपेन का कोड | जलवायु प्रकार | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| A – उष्णकटिबंधीय (Tropical) | पूरे वर्ष गर्म और आर्द्र, औसत तापमान 18°C से अधिक | अमेज़न, कांगो बेसिन, दक्षिण-पूर्व एशिया |
| B – शुष्क (Dry) | कम वर्षा, उच्च तापमान, शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र | सहारा रेगिस्तान, राजस्थान, अरब प्रायद्वीप |
| C – शीतोष्ण (Temperate) | मध्यम तापमान, ठंडे सर्दी और गर्म ग्रीष्म | पश्चिमी यूरोप, पूर्वी अमेरिका, चीन |
| D – महाद्वीपीय (Continental) | ठंडी सर्दी, गर्म ग्रीष्म, अधिक मौसमी भिन्नता | साइबेरिया, कनाडा, रूस |
| E – ध्रुवीय (Polar) | अत्यधिक ठंडा, बर्फीले क्षेत्र | अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड |
2. विभिन्न जलवायु प्रदेशों की विशेषताएँ
(i) उष्णकटिबंधीय जलवायु (Tropical Climate – A Type)
- यह जलवायु भूमध्य रेखा के आसपास 23.5° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच पाई जाती है।
- पूरे वर्ष उच्च तापमान (18°C से अधिक) और अधिक वर्षा होती है।
- यहाँ वर्षावन (Rainforest) और सवाना (Savanna) पाए जाते हैं।
(ii) शुष्क जलवायु (Dry Climate – B Type)
- यहाँ बहुत कम वर्षा होती है, जिससे शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियाँ बनती हैं।
- मुख्यतः 15°-30° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच पाई जाती है।
- इस क्षेत्र में मुख्यतः रेगिस्तान (Deserts) और घास के मैदान (Steppes) होते हैं।
(iii) शीतोष्ण जलवायु (Temperate Climate – C Type)
- यह मुख्यतः मध्यम अक्षांशों (30°-50°) पर पाई जाती है।
- यहाँ ग्रीष्मकाल गर्म और सर्दियाँ ठंडी होती हैं।
- इसमें मुख्यतः समशीतोष्ण वनों (Temperate Forests) का विकास होता है।
(iv) महाद्वीपीय जलवायु (Continental Climate – D Type)
- यह मुख्यतः 40°-60° उत्तरी अक्षांशों पर पाई जाती है।
- इसमें तापमान का अंतर अधिक होता है – ग्रीष्मकाल गर्म और सर्दियाँ अत्यधिक ठंडी हो सकती हैं।
- यह मुख्यतः टैगा वन (Taiga Forests) का क्षेत्र होता है।
(v) ध्रुवीय जलवायु (Polar Climate – E Type)
- यह मुख्यतः आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में पाई जाती है।
- यहाँ पूरे वर्ष बर्फ जमी रहती है और तापमान 0°C से नीचे होता है।
- इस क्षेत्र में मुख्यतः टुंड्रा (Tundra) पाए जाते हैं।
3. जलवायु परिवर्तन और इसका प्रभाव (Climate Change and Its Impact)
(i) जलवायु परिवर्तन के कारण (Causes of Climate Change)
-
प्राकृतिक कारण:
- सूर्यीय विकिरण में परिवर्तन
- ज्वालामुखी विस्फोट
- महासागरीय धाराओं में परिवर्तन
-
मानवजनित कारण:
- ग्रीनहाउस गैसों (CO₂, CH₄, N₂O) का उत्सर्जन
- वनस्पति विनाश और वनों की कटाई
- औद्योगिक क्रियाएँ और जीवाश्म ईंधन का अधिक उपयोग
(ii) जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Impacts of Climate Change)
- ग्लोबल वार्मिंग: पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे हिमखंड पिघल रहे हैं।
- समुद्र स्तर वृद्धि: ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय क्षेत्रों पर खतरा बढ़ रहा है।
- मौसम अस्थिरता: अधिक हीटवेव, सूखा, बाढ़, और चक्रवात जैसी आपदाएँ बढ़ रही हैं।
- जैव विविधता पर प्रभाव: कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं और पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो रहे हैं।
(iii) जलवायु परिवर्तन के समाधान (Solutions to Climate Change)
- ग्रीनहाउस गैसों का नियंत्रण: कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना।
- वन संरक्षण: अधिक वृक्षारोपण और जंगलों की सुरक्षा।
- अंतरराष्ट्रीय प्रयास: पेरिस समझौता (Paris Agreement) जैसे वैश्विक समझौते जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
जलवायु विज्ञान पृथ्वी की पर्यावरणीय दशाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोपेन का वर्गीकरण हमें जलवायु प्रदेशों की विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करता है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है, जिसके प्रभाव को कम करने के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता है।