नदियाँ और जल संसाधन (Rivers and Water Resources of India)

नदियाँ और जल संसाधन (Rivers and Water Resources of India)

भारत में नदियाँ और जल संसाधन कृषि, उद्योग, जल विद्युत उत्पादन और मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारतीय नदियों को उनके उद्गम के आधार पर हिमालयी नदियाँ और प्रायद्वीपीय नदियाँ नामक दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जाता है। इसके अलावा, भारत में जलाशय, झीलें, सिंचाई प्रणालियाँ और जल संरक्षण योजनाएँ भी जल संसाधनों के सतत उपयोग में सहायक हैं।

  • हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियाँ: गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा, कावेरी
  • नदी बेसिन और उनका प्रबंधन
  • भारत में जलाशय, झीलें और जल वितरण
  • सिंचाई प्रणाली और जल संरक्षण योजनाएँ

1. हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियाँ (Himalayan and Peninsular Rivers)

भारत की नदियाँ मुख्यतः दो समूहों में विभाजित हैं:

(i) हिमालयी नदियाँ (Himalayan Rivers)

हिमालय से निकलने वाली नदियाँ मुख्यतः बर्फ के पिघलने और वर्षा जल पर निर्भर रहती हैं, जिससे इनमें पूरे वर्ष जल प्रवाह बना रहता है। इन नदियों की घाटियाँ गहरी और व्यापक होती हैं।

मुख्य हिमालयी नदियाँ:

  1. गंगा नदी (Ganga River)

    • उद्गम: गंगोत्री हिमनद, उत्तराखंड
    • प्रमुख सहायक नदियाँ: यमुना, गोमती, घाघरा, कोसी
    • गंगा डेल्टा: सुंदरबन डेल्टा (विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा)
    • महत्व: गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जो कृषि और जल आपूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  2. यमुना नदी (Yamuna River)

    • उद्गम: यमुनोत्री हिमनद, उत्तराखंड
    • प्रमुख सहायक नदियाँ: चंबल, बेतवा, केन
    • यह गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  3. ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River)

    • उद्गम: तिब्बत में मानसरोवर झील के पास
    • यह नदी भारत के असम राज्य से होकर बहती है और गंगा में मिलती है।
    • ब्रह्मपुत्र अपने मानसूनी प्रवाह और बाढ़ के लिए प्रसिद्ध है।

(ii) प्रायद्वीपीय नदियाँ (Peninsular Rivers)

प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्यतः वर्षा जल पर निर्भर रहती हैं और अधिकतर बारहमासी नहीं होती हैं। इनकी घाटियाँ संकरी और गहरी होती हैं।

मुख्य प्रायद्वीपीय नदियाँ:

  1. गोदावरी नदी (Godavari River)

    • उद्गम: त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र
    • लंबाई: 1,465 किमी (भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी)
    • प्रमुख सहायक नदियाँ: प्राणहिता, इंद्रावती, मंजीरा
    • इसे “दक्षिण की गंगा” कहा जाता है।
  2. कृष्णा नदी (Krishna River)

    • उद्गम: महाबलेश्वर, महाराष्ट्र
    • प्रमुख सहायक नदियाँ: भीमा, तुंगभद्रा
    • कृष्णा नदी आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में महत्वपूर्ण कृषि स्रोत है।
  3. नर्मदा नदी (Narmada River)

    • उद्गम: अमरकंटक, मध्य प्रदेश
    • यह पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदी है और अरब सागर में मिलती है।
    • इस पर सरदार सरोवर बाँध बनाया गया है।
  4. कावेरी नदी (Kaveri River)

    • उद्गम: ब्रह्मगिरी पर्वत, कर्नाटक
    • यह नदी तमिलनाडु और कर्नाटक के लिए जल विवाद का कारण रही है।
    • इस पर मेट्टूर और कृष्णराज सागर बाँध स्थित हैं।

2. नदी बेसिन और उनका प्रबंधन (River Basins and Their Management)

भारत में कई नदी बेसिन हैं, जिनमें कुछ प्रमुख हैं:

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन
  • सिंधु बेसिन
  • गोदावरी-कृष्णा बेसिन
  • महानदी बेसिन

नदी प्रबंधन के उद्देश्य:

  1. बाढ़ नियंत्रण – बाँधों और जलाशयों का निर्माण।
  2. जल विद्युत उत्पादन – भाखड़ा नांगल, टिहरी बाँध जैसे जलविद्युत परियोजनाएँ।
  3. सिंचाई व्यवस्था – नहरों और जलाशयों का विस्तार।
  4. पानी की गुणवत्ता बनाए रखना – जल शुद्धिकरण संयंत्रों का निर्माण।

3. भारत में जलाशय, झीलें और जल वितरण (Reservoirs, Lakes, and Water Distribution in India)

प्रमुख जलाशय और झीलें:

  1. चिल्का झील (Chilika Lake) – ओडिशा, भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील।
  2. वुलर झील (Wular Lake) – जम्मू-कश्मीर, भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील।
  3. पुलिकट झील (Pulicat Lake) – आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थित खारे पानी की झील।
  4. लोकतक झील (Loktak Lake) – मणिपुर, प्रसिद्ध “फ्लोटिंग आइलैंड्स” के लिए जानी जाती है।

जल वितरण के मुद्दे:

  • भूजल स्तर में गिरावट
  • जल प्रदूषण
  • जल की असमान उपलब्धता

4. सिंचाई प्रणाली और जल संरक्षण योजनाएँ (Irrigation System and Water Conservation Schemes)

(i) सिंचाई प्रणाली (Irrigation System)

भारत में प्रमुख सिंचाई प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. नहर सिंचाई – उत्तर भारत में प्रचलित, जहाँ सतलुज-गंगा लिंक नहरें प्रमुख हैं।
  2. कुओं और नलकूपों से सिंचाई – राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में लोकप्रिय।
  3. टैंकों द्वारा सिंचाई – तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में प्रचलित।

(ii) जल संरक्षण योजनाएँ (Water Conservation Schemes)

  1. जल शक्ति अभियान (Jal Shakti Abhiyan) – भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए।
  2. नमामि गंगे योजना (Namami Gange Yojana) – गंगा नदी की सफाई और संरक्षण के लिए।
  3. केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना – जल संकट से निपटने के लिए प्रमुख नदी जोड़ योजना।
  4. मनरेगा के तहत जल संरक्षण कार्य – जल संचयन के लिए तालाब और जलाशयों का निर्माण।

भारत की नदियाँ और जल संसाधन कृषि, पेयजल, बिजली उत्पादन, और औद्योगिक उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों का संरक्षण आवश्यक हो गया है। जल प्रबंधन, सिंचाई योजनाओं, और जल संरक्षण उपायों को अपनाकर हम जल संकट की समस्या का समाधान कर सकते हैं।