जलवायु (Climate of India)

 जलवायु (Climate of India)

भारत की जलवायु विविधताओं से भरपूर है और यहाँ मानसूनी प्रभाव प्रमुख रूप से देखने को मिलता है। जलवायु की विशेषताओं को समझने के लिए हमें भारतीय मानसून, मौसमी परिवर्तन, जलवायु क्षेत्र, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का गहन अध्ययन करना होगा।

  • भारतीय मानसून: उत्पत्ति, प्रवाह, और प्रभाव
  • मौसमी परिवर्तन: ग्रीष्म, शीत, और वर्षा ऋतु
  • जलवायु क्षेत्र और उनका वितरण
  • जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव

1. भारतीय मानसून: उत्पत्ति, प्रवाह, और प्रभाव (Indian Monsoon: Origin, Flow, and Impact)

(i) भारतीय मानसून की उत्पत्ति (Origin of Indian Monsoon)

भारतीय मानसून मुख्यतः महाद्वीप और महासागर के तापमान में भिन्नता के कारण उत्पन्न होता है। ग्रीष्म ऋतु में भारतीय उपमहाद्वीप गर्म हो जाता है, जिससे निम्न वायुदाब क्षेत्र बनता है और दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी पवनें अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर भारत में वर्षा लाती हैं।

(ii) मानसून के प्रवाह (Flow of Monsoon)

भारतीय मानसून को दो शाखाओं में बाँटा जाता है:

  1. अरब सागर शाखा (Arabian Sea Branch) – पश्चिमी तट (केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात) और मध्य भारत में भारी वर्षा।
  2. बंगाल की खाड़ी शाखा (Bay of Bengal Branch) – पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश) में वर्षा।

शीत ऋतु में, भूमि ठंडी हो जाती है और उच्च दाब क्षेत्र विकसित होता है, जिससे उत्तर-पूर्वी मानसून (शुष्क पवन) उत्पन्न होता है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में वर्षा करता है।

(iii) भारतीय मानसून के प्रभाव (Impact of Indian Monsoon)

  1. कृषि पर प्रभाव – मानसून भारतीय कृषि की रीढ़ है क्योंकि 60% खेती मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है।
  2. नदी जल प्रवाह पर प्रभाव – मानसूनी वर्षा नदियों के जल स्तर को बनाए रखने में सहायक होती है।
  3. पर्यावरणीय प्रभाव – मानसून वनस्पति और जैव विविधता को प्रभावित करता है।
  4. आर्थिक प्रभाव – कमजोर मानसून सूखा और खाद्यान्न संकट उत्पन्न कर सकता है, जबकि अत्यधिक मानसून बाढ़ ला सकता है।

2. मौसमी परिवर्तन: ग्रीष्म, शीत, और वर्षा ऋतु (Seasonal Variations: Summer, Winter, and Rainy Season)

(i) ग्रीष्म ऋतु (Summer Season) (मार्च-जून)

  • इस अवधि में अधिकतम तापमान 40-45°C तक पहुँच सकता है।
  • पश्चिमी राजस्थान, विदर्भ, और बुंदेलखंड क्षेत्र में लू (गर्म हवाएँ) चलती हैं।
  • इस दौरान निम्न दाब प्रणाली विकसित होती है, जिससे मानसूनी पवनों का आगमन होता है।

(ii) वर्षा ऋतु (Rainy Season) (जून-सितंबर)

  • दक्षिण-पश्चिमी मानसून के कारण इस ऋतु में भारत के अधिकांश भागों में वर्षा होती है।
  • सबसे अधिक वर्षा मेघालय के मासिनराम और चेरापूंजी में होती है।
  • उत्तर पश्चिमी भारत में वर्षा की मात्रा कम होती है।

(iii) शीत ऋतु (Winter Season) (दिसंबर-फरवरी)

  • उत्तरी भारत में तापमान 5°C तक गिर सकता है और हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात होता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ के कारण पंजाब, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश में हल्की वर्षा होती है।
  • तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में उत्तर-पूर्वी मानसून वर्षा लाता है।

3. जलवायु क्षेत्र और उनका वितरण (Climatic Regions and Their Distribution)

भारत को जलवायु विशेषताओं के आधार पर विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है। कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, भारत में निम्नलिखित प्रमुख जलवायु क्षेत्र हैं:

(i) उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु (Tropical Humid Climate)

  • क्षेत्र: पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी भारत, अंडमान और निकोबार द्वीप
  • विशेषताएँ: उच्च आर्द्रता, वर्ष भर वर्षा, घने वन

(ii) शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु (Arid and Semi-Arid Climate)

  • क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के कुछ भाग
  • विशेषताएँ: कम वर्षा, अधिक तापमान अंतर, रेगिस्तानी इलाके

(iii) मानसूनी जलवायु (Monsoon Climate)

  • क्षेत्र: गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान, पश्चिमी घाट, पूर्वी भारत
  • विशेषताएँ: मानसून आधारित वर्षा, कृषि पर निर्भरता

(iv) पर्वतीय जलवायु (Mountain Climate)

  • क्षेत्र: हिमालय क्षेत्र
  • विशेषताएँ: ठंडा तापमान, अधिक ऊँचाई पर हिमपात

4. जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव (Climate Change and Its Effects)

(i) जलवायु परिवर्तन के कारण (Causes of Climate Change)

  1. ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन (CO₂, CH₄, N₂O)
  2. वनों की कटाई (Deforestation)
  3. औद्योगिक क्रांति और शहरीकरण
  4. प्राकृतिक कारण – ज्वालामुखी विस्फोट, सौर चक्र परिवर्तन

(ii) जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Effects of Climate Change)

  1. तापमान वृद्धि – भारत में औसत तापमान बढ़ रहा है।
  2. ग्लेशियरों का पिघलना – हिमालयी ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं, जिससे गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है।
  3. बढ़ती बाढ़ और सूखा – मानसूनी अनिश्चितता से बाढ़ और सूखे की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
  4. समुद्र स्तर में वृद्धि – मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे तटीय शहरों के डूबने का खतरा।
  5. जैव विविधता पर प्रभाव – तापमान परिवर्तन से कई जीव-जंतु और वनस्पतियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं।

(iii) जलवायु परिवर्तन का समाधान (Solutions to Climate Change)

  1. नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग – सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  2. वन संरक्षण और वृक्षारोपण – वन क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास।
  3. क्लाइमेट फ्रेंडली टेक्नोलॉजी – प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का विकास।
  4. राष्ट्रीय और वैश्विक प्रयास – पेरिस समझौता, UNFCCC और जलवायु नीति का पालन।

भारत की जलवायु मानसूनी प्रभाव के कारण विविधतापूर्ण है। मानसून कृषि, जल स्रोत, और जैव विविधता को प्रभावित करता है। हालाँकि, जलवायु परिवर्तन के कारण कई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, जैसे कि बाढ़, सूखा, ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र स्तर में वृद्धि। हमें सतत विकास और जलवायु संरक्षण नीतियों को अपनाकर इन समस्याओं का समाधान निकालना होगा।