भारत में जलवायु क्षेत्र और प्राकृतिक प्रदेश (Climatic Regions and Natural Regions of India)

 भारत में जलवायु क्षेत्र और प्राकृतिक प्रदेश (Climatic Regions and Natural Regions of India)

भारत एक विविध जलवायु और भौगोलिक विशेषताओं वाला देश है। यहाँ विभिन्न प्रकार की जलवायु स्थितियाँ पाई जाती हैं, जो भौगोलिक स्थिति, समुद्र से दूरी, ऊँचाई और पवन प्रणालियों पर निर्भर करती हैं। इस आधार पर, भारत को विभिन्न जलवायु क्षेत्रों और प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है।

  • जलवायु आधारित क्षेत्र: उष्णकटिबंधीय, शीतोष्ण, शुष्क
  • प्राकृतिक प्रदेश: तराई, मरुस्थल, पहाड़ी क्षेत्र

1. भारत के जलवायु आधारित क्षेत्र (Climatic Regions of India)

जलवायु के आधार पर भारत को प्रोफेसर ट्रीवार्था और कोपेन द्वारा विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, भारत में निम्नलिखित जलवायु क्षेत्र पाए जाते हैं:

(i) उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate)

  • भारत की मुख्य जलवायु प्रणाली इसी श्रेणी में आती है।
  • यहाँ गर्मी में उच्च तापमान और वर्षा होती है।
  • मानसून के कारण वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है।
  • क्षेत्र: गंगा का मैदान, पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी तट, दक्कन का पठार।

(ii) उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु (Tropical Dry Climate)

  • इस जलवायु में वर्षा बहुत कम होती है और गर्मी अधिक होती है।
  • दिन और रात के तापमान में बहुत अंतर होता है।
  • क्षेत्र: राजस्थान का थार मरुस्थल, गुजरात का कच्छ, पश्चिमी मध्य प्रदेश।

(iii) शीतोष्ण पर्वतीय जलवायु (Temperate Mountain Climate)

  • यह जलवायु मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • यहाँ ठंडी सर्दियाँ और कम वर्षा होती है।
  • ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट आती है।
  • क्षेत्र: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश।

(iv) समुद्री जलवायु (Maritime Climate)

  • इस जलवायु में तापमान अधिक नमी के कारण संतुलित रहता है
  • वर्षा अच्छी मात्रा में होती है।
  • क्षेत्र: मुंबई, गोवा, कोलकाता, पुडुचेरी, केरल के तटीय क्षेत्र।

(v) शीत जलवायु (Cold Climate)

  • यह भारत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • यहाँ वर्षभर बर्फबारी और अत्यधिक ठंड रहती है।
  • क्षेत्र: लद्दाख, सियाचिन, काराकोरम पर्वतीय क्षेत्र।

2. भारत के प्राकृतिक प्रदेश (Natural Regions of India)

भारत की प्राकृतिक विशेषताएँ विभिन्न प्रकार की पारिस्थितिक स्थितियों को जन्म देती हैं। इन परिस्थितियों के आधार पर भारत को विभिन्न प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है:

(i) तराई क्षेत्र (Terai Region)

  • यह क्षेत्र हिमालय की तलहटी में स्थित है और अत्यधिक उपजाऊ है।
  • यहाँ की जलवायु नम और वनस्पति घनी होती है।
  • महत्वपूर्ण क्षेत्र: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम।

(ii) गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदानी क्षेत्र (Ganga-Brahmaputra Plains)

  • यह क्षेत्र गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा बना है
  • यह अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है और यहाँ धान, गेहूँ और गन्ना की खेती प्रमुख रूप से की जाती है।
  • क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब।

(iii) मरुस्थलीय क्षेत्र (Desert Region)

  • यह क्षेत्र अत्यंत शुष्क है और यहाँ वर्षा बहुत कम (100-150 मिमी) होती है।
  • यहाँ की प्रमुख वनस्पति काँटेदार झाड़ियाँ होती हैं।
  • क्षेत्र: राजस्थान का थार मरुस्थल, गुजरात का कच्छ।

(iv) दक्कन का पठारी क्षेत्र (Deccan Plateau Region)

  • यह क्षेत्र भारत का सबसे पुराना भूभाग है और इसमें लावा से बनी काली मिट्टी पाई जाती है।
  • यहाँ कपास, गन्ना और तिलहन की खेती होती है।
  • क्षेत्र: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु।

(v) पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट क्षेत्र (Western and Eastern Ghats Region)

  • पश्चिमी घाट क्षेत्र में अधिक वर्षा (3000-4000 मिमी) होती है और यह घना जंगल है।
  • पूर्वी घाट अपेक्षाकृत कम वर्षा वाला क्षेत्र है।
  • यहाँ चाय, कॉफी, मसाले और धान की खेती होती है।
  • क्षेत्र: केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा।

(vi) तटीय क्षेत्र (Coastal Region)

  • इस क्षेत्र में समुद्री जलवायु पाई जाती है और यहाँ मछली पकड़ना एक प्रमुख व्यवसाय है।
  • यहाँ नारियल, सुपारी, धान और मसालों की खेती होती है।
  • क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल।

(vii) हिमालयी क्षेत्र (Himalayan Region)

  • यह क्षेत्र बहुत ऊँचाई पर स्थित है और यहाँ घने जंगल, बर्फीले पहाड़ और ग्लेशियर पाए जाते हैं।
  • यहाँ के निवासी भेड़पालन, सेब उत्पादन और पर्यटन पर निर्भर करते हैं।
  • क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश।

3. जलवायु और प्राकृतिक प्रदेशों का प्रभाव

(i) कृषि पर प्रभाव

  • मानसूनी जलवायु वाले क्षेत्रों में धान की खेती अधिक होती है।
  • शुष्क क्षेत्रों में बाजरा, ज्वार, चना और तिलहन उगाए जाते हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में सेब, चाय, कॉफी और मसाले उगाए जाते हैं।

(ii) जनसंख्या और जीवनशैली पर प्रभाव

  • मैदानी और तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है, क्योंकि यहाँ कृषि और व्यापार के अच्छे अवसर होते हैं।
  • मरुस्थलीय और पर्वतीय क्षेत्रों में जनसंख्या कम होती है, क्योंकि वहाँ जलवायु कठोर होती है

(iii) आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव

  • मैदानी क्षेत्रों में कृषि, व्यापार और उद्योग फलते-फूलते हैं।
  • तटीय क्षेत्रों में मत्स्य उद्योग और समुद्री व्यापार प्रमुख हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, सेब उत्पादन और पशुपालन मुख्य व्यवसाय हैं।

भारत की विविध जलवायु और प्राकृतिक प्रदेश इसे एक बहुआयामी भौगोलिक देश बनाते हैं। यहाँ विभिन्न जलवायु परिस्थितियाँ कृषि, वनस्पति, मानव जीवन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। यदि हम प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग और संरक्षण करें, तो हम भारत के जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों का सतत विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।