संघीय प्रणाली (Federal System)

संघीय प्रणाली (Federal System)

भारतीय संविधान ने भारत को एक “संघ” घोषित किया है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। यह संघीय प्रणाली भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार डिज़ाइन की गई है, जिसमें संघीय और एकात्मक तत्वों का समावेश है।


केंद्र-राज्य संबंध (Centre-State Relations)

संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को स्पष्ट करने के लिए तीन आयाम निर्धारित किए गए हैं:

1. विधायी संबंध (Legislative Relations)

यह संबंध अनुच्छेद 245 से 255 के तहत विनियमित होता है।

(a) शक्ति-विभाजन

संविधान ने केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में किया है:

  1. संघ सूची (Union List):
    • इसमें 97 विषय (अब 100) शामिल हैं।
    • केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
    • जैसे: रक्षा, विदेशी मामले, परमाणु ऊर्जा।
  2. राज्य सूची (State List):
    • इसमें 66 विषय (अब 61) शामिल हैं।
    • राज्य सरकार कानून बना सकती है।
    • जैसे: पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि।
  3. समवर्ती सूची (Concurrent List):
    • इसमें 47 विषय (अब 52) शामिल हैं।
    • केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
    • जैसे: शिक्षा, वन, श्रम कानून।
(b) संसदीय वरीयता
  • यदि समवर्ती सूची के विषय पर केंद्र और राज्य दोनों द्वारा कानून बनाया गया है और उनमें टकराव हो, तो केंद्र का कानून प्रभावी होगा।
  • अनुच्छेद 249 के तहत, संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है यदि राज्यसभा विशेष प्रस्ताव पारित करे।
(c) अनुच्छेद 250 और 252
  • आपातकाल की स्थिति में संसद को राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार।
  • राज्यों द्वारा सहमति देने पर संसद को उनके क्षेत्र पर कानून बनाने की अनुमति।

2. कार्यकारी संबंध (Executive Relations)

  • कार्यकारी शक्तियाँ आमतौर पर उसी स्तर पर होती हैं, जहां विधायी शक्तियाँ होती हैं।
  • केंद्र सरकार राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।
  • अनुच्छेद 256 और 257 के तहत राज्यों को केंद्र के कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।
  • यदि राज्य निर्देशों का पालन नहीं करता, तो अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

3. वित्तीय संबंध (Financial Relations)

यह संबंध अनुच्छेद 268 से 293 के तहत विनियमित होता है।

(a) कराधान का विभाजन
  1. केवल केंद्र द्वारा लगाया जाने वाला कर: सीमा शुल्क, आयकर, कॉर्पोरेट कर।
  2. केवल राज्य द्वारा लगाया जाने वाला कर: संपत्ति कर, कृषि कर।
  3. केंद्र द्वारा वसूला गया और राज्यों को वितरित किया जाने वाला कर: जैसे, वस्तु एवं सेवा कर (GST)।
(b) वित्त आयोग
  • अनुच्छेद 280 के तहत, वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण के नियम तैयार करता है।
  • यह हर पाँच वर्ष में गठित किया जाता है।
(c) अनुदान और ऋण
  • केंद्र राज्यों को अनुदान और ऋण प्रदान करता है।
  • विशेष पिछड़े राज्यों को विशेष अनुदान दिया जाता है।

अंतर-राज्यीय संबंध (Inter-State Relations)

संविधान ने राज्यों के बीच विवादों के समाधान और समन्वय के लिए प्रावधान किया है।

1. अनुच्छेद 262: नदी जल विवाद

  • संसद को नदी जल विवादों के समाधान के लिए कानून बनाने का अधिकार है।
  • नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत नदी जल विवादों के लिए न्यायाधिकरण की व्यवस्था।
  • जैसे: कावेरी जल विवाद, कृष्णा नदी जल विवाद।

2. अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council)

  • अनुच्छेद 263 के तहत, राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए अंतर-राज्यीय परिषद का गठन किया गया।
  • यह केंद्र और राज्यों के बीच विचार-विमर्श और सलाह का मंच है।
  • 1990 में सरकार ने इसे सक्रिय किया।

3. अन्य प्रावधान

  • राज्यों के बीच माल और सेवाओं की मुक्त आवाजाही (अनुच्छेद 301-307)।
  • उच्चतम न्यायालय राज्यों के बीच विवादों का अंतिम निर्णयकर्ता है।

क्षेत्रीय परिषदें (Zonal Councils)

क्षेत्रीय परिषदें अंतर-राज्यीय विवादों को सुलझाने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई हैं।

  • 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत इनका गठन।
  • पाँच क्षेत्रीय परिषदें हैं:
    1. उत्तरी परिषद।
    2. दक्षिणी परिषद।
    3. पूर्वी परिषद।
    4. पश्चिमी परिषद।
    5. मध्य क्षेत्रीय परिषद।
  • गृह मंत्री इन परिषदों के अध्यक्ष होते हैं।

संघीय प्रणाली की विशेषताएँ और चुनौतियाँ

1. संघीय विशेषताएँ:

  • शक्तियों का विभाजन।
  • स्वतंत्र न्यायपालिका।
  • दोहरी सरकार की व्यवस्था।

2. चुनौतियाँ:

  • केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय असंतुलन।
  • राष्ट्रपति शासन का दुरुपयोग।
  • क्षेत्रीय दलों का बढ़ता प्रभाव।

भारतीय संघीय प्रणाली ने केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रगतिशील और लचीला ढांचा प्रदान किया है। हालाँकि, समय-समय पर विवाद और चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं, लेकिन संविधान में समाहित प्रावधान इन समस्याओं को हल करने में सक्षम हैं। भारत की संघीय प्रणाली देश की विविधता को बनाए रखते हुए एकता और अखंडता सुनिश्चित करती है।