संघीय क्षेत्र और विशेष क्षेत्र (Union Territories & Special Areas)

संघीय क्षेत्र और विशेष क्षेत्र (Union Territories & Special Areas)

भारतीय संविधान संघीय ढाँचे का पालन करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। हालाँकि, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो सीधे केंद्र सरकार के प्रशासन के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें “संघीय क्षेत्र” (Union Territories) कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, संविधान ने पाँचवीं और छठी अनुसूचियों के माध्यम से कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए हैं, जो उनकी सांस्कृतिक और भौगोलिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हैं।


1. संघीय क्षेत्रों का प्रशासन (Union Territories Administration)

(a) संघीय क्षेत्र की परिभाषा

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1(1) के तहत, भारत को “राज्यों और संघीय क्षेत्रों का संघ” कहा गया है।
  • संघीय क्षेत्र (UT) वह क्षेत्र है जो राज्यों का हिस्सा नहीं होता और सीधे केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित किया जाता है।

(b) संघीय क्षेत्रों की सूची

वर्तमान में भारत में 8 संघीय क्षेत्र हैं:

  1. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
  2. चंडीगढ़
  3. दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव
  4. लक्षद्वीप
  5. दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
  6. पुदुचेरी
  7. जम्मू और कश्मीर
  8. लद्दाख

(c) प्रशासनिक संरचना

  • प्रत्यक्ष प्रशासन:
    • संघीय क्षेत्रों का प्रशासन राष्ट्रपति के माध्यम से होता है।
    • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक या उपराज्यपाल, संघीय क्षेत्र का प्रशासनिक प्रमुख होता है।
  • विधान सभा:
    • कुछ संघीय क्षेत्रों, जैसे दिल्ली और पुदुचेरी में, अपनी विधान सभाएँ होती हैं।
    • इनके पास सीमित विधायी अधिकार होते हैं।
  • केंद्र सरकार का नियंत्रण:
    • संघीय क्षेत्रों में सभी नीतिगत निर्णय केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित होते हैं।

(d) संघीय क्षेत्र का महत्व

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सीधे नियंत्रित करना।
  • छोटे भौगोलिक और जनसंख्या वाले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रशासन।
  • विविधतापूर्ण सांस्कृतिक और भौगोलिक क्षेत्रों को केंद्र के माध्यम से सशक्त बनाना।

2. पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्र (Scheduled Areas under Fifth Schedule)

(a) परिभाषा

  • संविधान के भाग X में अनुच्छेद 244(1) के तहत पाँचवीं अनुसूची में अनुसूचित क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।
  • यह प्रावधान आदिवासी बहुल क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।

(b) विशेषताएँ

  1. प्रशासन:
    • इन क्षेत्रों का प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से किया जाता है।
    • राज्यपाल इन क्षेत्रों के लिए विशेष नियम बना सकते हैं।
  2. आदिवासियों की सुरक्षा:
    • भूमि और संसाधनों का संरक्षण।
    • बाहरी व्यक्तियों द्वारा भूमि के अधिग्रहण पर रोक।
  3. पंचायती व्यवस्था का विशेष प्रावधान:
    • पेसा अधिनियम, 1996 (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act) के माध्यम से पंचायतों को विशेष अधिकार दिए गए।

(c) अनुसूचित क्षेत्रों की सूची

  • पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्र मुख्यतः छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, गुजरात, और महाराष्ट्र में स्थित हैं।

(d) चुनौतियाँ और महत्व

  • इन क्षेत्रों में विकास कार्य धीमा है।
  • आदिवासियों के अधिकारों और संस्कृति का संरक्षण करना आवश्यक है।
  • विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

3. छठी अनुसूची के क्षेत्र (Autonomous Districts under Sixth Schedule)

(a) परिभाषा

  • छठी अनुसूची के तहत, संविधान के अनुच्छेद 244(2) और 275 में उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों को विशेष प्रावधान दिए गए हैं।
  • इन क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों का गठन किया गया है।

(b) विशेषताएँ

  1. स्वायत्तता:
    • इन क्षेत्रों को स्वशासन का अधिकार प्राप्त है।
    • जिला और क्षेत्रीय परिषदें स्थानीय कानून, भूमि का प्रबंधन, और आदिवासी संस्कृति का संरक्षण करती हैं।
  2. कानून बनाने का अधिकार:
    • इन परिषदों को भूमि, जल, और वन संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है।
    • परिषदें अपने क्षेत्र में कर लगा सकती हैं।
  3. संरचना:
    • प्रत्येक जिला परिषद में 30 सदस्य होते हैं, जिनमें से 26 का चुनाव जनता द्वारा होता है और 4 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

(c) क्षेत्र

  • छठी अनुसूची के तहत चार राज्यों को शामिल किया गया है:
    1. असम
    2. मेघालय
    3. त्रिपुरा
    4. मिज़ोरम

(d) चुनौतियाँ और महत्व

  • क्षेत्रीय परिषदों की स्वायत्तता में कई बार राज्य सरकारें हस्तक्षेप करती हैं।
  • आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।

संघीय और विशेष क्षेत्रों का महत्व

  1. राष्ट्रीय एकता:
    • संघीय क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों का प्रशासन केंद्र के अधीन होने से राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है।
  2. आदिवासियों का संरक्षण:
    • आदिवासी क्षेत्रों में विशेष प्रावधान उनके अधिकारों और संस्कृति को संरक्षित करते हैं।
  3. क्षेत्रीय विकास:
    • विशेष क्षेत्रों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक प्रावधानों से उनका समुचित विकास सुनिश्चित होता है।

संघीय क्षेत्र और विशेष क्षेत्र भारत की संघीय संरचना को अद्वितीय बनाते हैं। ये प्रावधान न केवल प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि आदिवासी और सांस्कृतिक समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं का भी ध्यान रखते हैं। हालाँकि, इन क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।