जलवायु परिवर्तन (Climate Change)

 जलवायु परिवर्तन (Climate Change)

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का अर्थ दीर्घकालिक अवधि में पृथ्वी के जलवायु स्वरूपों में परिवर्तन से है। यह प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप भी हो सकता है। औद्योगिक क्रांति के बाद ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) का उत्सर्जन बढ़ने से जलवायु परिवर्तन की गति तेज हो गई है।

  • जलवायु परिवर्तन की परिभाषा और कारण
  • ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्रीनहाउस गैसें
  • ग्लोबल वार्मिंग और इसके प्रभाव: समुद्र स्तर में वृद्धि, मौसम में बदलाव
  • जलवायु परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक परिणाम
  • जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण के उपाय: अंतर्राष्ट्रीय प्रयास, भारत की नीति

1. जलवायु परिवर्तन की परिभाषा और कारण (Definition and Causes of Climate Change)

(i) परिभाषा (Definition)

जलवायु परिवर्तन से तात्पर्य पृथ्वी की औसत जलवायु परिस्थितियों में होने वाले दीर्घकालिक परिवर्तन से है। यह मुख्य रूप से तापमान में वृद्धि, वर्षा के स्वरूपों में बदलाव, चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ने और समुद्र स्तर में वृद्धि के रूप में प्रकट होता है।

(ii) जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण (Major Causes of Climate Change)

(a) प्राकृतिक कारण (Natural Causes)

  1. सौर विकिरण (Solar Radiation) – सूर्य की गतिविधियों में परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान प्रभावित हो सकता है।
  2. ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruptions) – ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली गैसें और राख वातावरण में ग्रीनहाउस प्रभाव को बढ़ा सकती हैं।
  3. समुद्री धाराएँ (Ocean Currents) – महासागरीय धाराओं में परिवर्तन से जलवायु प्रणाली प्रभावित होती है, जैसे एल नीनो और ला नीना घटनाएँ।

(b) मानव जनित कारण (Anthropogenic Causes)

  1. ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन (GHG Emissions) – जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) के जलने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) जैसी गैसों की मात्रा बढ़ती है।
  2. वनों की कटाई (Deforestation) – पेड़ CO₂ अवशोषित करते हैं, लेकिन उनकी अत्यधिक कटाई के कारण वातावरण में CO₂ की मात्रा बढ़ जाती है।
  3. औद्योगीकरण और शहरीकरण (Industrialization and Urbanization) – उद्योगों और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों के कारण तापमान में वृद्धि होती है।
  4. कृषि और पशुपालन (Agriculture and Livestock Farming) – कृषि गतिविधियों, विशेष रूप से धान की खेती और पशुपालन से बड़ी मात्रा में मीथेन उत्सर्जित होती है।

2. ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Effect and Greenhouse Gases)

(i) ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect)

  • ग्रीनहाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल की कुछ गैसें सूर्य की किरणों को अवशोषित कर धरती के तापमान को बनाए रखती हैं।
  • यह प्रभाव प्राकृतिक रूप से आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना पृथ्वी अत्यधिक ठंडी हो जाएगी, लेकिन मानव गतिविधियों के कारण यह प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग हो रही है।

(ii) ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases – GHGs)

मुख्य ग्रीनहाउस गैसें निम्नलिखित हैं:

गैस स्रोत वायुमंडल में योगदान (%)
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) जीवाश्म ईंधन जलाना, वनों की कटाई 76%
मीथेन (CH₄) पशुपालन, धान की खेती, कूड़ा-करकट 16%
नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) रासायनिक उर्वरक, जैविक अपशिष्ट 6%
हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs), क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) रेफ्रिजरेंट, एरोसोल 2%

3. ग्लोबल वार्मिंग और इसके प्रभाव (Global Warming and Its Impacts)

(i) समुद्र स्तर में वृद्धि (Rising Sea Levels)

  • ग्लेशियरों और ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से समुद्र स्तर बढ़ रहा है, जिससे द्वीपीय देशों और तटीय शहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
  • भारत में सुंदरबन, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे तटीय शहरों पर इसका प्रभाव हो सकता है।

(ii) मौसम में बदलाव (Changes in Weather Patterns)

  • मानसून में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे सूखा और बाढ़ की घटनाएँ अधिक हो रही हैं।
  • अत्यधिक गर्मी और ठंड की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

(iii) जैव विविधता पर प्रभाव (Impact on Biodiversity)

  • जलवायु परिवर्तन के कारण अनेक जीवों और पौधों की प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं।
  • प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) का सफेद पड़ना (Coral Bleaching) हो रहा है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।

(iv) कृषि और खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव (Impact on Agriculture and Food Security)

  • तापमान बढ़ने और वर्षा में अनिश्चितता के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
  • मिट्टी की उर्वरता घट रही है और फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है।

(v) स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Impacts)

  • अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियाँ फैलने का जोखिम बढ़ गया है।

4. जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण के उपाय (Measures to Control Climate Change)

(i) अंतर्राष्ट्रीय प्रयास (International Efforts)

  • पेरिस समझौता (Paris Agreement, 2015) – वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से नीचे रखने का लक्ष्य।
  • क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol, 1997) – विकसित देशों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने का समझौता।
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP – Conference of Parties) – वार्षिक बैठक जहां जलवायु परिवर्तन नीतियों पर चर्चा होती है।

(ii) भारत की जलवायु नीति (India’s Climate Policy)

  1. राष्ट्रीय कार्य योजना जलवायु परिवर्तन (NAPCC) – जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा 8 मिशन चलाए जा रहे हैं, जैसे सौर मिशन, जल मिशन, ग्रीन इंडिया मिशन
  2. अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा – भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा का 50% नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न करने का लक्ष्य रखता है।
  3. स्मार्ट सिटी मिशन – पर्यावरण अनुकूल शहरों के विकास की योजना।

जलवायु परिवर्तन आज की सबसे गंभीर वैश्विक चुनौती बन गया है। इसके प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना, अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना, वनों की रक्षा करना, और वैश्विक सहयोग आवश्यक है। यदि हम अभी से सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में कार्य करें, तो जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता है।