भारत की जनसंख्या – Population of India

 भारत की जनसंख्या (Population of India)

भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। देश की जनसंख्या इसकी अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव डालती है। इस अध्याय में भारत की जनसंख्या के वितरण, घनत्व, वृद्धि दर, जनसांख्यिकीय विशेषताएँ, शहरीकरण, और प्रवासन के पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

  • जनसंख्या वितरण और घनत्व
  • जनसंख्या वृद्धि और उसके कारण
  • जनसांख्यिकीय विशेषताएँ: लिंग अनुपात, साक्षरता, आयु संरचना
  • शहरीकरण और प्रवासन

1. जनसंख्या वितरण और घनत्व (Population Distribution and Density in India)

(i) जनसंख्या वितरण (Population Distribution)

भारत में जनसंख्या असमान रूप से वितरित है। कुछ क्षेत्र घनी आबादी वाले हैं, जबकि कुछ स्थानों पर जनसंख्या बहुत कम है।

  • घनी आबादी वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल।
  • कम आबादी वाले राज्य: अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, नागालैंड।

भारत की जनसंख्या का वितरण विभिन्न भौगोलिक और सामाजिक कारकों पर निर्भर करता है, जैसे – जलवायु, स्थलाकृति, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, औद्योगीकरण, और रोजगार के अवसर।

(ii) जनसंख्या घनत्व (Population Density)

जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र में प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या को दर्शाता है।

जनसंख्या घनत्व=कुल जनसंख्याकुल भौगोलिक क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर में)text{जनसंख्या घनत्व} = frac{text{कुल जनसंख्या}}{text{कुल भौगोलिक क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर में)}}

  • भारत का औसत जनसंख्या घनत्व (2021 के अनुमान के अनुसार) ~420 व्यक्ति/वर्ग किमी
  • घने जनसंख्या वाले राज्य: बिहार (~1100 व्यक्ति/वर्ग किमी), पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल।
  • कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य: अरुणाचल प्रदेश (~17 व्यक्ति/वर्ग किमी), सिक्किम, नागालैंड।

2. जनसंख्या वृद्धि और उसके कारण (Population Growth and Its Causes)

(i) भारत की जनसंख्या वृद्धि दर (Population Growth Rate)

भारत में जनसंख्या वृद्धि को तीन चरणों में बाँटा जा सकता है:

  1. 1901-1921: स्थिर जनसंख्या (Stagnant Population) – उच्च मृत्यु दर और निम्न जन्म दर।
  2. 1921-1951: धीमी वृद्धि (Slow Growth) – मृत्यु दर में कमी, लेकिन जन्म दर अधिक।
  3. 1951-1981: तीव्र वृद्धि (Rapid Growth) – जन्म दर बहुत अधिक, मृत्यु दर में तेजी से गिरावट।
  4. 1981-वर्तमान: धीमी वृद्धि (Moderate Growth) – जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों और परिवार नियोजन उपायों के कारण वृद्धि दर में गिरावट।

(ii) जनसंख्या वृद्धि के कारण (Causes of Population Growth)

(a) उच्च जन्म दर (High Birth Rate)

  • कृषि प्रधान समाज, जहाँ बड़े परिवार को श्रम शक्ति माना जाता है।
  • धार्मिक और सामाजिक परंपराएँ।
  • परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक उपायों की सीमित पहुँच।

(b) मृत्यु दर में गिरावट (Decline in Death Rate)

  • चिकित्सा सुविधाओं में सुधार।
  • संक्रामक रोगों पर नियंत्रण।
  • खाद्य सुरक्षा और पोषण में वृद्धि।

(c) जीवन प्रत्याशा में वृद्धि (Increase in Life Expectancy)

  • 1951 में ~37 वर्ष से बढ़कर 2021 में ~70 वर्ष हो गई है।

(d) प्रवासन (Migration)

  • ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर लोगों का पलायन।

3. जनसांख्यिकीय विशेषताएँ (Demographic Characteristics of India)

(i) लिंग अनुपात (Sex Ratio)

लिंग अनुपात प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को दर्शाता है।

लिंग अनुपात=कुल महिलाएँकुल पुरुष×1000text{लिंग अनुपात} = frac{text{कुल महिलाएँ}}{text{कुल पुरुष}} times 1000

  • राष्ट्रीय औसत (2021 अनुमान) ~ 943 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष
  • सबसे अधिक लिंग अनुपात: केरल (~1084), पुडुचेरी।
  • सबसे कम लिंग अनुपात: हरियाणा (~877), पंजाब।

लिंग अनुपात कम होने के कारण

  • कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन।
  • लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर कम ध्यान।
  • सामाजिक और आर्थिक कारण।

(ii) साक्षरता दर (Literacy Rate)

साक्षरता दर उन व्यक्तियों का प्रतिशत है जो पढ़-लिख सकते हैं।

साक्षरता दर=साक्षर जनसंख्याकुल जनसंख्या×100text{साक्षरता दर} = frac{text{साक्षर जनसंख्या}}{text{कुल जनसंख्या}} times 100

  • भारत की औसत साक्षरता दर (2021 अनुमान): ~77%
  • पुरुष साक्षरता दर: ~84%, महिला साक्षरता दर: ~70%।
  • सर्वाधिक साक्षर राज्य: केरल (~96%)।
  • न्यूनतम साक्षर राज्य: बिहार (~63%)।

साक्षरता दर में वृद्धि के कारण

  • सर्वशिक्षा अभियान और डिजिटल शिक्षा का विस्तार।
  • सरकारी योजनाएँ (मिड-डे मील, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ)।

(iii) आयु संरचना (Age Composition)

जनसंख्या को तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है:

  1. बालक वर्ग (0-14 वर्ष) – ~27%
  2. कार्यशील वर्ग (15-59 वर्ष) – ~65%
  3. वृद्ध वर्ग (60 वर्ष से अधिक) – ~8%

कार्यशील वर्ग की अधिकता भारत को “जनसांख्यिकीय लाभांश” (Demographic Dividend) देती है, जिससे आर्थिक विकास में सहायता मिलती है।


4. शहरीकरण और प्रवासन (Urbanization and Migration in India)

(i) शहरीकरण (Urbanization in India)

शहरीकरण का अर्थ ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या के स्थानांतरण से है।

  • भारत की शहरी जनसंख्या: ~35% (2021 अनुमान)।
  • शीर्ष शहरी राज्य: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक।
  • शीर्ष महानगर: मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई।

शहरीकरण के प्रभाव

  • सकारात्मक: रोजगार के अवसर, बेहतर जीवन स्तर।
  • नकारात्मक: मलिन बस्तियों की वृद्धि, प्रदूषण, अवसंरचना पर दबाव।

(ii) प्रवासन (Migration in India)

प्रवास का अर्थ है लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।

प्रवास के प्रकार

  1. अंतर्राज्यीय प्रवास (Interstate Migration) – उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र, बिहार से दिल्ली।
  2. ग्रामीण-शहरी प्रवास (Rural to Urban Migration) – रोजगार और शिक्षा के लिए।
  3. अंतरराष्ट्रीय प्रवास (International Migration) – खाड़ी देशों, अमेरिका, यूरोप में रोजगार के लिए।

प्रवास के कारण

  • आर्थिक कारण: रोजगार और बेहतर आय।
  • सामाजिक कारण: विवाह और शिक्षा।
  • पर्यावरणीय कारण: बाढ़, सूखा, जलवायु परिवर्तन।

भारत की जनसंख्या विविधता से भरपूर है और इसकी वृद्धि दर, वितरण, और संरचना देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। जनसंख्या वृद्धि के प्रबंधन के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा में सुधार, और रोजगार के अवसरों का विस्तार आवश्यक है।