कृषि और ग्रामीण विकास – Agriculture and Rural Development of India

कृषि और ग्रामीण विकास (Agriculture and Rural Development of India)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ लगभग 58% जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि यह भारत की आर्थिक और सामाजिक संरचना का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी प्रकार, ग्रामीण विकास भारत के आर्थिक विकास में सहायक भूमिका निभाता है। इस अध्याय में कृषि उत्पादन बढ़ाने के उपाय, ग्रामीण विकास योजनाएँ और सहकारी खेती पर चर्चा की गई है।

  • कृषि उत्पादन में वृद्धि के उपाय
  • ग्रामीण विकास योजनाएँ: MGNREGA, PM-KISAN
  • सहकारी खेती और शीत भंडारण सुविधाएँ

1. कृषि उत्पादन में वृद्धि के उपाय (Measures to Increase Agricultural Production)

भारत में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों, नीतियों और संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है। मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:

(i) हरित क्रांति (Green Revolution)

  • हरित क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई, जिससे भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बना।
  • इसमें उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, उर्वरक, कीटनाशक और यंत्रीकरण का उपयोग किया गया।
  • गेहूँ और चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में।

(ii) उन्नत कृषि तकनीक (Advanced Agricultural Techniques)

  1. सिंचाई प्रणाली का विस्तार – टपक सिंचाई (Drip Irrigation), फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation)।
  2. जैविक और प्राकृतिक खेती – रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना।
  3. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना – मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए।
  4. कृषि यंत्रीकरण – ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग।

(iii) फसल विविधीकरण (Crop Diversification)

  • केवल गेहूँ और चावल की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए दलहन, तिलहन, बागवानी और औषधीय फसलों को बढ़ावा देना।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सूखा सहनशील फसलों का उत्पादन।

(iv) एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System – IFS)

  • कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और मधुमक्खी पालन को जोड़ना।
  • यह प्रणाली आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक है।

2. ग्रामीण विकास योजनाएँ (Rural Development Schemes)

ग्रामीण भारत की समृद्धि के लिए सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, आधारभूत संरचना सुधार और आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

(i) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA – 2005)

  • यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन का रोजगार गारंटी प्रदान करती है।
  • इससे ग्रामीण बेरोजगारी में कमी आई और ग्रामीण ढांचागत विकास में सहायता मिली।

(ii) प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN – 2019)

  • इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को 6,000 रुपये वार्षिक सहायता दी जाती है।
  • यह राशि तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

(iii) ग्रामीण सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – PMGSY)

  • इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ना है।
  • अच्छी सड़कों से किसानों को बाजारों तक पहुँचने में आसानी होती है।

(iv) राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM – 2016)

  • यह एक ऑनलाइन मंडी प्लेटफार्म है, जिससे किसान अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं
  • इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और सीधे बाजार तक पहुँच संभव हुई।

(v) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY – 2016)

  • किसानों को फसल हानि से बचाव और बीमा कवरेज प्रदान करना।
  • प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों से प्रभावित फसलों के नुकसान की भरपाई की जाती है।

3. सहकारी खेती और शीत भंडारण सुविधाएँ (Cooperative Farming and Cold Storage Facilities)

(i) सहकारी खेती (Cooperative Farming)

  • सहकारी खेती में कई किसान मिलकर सामूहिक रूप से कृषि गतिविधियाँ करते हैं।
  • इससे कृषि लागत कम होती है और उच्च उत्पादन प्राप्त होता है।
  • भारत में कुछ प्रमुख सहकारी संस्थाएँ –
    • अमूल (AMUL) – डेयरी क्षेत्र में सफल सहकारी मॉडल।
    • इफको (IFFCO) – उर्वरक क्षेत्र में अग्रणी सहकारी संगठन।

(ii) शीत भंडारण सुविधाएँ (Cold Storage Facilities)

  • भारत में फल, सब्जी, दुग्ध और मांस का बहुत उत्पादन होता है, लेकिन पर्याप्त भंडारण न होने के कारण काफी खाद्य सामग्री नष्ट हो जाती है
  • शीत भंडारण सुविधाओं से भंडारण क्षमता बढ़ती है, किसानों को उचित मूल्य मिलता है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है
  • सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत कोल्ड स्टोरेज को बढ़ावा दिया है।

4. कृषि और ग्रामीण विकास की चुनौतियाँ (Challenges in Agriculture and Rural Development)

(i) कृषि क्षेत्र की प्रमुख समस्याएँ

  1. जलवायु परिवर्तन – सूखा, बाढ़, चक्रवात का बढ़ता प्रभाव।
  2. छोटे और सीमांत किसानों की समस्याएँ – 85% से अधिक किसान छोटे भूखंडों पर निर्भर हैं।
  3. जल संकट – भूजल स्तर गिर रहा है और सिंचाई के लिए पानी की कमी हो रही है।
  4. बिचौलियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की समस्या
  5. खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग – मृदा उर्वरता में गिरावट।

(ii) ग्रामीण विकास की प्रमुख समस्याएँ

  1. ग्रामों में बुनियादी सुविधाओं की कमी – स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि।
  2. ग्रामीण बेरोजगारी – स्वरोजगार और कौशल विकास का अभाव।
  3. गाँवों से शहरों की ओर पलायन – युवा कृषि छोड़कर नौकरी की तलाश में जा रहे हैं।
  4. वित्तीय समावेशन की कमी – किसानों को सस्ते ब्याज पर ऋण नहीं मिल पाता।

5. कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए सुझाव (Suggestions for Enhancing Agriculture and Rural Development)

  1. सतत कृषि तकनीकों को अपनाना (जैसे – जैविक खेती, प्राकृतिक खेती)।
  2. सिंचाई प्रणालियों का आधुनिकीकरण और भूजल प्रबंधन को मजबूत करना।
  3. किसानों को तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण देना ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाएँ।
  4. गाँवों में छोटे उद्योगों और कृषि-आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देना ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें।
  5. सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, ताकि किसानों को सस्ती बिजली मिले।

भारत में कृषि और ग्रामीण विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचार, सरकारी योजनाओं, किसानों को वित्तीय सहायता और बाजार सुधारों की आवश्यकता है। साथ ही, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से समग्र ग्रामीण विकास संभव हो सकता है। यदि इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाए, तो भारत आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था बना सकता है।