प्राकृतिक आपदाएँ और प्रबंधन – Natural Disasters and Management

 प्राकृतिक आपदाएँ और प्रबंधन (Natural Disasters and Management)

प्राकृतिक आपदाएँ (Natural Disasters) वे घटनाएँ होती हैं, जो प्रकृति की विभिन्न प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होती हैं और मनुष्यों तथा पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। ये आपदाएँ अचानक उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि भूकंप और ज्वालामुखी, या धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं, जैसे कि सूखा। प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव जनसंख्या, बुनियादी ढाँचे, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा पड़ता है। अतः इनसे निपटने के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन (Disaster Management) आवश्यक है।

  • भूकंप, ज्वालामुखी, बाढ़, सूखा, चक्रवात
  • आपदा न्यूनीकरण और प्रबंधन

  • 1. प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ (Major Natural Disasters)

    (i) भूकंप (Earthquake)

    भूकंप क्या है?

    भूकंप पृथ्वी की सतह के कंपन होते हैं, जो टेक्टोनिक प्लेटों की गतियों के कारण उत्पन्न होते हैं। यह ऊर्जा की तीव्र मुक्ति के कारण होता है, जो भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के रूप में फैलती है।

    भूकंप के कारण:

    1. प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics): पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों का टकराना, दूर जाना या खिसकना।
    2. भ्रंश (Faults) की गतिविधि: भ्रंश रेखाओं (Fault Lines) पर दबाव बढ़ने से भूकंप आते हैं।
    3. ज्वालामुखी विस्फोट: ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण भी भूकंप उत्पन्न हो सकते हैं।
    4. मानव-जनित गतिविधियाँ: खनन, बाँधों में जल भराव और परमाणु परीक्षण से भी भूकंप आ सकते हैं।

    भूकंप के प्रभाव:

    • जान-माल की हानि
    • भवनों और बुनियादी ढाँचे का ध्वंस
    • भूस्खलन और सुनामी का खतरा
    • आर्थिक नुकसान और विस्थापन

    (ii) ज्वालामुखी (Volcanic Eruption)

    ज्वालामुखी क्या है?

    ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वह स्थान होता है, जहाँ से मैग्मा, राख, और गैसें बाहर निकलती हैं।

    ज्वालामुखी के प्रकार:

    1. सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano): लगातार या समय-समय पर विस्फोट करने वाला ज्वालामुखी।
    2. सुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcano): बहुत लंबे समय से निष्क्रिय, लेकिन भविष्य में सक्रिय हो सकता है।
    3. मृत ज्वालामुखी (Extinct Volcano): जिसके पुनः सक्रिय होने की संभावना नहीं होती।

    ज्वालामुखी के प्रभाव:

    • लावा प्रवाह से तबाही
    • वायुमंडल में राख और जहरीली गैसों का उत्सर्जन
    • भूकंप और सुनामी का खतरा
    • जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव

    (iii) बाढ़ (Flood)

    बाढ़ क्या है?

    बाढ़ तब आती है जब किसी क्षेत्र में जल की मात्रा उसकी वहन क्षमता से अधिक हो जाती है। यह अत्यधिक वर्षा, नदी के उफान, तटबंध टूटने, या समुद्री तूफानों के कारण हो सकती है।

    बाढ़ के कारण:

    1. अत्यधिक वर्षा
    2. नदियों और जलाशयों का अतिप्रवाह
    3. वनों की कटाई और शहरीकरण
    4. चक्रवात और समुद्री तूफान

    बाढ़ के प्रभाव:

    • जान-माल की हानि
    • संक्रामक बीमारियों का प्रकोप
    • कृषि और फसलों को नुकसान
    • बुनियादी ढाँचे की तबाही

    (iv) सूखा (Drought)

    सूखा क्या है?

    सूखा तब होता है जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक वर्षा नहीं होती, जिससे जल संकट उत्पन्न होता है।

    सूखे के कारण:

    1. कम वर्षा और जलवायु परिवर्तन
    2. भूजल का अत्यधिक दोहन
    3. वनों की कटाई और मिट्टी की नमी का नुकसान

    सूखे के प्रभाव:

    • कृषि उत्पादन में कमी
    • जल संकट और भुखमरी
    • वन्यजीवों और जैव विविधता पर प्रभाव
    • पलायन और आर्थिक संकट

    (v) चक्रवात (Cyclone)

    चक्रवात क्या है?

    चक्रवात एक तीव्र गति वाली वायुप्रणाली होती है, जो उष्णकटिबंधीय महासागरों में विकसित होती है और तीव्र वायु तथा भारी वर्षा के साथ तटों से टकराती है।

    चक्रवात के प्रकार:

    1. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone): गर्म समुद्रों पर विकसित होते हैं।
    2. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclone): ठंडे क्षेत्रों में विकसित होते हैं।

    चक्रवात के प्रभाव:

    • भीषण वर्षा और बाढ़
    • तेज़ हवाओं से संरचनाओं को नुकसान
    • समुद्री जल स्तर में वृद्धि
    • कृषि और मत्स्य उद्योग को क्षति

    2. आपदा न्यूनीकरण और प्रबंधन (Disaster Mitigation and Management)

    आपदा न्यूनीकरण (Disaster Mitigation) उन उपायों को संदर्भित करता है, जो आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायता करते हैं। आपदा प्रबंधन (Disaster Management) प्राकृतिक आपदाओं से बचाव, प्रतिक्रिया और पुनर्वास की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।

    (i) आपदा पूर्व तैयारी (Preparedness)

    • संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान
    • आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करना
    • आपातकालीन बचाव और राहत दल का गठन
    • जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम

    (ii) आपदा के दौरान प्रतिक्रिया (Response)

    • त्वरित बचाव और राहत कार्य
    • घायलों को चिकित्सा सहायता
    • सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था
    • संचार और परिवहन व्यवस्था बनाए रखना

    (iii) आपदा के बाद पुनर्वास (Rehabilitation and Recovery)

    • प्रभावित लोगों को पुनः बसाना
    • जल और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
    • मानसिक और सामाजिक समर्थन देना
    • आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण की योजना बनाना

    प्राकृतिक आपदाएँ अनियंत्रित होती हैं, लेकिन प्रभावी आपदा प्रबंधन और सतर्कता के माध्यम से इनके प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है। आधुनिक तकनीक, जागरूकता अभियान, और प्रभावी सरकारी नीतियाँ प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सहायक हो सकती हैं। सतत विकास और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए आपदाओं की आवृत्ति और प्रभाव को कम किया जा सकता है।