समसामयिक राजव्यवस्था (Contemporary Political System)

समसामयिक राजव्यवस्था (Contemporary Political System)

भारत की समसामयिक राजव्यवस्था समय-समय पर संवैधानिक संशोधनों, न्यायिक निर्णयों, और राष्ट्रीय-क्षेत्रीय नीतियों के प्रभाव से विकसित होती रही है। यह न केवल भारतीय लोकतंत्र की जटिलताओं को समझने का अवसर प्रदान करती है, बल्कि बदलती वैश्विक और राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार नीतियों के अनुकूलन की कहानी भी कहती है।


1. हाल के संशोधन और निर्णय

(a) हाल के संवैधानिक संशोधन

भारत के संविधान को लचीला और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं। कुछ महत्वपूर्ण हालिया संशोधन निम्नलिखित हैं:

  1. 103वां संशोधन (2019): आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण

    • शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10% आरक्षण प्रदान किया गया।
    • यह सामाजिक और आर्थिक न्याय के उद्देश्य को मजबूत करता है।
  2. 102वां संशोधन (2018): पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा

    • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
    • यह सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है।
  3. 101वां संशोधन (2017): वस्तु और सेवा कर (GST)

    • भारत में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल और केंद्रीकृत करते हुए GST लागू किया गया।
    • केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों को नई दिशा मिली।
  4. 104वां संशोधन (2020): एंग्लो-इंडियन नामांकन समाप्ति

    • लोकसभा और विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामांकित सदस्यों का प्रावधान समाप्त कर दिया गया।

(b) महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

  1. साबरमती एक्सप्रेस मामला (2019): राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद

    • सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल को राम मंदिर निर्माण के लिए दिया और मस्जिद के लिए अलग भूमि का प्रावधान किया।
    • यह भारत के सबसे पुराने और विवादित मामलों में से एक का समाधान था।
  2. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017): निजता का अधिकार

    • सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मूल अधिकार घोषित किया।
    • यह अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत आता है।
  3. सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े निर्णय

    • मराठा आरक्षण मामला (2021): सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया।
    • मंडल कमीशन की समीक्षा: सामाजिक न्याय से संबंधित पुराने निर्णयों की पुनर्व्याख्या।
  4. दल-बदल कानून (केशवानंद भारती केस 1973 का प्रभाव)

    • हाल के वर्षों में दल-बदल विरोधी प्रावधानों की समीक्षा और लागू करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।

2. राष्ट्रीय नीतियाँ

(a) आर्थिक नीतियाँ

  1. आत्मनिर्भर भारत अभियान (2020):
    • आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से लेकर आयात प्रतिस्थापन तक के उपाय।
  2. डिजिटल इंडिया:
    • डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन में पारदर्शिता और दक्षता।
  3. पीएम-किसान सम्मान निधि योजना:
    • छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।

(b) शिक्षा और स्वास्थ्य नीतियाँ

  1. नई शिक्षा नीति (2020):
    • 10+2 प्रणाली के स्थान पर 5+3+3+4 संरचना लागू की गई।
    • मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर।
  2. आयुष्मान भारत:
    • स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच को बढ़ाना।

(c) सामाजिक और पर्यावरणीय नीतियाँ

  1. जल जीवन मिशन:
    • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हर घर को नल से जल उपलब्ध कराना।
  2. स्वच्छ भारत अभियान:
    • खुले में शौच मुक्त (ODF) भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना।
  3. राष्ट्रीय हरित योजना:
    • पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा।

3. क्षेत्रीय नीतियाँ और उनका महत्व

(a) क्षेत्रीय असमानता का समाधान

  1. पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज:
    • बुनियादी ढांचे के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए योजनाएँ।
  2. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (2019):
    • अनुच्छेद 370 हटाकर क्षेत्रीय समानता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास।

(b) राज्यों में नीति प्रयोग

  1. दिल्ली का मॉडल शिक्षा सुधार:
    • सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार।
  2. केरल का स्वास्थ्य मॉडल:
    • सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और दक्षता।

(c) राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय

  • क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका:
    • केंद्र और राज्यों के बीच आपसी सहयोग और विकास पर चर्चा।
  • नदी जल विवाद:
    • कावेरी, कृष्णा, और अन्य नदियों पर विवादों का समाधान।

समसामयिक राजव्यवस्था भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश को आकार देती है। संशोधनों और नीतियों के माध्यम से सरकार देश की जरूरतों और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करती है। हालांकि, न्यायिक फैसले और राष्ट्रीय-क्षेत्रीय नीतियों का प्रभावशील कार्यान्वयन सुनिश्चित करना जरूरी है। पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सशक्त सिविल सोसायटी के माध्यम से भारत अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली को और सुदृढ़ बना सकता है।