संघीय प्रणाली (Federal System)

संघीय प्रणाली (Federal System) भारतीय संविधान ने भारत को एक “संघ” घोषित किया है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। यह संघीय प्रणाली भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार डिज़ाइन की गई है, जिसमें संघीय और एकात्मक तत्वों का समावेश है। केंद्र-राज्य संबंध (Centre-State Relations) संविधान में केंद्र और … Read more

न्यायपालिका (Judiciary)

न्यायपालिका (Judiciary) भारतीय संविधान में न्यायपालिका को कानून की रक्षा करने और नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंग के रूप में स्थापित किया गया है। यह तीन स्तरों पर कार्य करती है: उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, और अधीनस्थ न्यायालय। क. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च … Read more

राज्य सरकार (State Government)

 राज्य सरकार (State Government) भारतीय संविधान संघीय ढांचे पर आधारित है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें अपनी-अपनी भूमिकाओं और अधिकार क्षेत्रों में कार्य करती हैं। राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 152 से 237 के अंतर्गत स्थापित की गई है। राज्य सरकार के मुख्य अंग हैं: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिपरिषद, और राज्य विधानमंडल। क. राज्यपाल (Governor) … Read more

संघ सरकार (Union Government)

संघ सरकार (Union Government) भारतीय संविधान के अनुसार, भारत एक संसदीय प्रणाली को अपनाता है, जहाँ कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। संघ सरकार के विभिन्न अंग और उनकी संरचना, शक्तियाँ, तथा कार्य संविधान के अनुच्छेदों में वर्णित हैं। क. राष्ट्रपति (अनुच्छेद 52–62) 1. राष्ट्रपति का परिचय भारतीय संघ का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक … Read more

मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine)

मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) भारतीय संविधान की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने “मूल संरचना सिद्धांत” (Basic Structure Doctrine) का प्रतिपादन किया। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि संविधान संशोधन की प्रक्रिया के दौरान उसकी मूल आत्मा और मूलभूत विशेषताएँ अक्षुण्ण रहें। 1. मूल संरचना सिद्धांत की अवधारणा (a) परिभाषा … Read more

संविधान का संशोधन ( Amendment of the Indian Constitution )

 संविधान का संशोधन – Amendment of the Indian Constitution (अनुच्छेद 368) भारतीय संविधान को लचीला और स्थिर बनाने के लिए इसमें संशोधन की प्रक्रिया शामिल की गई है। संविधान के अनुच्छेद 368 में संशोधन की विस्तृत प्रक्रिया दी गई है। संशोधन के माध्यम से संविधान को बदलती परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की क्षमता प्रदान की … Read more

मूल कर्तव्य (Fundamental Duties)

 मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) (अनुच्छेद 51A) भारतीय संविधान के भाग IV-A में मूल कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है। ये कर्तव्य नागरिकों के लिए नैतिक और सामाजिक दायित्व निर्धारित करते हैं, ताकि वे संविधान की भावना का पालन करें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। 1. मूल कर्तव्यों का परिचय मूल कर्तव्यों को 42वें संविधान … Read more

राज्य के नीति-निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy, DPSP)

 राज्य के नीति-निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy, DPSP) (अनुच्छेद 36–51) भारतीय संविधान के भाग IV में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है। ये तत्व सरकार को नीति-निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। राज्य के नीति-निदेशक तत्व … Read more

मूल अधिकार ( Fundamental Rights in Indian Polity )

 मूल अधिकार – Fundamental Rights in Indian Polity (अनुच्छेद 12–35) भारतीय संविधान के भाग III में मूल अधिकारों का प्रावधान है। ये अधिकार नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का अनुभव कराने के लिए दिए गए हैं। मूल अधिकार लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं और नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करते … Read more

नागरिकता ( Indian Citizenship )

 नागरिकता – Indian Citizenship (अनुच्छेद 5–11) भारतीय संविधान में नागरिकता से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 5 से 11 तक दिए गए हैं। नागरिकता किसी व्यक्ति और देश के बीच एक कानूनी संबंध स्थापित करती है, जो नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करती है। संविधान में नागरिकता के नियमों के साथ-साथ नागरिकता अधिग्रहण और समाप्ति … Read more