भारत की भौतिक संरचना (Physical Structure of India)

भारत की भौतिक संरचना (Physical Structure of India)

भारत की भौतिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, जिसमें ऊँचे पर्वत, विशाल मैदान, पठार, तटीय क्षेत्र, और द्वीप शामिल हैं। यह संरचना मुख्य रूप से टेक्टोनिक हलचलों, अपक्षय, और क्षरण प्रक्रियाओं के कारण बनी है। इस अध्याय में भारत की भौतिक संरचना को विस्तार से समझेंगे।

  • भारत के प्रमुख भौगोलिक विभाग:
    • हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र
    • उत्तरी मैदानी क्षेत्र
    • प्रायद्वीपीय पठार
    • तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह
  • संरचनात्मक विशेषताएँ और उनका महत्व

1. भारत की भौतिक संरचना का वर्गीकरण (Classification of the Physical Structure of India)

भारत की भौतिक संरचना को पाँच प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है:

  1. उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र (Northern Mountains)
  2. उत्तरी मैदान (Northern Plains)
  3. प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau)
  4. तटीय मैदान (Coastal Plains)
  5. द्वीप समूह (Islands)

1.1 उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र (Northern Mountains)

यह क्षेत्र हिमालय पर्वत श्रेणी का हिस्सा है और भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है। हिमालय पर्वत भारतीय उपमहाद्वीप को एशिया के शेष भागों से अलग करता है और इसे प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

(i) हिमालय की उत्पत्ति और संरचना (Formation and Structure of Himalayas)

  • हिमालय पर्वत टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के परिणामस्वरूप बना है।
  • यह पर्वत श्रेणी भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के संकुचन से बनी है।
  • यह विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला है और इसमें कई उच्च शिखर स्थित हैं।

(ii) हिमालय की प्रमुख श्रेणियाँ (Major Ranges of Himalayas)

हिमालय को भौगोलिक रूप से तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:

  1. महान हिमालय (Greater Himalayas / Himadri)

    • यह हिमालय का सबसे ऊँचा और पुराना भाग है।
    • इस श्रेणी में माउंट एवरेस्ट (8848.86 मी.), कंचनजंगा (8586 मी.), नंगा पर्वत (8126 मी.) आदि स्थित हैं।
    • यहाँ सालभर बर्फ जमी रहती है।
  2. मध्य हिमालय (Lesser Himalayas / Himachal)

    • यह हिमालय की मध्यम ऊँचाई वाली श्रृंखला है।
    • इस क्षेत्र में प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल जैसे शिमला, मसूरी, नैनीताल, मनाली आदि स्थित हैं।
    • यहाँ प्रमुख दर्रे जैसे रोहतांग दर्रा, जोजीला दर्रा, नाथूला दर्रा आदि पाए जाते हैं।
  3. शिवालिक हिमालय (Shivalik Himalayas)

    • यह हिमालय की सबसे निचली और नवीनतम श्रेणी है।
    • यह अपेक्षाकृत कम ऊँचाई वाला क्षेत्र है और इसमें दून घाटियाँ (जैसे देहरादून, कोटलीदून) पाई जाती हैं।

1.2 उत्तरी मैदान (Northern Plains)

यह क्षेत्र हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा बना है और भारत का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है।

(i) उत्तरी मैदान की विशेषताएँ (Characteristics of Northern Plains)

  • यह मैदान गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी प्रणालियों द्वारा निर्मित है।
  • यह लगभग 7 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है और अत्यंत उपजाऊ है।
  • यहाँ कई प्रमुख कृषि उत्पाद जैसे चावल, गेहूँ, गन्ना, दलहन उगाए जाते हैं।

(ii) उत्तरी मैदान के उपभाग (Subdivisions of Northern Plains)

  1. सिंधु मैदान (Indus Plain) – पाकिस्तान और पंजाब के कुछ हिस्सों में फैला हुआ।
  2. गंगा मैदान (Ganga Plain) – उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल में स्थित।
  3. ब्रह्मपुत्र मैदान (Brahmaputra Plain) – असम और पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित।

1.3 प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau)

यह भारत का सबसे पुराना भौगोलिक क्षेत्र है और मुख्य रूप से गोंडवाना भूमि का अवशेष है।

(i) विशेषताएँ (Characteristics of Peninsular Plateau)

  • यह बुंदेलखंड, विंध्य, सतपुड़ा, अरावली और दक्कन के पठारों में विभाजित है।
  • यह कटक (Odisha) से लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु तक फैला हुआ है।
  • इसमें प्रमुख नदियाँ – नर्मदा, ताप्ती, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी प्रवाहित होती हैं।

(ii) प्रमुख उपभाग (Subdivisions of Peninsular Plateau)

  1. मालवा पठार (Malwa Plateau) – मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थित।
  2. दक्कन पठार (Deccan Plateau) – महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक में फैला हुआ।
  3. छोटानागपुर पठार (Chotanagpur Plateau) – झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल में स्थित।
  4. विंध्य और सतपुड़ा श्रेणी (Vindhya and Satpura Range) – मध्य भारत में स्थित।

1.4 तटीय मैदान (Coastal Plains)

भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के साथ फैले हुए मैदान तटीय मैदान कहलाते हैं।

(i) पश्चिमी तटीय मैदान (Western Coastal Plains)

  • अरब सागर के किनारे स्थित हैं।
  • यह गुजरात से केरल तक फैले हुए हैं।
  • यहाँ प्रमुख बंदरगाह मुंबई, कांडला, कोचीन आदि स्थित हैं।

(ii) पूर्वी तटीय मैदान (Eastern Coastal Plains)

  • बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित हैं।
  • यह पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु तक फैले हुए हैं।
  • यहाँ सुंदरबन डेल्टा स्थित है, जो भारत का सबसे बड़ा डेल्टा है।

1.5 द्वीप समूह (Islands of India)

भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं:

(i) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands)

  • बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं।
  • यहाँ भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट स्थित है।
  • यहाँ सघन वर्षा वन पाए जाते हैं।

(ii) लक्षद्वीप द्वीप समूह (Lakshadweep Islands)

  • अरब सागर में स्थित प्रवाल (Coral) द्वीप समूह है।
  • यह छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है, जिनमें प्रमुख द्वीप अगाती, मिनिकॉय, कवरत्ती हैं।

2. भारत की भौतिक संरचनात्मक विशेषताएँ और उनका महत्व

भारत की भौतिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है और इसकी संरचनात्मक विशेषताएँ देश की जलवायु, कृषि, खनिज संसाधनों, परिवहन, और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं।

2.1 हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र

संरचनात्मक विशेषताएँ

  • हिमालय एक नवीन वलित पर्वत है, जो टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से बना है।
  • यह तीन श्रेणियों में विभाजित है:
    • महान हिमालय (हिमाद्रि): सबसे ऊँची पर्वतमाला, जिसमें माउंट एवरेस्ट (8848 मी.), कंचनजंगा (8586 मी.) स्थित हैं।
    • मध्य हिमालय (हिमाचल): इसमें घाटियाँ और पर्वतीय घाटियाँ पाई जाती हैं, जैसे कुल्लू, कांगड़ा
    • शिवालिक हिमालय: सबसे कम ऊँचाई वाली पर्वतमाला, जिसमें दून घाटियाँ (देहरादून, पटलीदून) स्थित हैं।

महत्व

  • जल स्रोत: हिमालयी नदियाँ (गंगा, ब्रह्मपुत्र) कृषि और जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हैं।
  • जलवायु पर प्रभाव: यह भारत को शीतल ध्रुवीय हवाओं से बचाकर मौसम नियंत्रक का कार्य करता है।
  • जैव विविधता: हिमालय विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर है।
  • पर्यटन और धार्मिक स्थल: अमरनाथ, वैष्णो देवी, बद्रीनाथ, केदारनाथ।
  • रक्षा: यह भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच एक प्राकृतिक रक्षा कवच का कार्य करता है।

2.2 उत्तरी मैदानी क्षेत्र

संरचनात्मक विशेषताएँ

  • यह क्षेत्र गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान हैं।
  • यहाँ गहरी और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
  • यह तीन उप-क्षेत्रों में विभाजित है:
    • पश्चिमी भाग (पंजाब हरियाणा का मैदान)
    • मध्य भाग (गंगा का मैदान)
    • पूर्वी भाग (ब्रह्मपुत्र का मैदान)

महत्व

  • कृषि का केंद्र: यहाँ की उपजाऊ मिट्टी भारत की खाद्य उत्पादन प्रणाली की रीढ़ है।
  • घनी जनसंख्या: यह क्षेत्र भारत की सबसे अधिक घनी आबादी वाला क्षेत्र है।
  • सिंचाई और जल संसाधन: नदियों और नहरों के कारण यह कृषि के लिए आदर्श क्षेत्र है।
  • परिवहन: मैदानी भूभाग होने के कारण रेल, सड़क, और जल परिवहन सुगम है।

2.3 प्रायद्वीपीय पठार

संरचनात्मक विशेषताएँ

  • यह भारत का सबसे पुराना भू-भाग है और गोंडवाना भूभाग का हिस्सा रहा है।
  • यह मुख्य रूप से आग्नेय और कायांतरित चट्टानों से बना हुआ है।
  • यहाँ दो प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ हैं:
    • विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला (उत्तर)
    • पश्चिमी और पूर्वी घाट (तटवर्ती)
  • यह दो भागों में विभाजित है:
    • मालवा और छोटा नागपुर का पठार (उत्तर-पश्चिमी भाग)
    • दक्कन का पठार (दक्षिणी भाग)

महत्व

  • खनिज संसाधनों का भंडार: यह क्षेत्र कोयला, लोहा, बॉक्साइट, मैंगनीज जैसे खनिजों में समृद्ध है।
  • ऊर्जा उत्पादन: यहाँ पाई जाने वाली नदियाँ (नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा) जलविद्युत उत्पादन में सहायक हैं।
  • उद्योग और व्यापार: यहाँ स्टील, कोयला, और खनिज आधारित उद्योग विकसित हुए हैं।

2.4 तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह

संरचनात्मक विशेषताएँ

  • भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर स्थित हैं।
  • पश्चिमी तट अधिक संकरा और खड़ा है, जबकि पूर्वी तट चौड़ा और समतल है।
  • दो प्रमुख द्वीप समूह:
    • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी में)
    • लक्षद्वीप द्वीप समूह (अरब सागर में)

महत्व

  • मछली पालन और व्यापार: तटीय क्षेत्र मत्स्य उद्योग का केंद्र है।
  • पर्यटन और जैव विविधता: गोवा, केरल और अंडमान-निकोबार अपने पर्यटन और प्रवाल भित्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • समुद्री परिवहन: यह क्षेत्र आंतर्राष्ट्रीय व्यापार और नौवहन का प्रमुख केंद्र है।
  • समुद्री संसाधन: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के प्रमुख भंडार पाए जाते हैं।

भारत की भौतिक संरचना विविधतापूर्ण है और इसका कृषि, जलवायु, जैव विविधता, खनिज संसाधन, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है। यह संरचना आर्थिक विकास, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को भी प्रभावित करती है।

भारत की भौतिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, जिसमें ऊँचे हिमालय, विशाल मैदान, पठार, तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह शामिल हैं। यह संरचना भारत की जलवायु, कृषि, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है।