संघ और उसका क्षेत्र ( Union and its Territory )

  संघ और उसका क्षेत्र – Union and its Territory (अनुच्छेद 1–4)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 से 4 तक भारत के संघीय ढांचे, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संरचना, और उनकी सीमाओं में परिवर्तन के प्रावधानों का वर्णन किया गया है। यह खंड भारत की क्षेत्रीय अखंडता, संघीय ढांचे और पुनर्गठन की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।


1. संविधान के अनुच्छेद 1: भारत का संघीय स्वरूप

  • अनुच्छेद 1 भारत को एक संघ (Union of States) घोषित करता है।
  • इसमें भारत को राज्यों और संघीय क्षेत्रों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य:
    • “भारत” का नामकरण दो रूपों में किया गया है: “इंडिया, अर्थात् भारत”।
    • भारत एक अखंड, अविभाज्य संघ है, जिसमें केंद्र सरकार को सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है।

2. राज्यों और संघीय क्षेत्रों की सूची

भारतीय संघ में तीन प्रकार के क्षेत्र शामिल हैं:

  1. राज्य (States):
    • राज्य संविधान की प्रथम अनुसूची में सूचीबद्ध हैं।
    • वर्तमान में भारत में 28 राज्य हैं।
  2. संघीय क्षेत्र (Union Territories):
    • संघीय क्षेत्र सीधे केंद्र सरकार के प्रशासन के अधीन हैं।
    • वर्तमान में 8 संघीय क्षेत्र हैं।
  3. अन्य क्षेत्र:
    • भारत के कुछ विशेष क्षेत्र (जैसे जम्मू-कश्मीर) को पहले विशेष दर्जा प्राप्त था, लेकिन अब इसे एक संघीय क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया गया है।

3. अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना

  • संसद को अधिकार है कि वह कानून द्वारा भारत के संघ में नए राज्यों को शामिल कर सकती है।
  • यह प्रावधान भारत की क्षेत्रीय सीमाओं का विस्तार करने की अनुमति देता है।
  • उदाहरण: गोवा का भारत में प्रवेश (1961)।

4. अनुच्छेद 3: राज्यों के पुनर्गठन और सीमाओं में परिवर्तन

  • संसद को यह अधिकार है कि वह भारत के भीतर किसी भी राज्य की सीमा में परिवर्तन कर सकती है या नए राज्यों का निर्माण कर सकती है।
  • संविधान में उल्लिखित प्रक्रियाएँ:
    1. राज्य की सहमति:
      • संसद को राज्य की विधान सभा से परामर्श करना अनिवार्य है, लेकिन उनकी सहमति आवश्यक नहीं है।
    2. प्रस्ताव:
      • संसद में राष्ट्रपति की सिफारिश पर विधेयक पेश किया जाता है।
    3. प्रक्रिया:
      • यदि संसद इस विधेयक को पारित करती है, तो राज्य की सीमाओं या नाम में परिवर्तन किया जा सकता है।

5. अनुच्छेद 4: पुनर्गठन के संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 4 यह सुनिश्चित करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए किसी भी संशोधन को संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा।
  • इसे साधारण कानून द्वारा लागू किया जा सकता है, विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं है।
  • इस अनुच्छेद ने भारत के राज्यों के पुनर्गठन को सरल और लचीला बना दिया है।

भारत में राज्यों के पुनर्गठन का इतिहास

1. राज्यों के पुनर्गठन की पहली घटना (1956):

  • राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया।
  • 14 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र बनाए गए।

2. अन्य प्रमुख पुनर्गठन घटनाएँ:

  • 1960: बंबई राज्य का विभाजन, गुजरात और महाराष्ट्र का निर्माण।
  • 1966: पंजाब का विभाजन, हरियाणा का निर्माण।
  • 1971-1972: मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया गया।
  • 2000: उत्तराखंड, झारखंड, और छत्तीसगढ़ का निर्माण।
  • 2014: आंध्र प्रदेश के विभाजन से तेलंगाना राज्य का निर्माण।

सीमाओं में परिवर्तन के कारण और उद्देश्य

  • भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक समानता बनाए रखना।
  • प्रशासनिक कुशलता और विकास को प्रोत्साहित करना।
  • क्षेत्रीय असंतोष और संघर्ष को कम करना।

संविधान के अनुच्छेद 1 से 4 भारत को एक संघीय, लेकिन एकात्मक झुकाव वाला राज्य बनाते हैं। राज्यों और संघीय क्षेत्रों की संरचना, सीमाओं में परिवर्तन और नए राज्यों के निर्माण की प्रक्रिया भारत को एक लचीला और प्रगतिशील राष्ट्र बनाती है। यह न केवल भारत की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि इसे बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्यों के अनुसार अनुकूलित होने का अवसर भी देती है।