पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)
- पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा और संरचना
- जैविक और अजैविक घटक
- पारिस्थितिकी तंत्र की ऊर्जा का प्रवाह
- चक्र: जल, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन चक्र
- पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता और उसका संरक्षण
- पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार: जल, स्थलीय, आर्द्रभूमि तंत्र
1. पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा और संरचना (Definition and Structure of Ecosystem)
(i) पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा (Definition of Ecosystem)
पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) एक जैविक प्रणाली है, जिसमें जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच परस्पर क्रियाएँ होती हैं। यह एक संतुलित इकाई होती है, जिसमें ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्त्वों का चक्र चलता रहता है।
ई.पी. ओडम (E.P. Odum) के अनुसार:
“एक पारिस्थितिकी तंत्र एक प्राकृतिक इकाई है, जिसमें जैविक समुदाय और अजैविक पर्यावरण परस्पर क्रियाएँ करते हैं और ऊर्जा तथा पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है।”
(ii) पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना (Structure of Ecosystem)
पारिस्थितिकी तंत्र दो प्रमुख घटकों से मिलकर बनता है:
- जैविक घटक (Biotic Components)
- अजैविक घटक (Abiotic Components)
2. जैविक और अजैविक घटक (Biotic and Abiotic Components)
(i) जैविक घटक (Biotic Components)
यह वे घटक होते हैं, जो जीवित होते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में भोजन व ऊर्जा प्रवाह में योगदान करते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं:
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उत्पादक (Producers)
- ये वे जीव होते हैं, जो सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं।
- उदाहरण: हरे पौधे, शैवाल (Algae), फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton)।
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उपभोक्ता (Consumers)
- ये जीव सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर होते हैं।
- उपभोक्ताओं को तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
- शाकाहारी (Herbivores): जैसे हिरण, गाय, खरगोश।
- मांसाहारी (Carnivores): जैसे बाघ, शेर, बाज।
- सर्वाहारी (Omnivores): जैसे भालू, मानव।
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अपघटक (Decomposers)
- ये जीव मृत जीवों के अवशेषों को अपघटित कर पोषक तत्त्वों को मिट्टी में पुनः छोड़ते हैं।
- उदाहरण: बैक्टीरिया (Bacteria), कवक (Fungi)।
(ii) अजैविक घटक (Abiotic Components)
ये वे घटक होते हैं, जो निर्जीव होते हैं और जीवों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
- भौतिक घटक (Physical Factors): तापमान, आर्द्रता, वायु, प्रकाश।
- रासायनिक घटक (Chemical Factors): जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन।
- भौगोलिक घटक (Geographical Factors): मिट्टी, स्थलरूप, जल निकाय।
3. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow in Ecosystem)
(i) ऊर्जा प्रवाह की दिशा (Direction of Energy Flow)
पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है:
सूर्य → उत्पादक → उपभोक्ता → अपघटक → पर्यावरण में वापस
(ii) खाद्य जाल (Food Web) और खाद्य श्रृंखला (Food Chain)
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खाद्य श्रृंखला (Food Chain): इसमें ऊर्जा का प्रवाह एक सरल श्रृंखला के रूप में होता है।
- उदाहरण:
घास → हिरण → बाघ
- उदाहरण:
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खाद्य जाल (Food Web): यह कई खाद्य श्रृंखलाओं का जटिल नेटवर्क होता है, जिसमें जीव एक से अधिक स्तरों पर भोजन कर सकते हैं।
4. पोषक चक्र (Nutrient Cycles)
पारिस्थितिकी तंत्र में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण चार प्रमुख चक्रों के माध्यम से होता है:
(i) जल चक्र (Water Cycle)
- सूर्य की ऊर्जा से जल का वाष्पीकरण होता है।
- वाष्प संघनित होकर बादल बनाता है और वर्षा के रूप में पुनः भूमि पर गिरता है।
(ii) कार्बन चक्र (Carbon Cycle)
- पौधे कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- जीव इसे ग्रहण करते हैं और श्वसन से CO₂ वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं।
(iii) नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
- वायुमंडलीय नाइट्रोजन को जीवाणु नाइट्रेट में बदलते हैं, जिसे पौधे ग्रहण करते हैं।
- मृत जीवों के अपघटन से नाइट्रोजन वापस वायुमंडल में जाती है।
(iv) ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle)
- पौधे प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं।
- जीव श्वसन के दौरान इसे ग्रहण कर CO₂ छोड़ते हैं।
5. पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता और उसका संरक्षण (Ecosystem Productivity and Conservation)
(i) पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता (Productivity of Ecosystem)
- प्राथमिक उत्पादकता (Primary Productivity): पौधों द्वारा उत्पादित कुल जैव द्रव्यमान।
- द्वितीयक उत्पादकता (Secondary Productivity): उपभोक्ताओं द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा।
(ii) पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण (Ecosystem Conservation)
- वनों की रक्षा और पुनः वनीकरण।
- जैव विविधता का संरक्षण।
- जल संसाधनों और मृदा संरक्षण के उपाय।
6. पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार (Types of Ecosystem)
(i) जल पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem)
- मीठे जल का तंत्र (Freshwater Ecosystem): झीलें, नदियाँ, तालाब।
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem): महासागर, प्रवाल भित्तियाँ।
(ii) स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystem)
- वन पारिस्थितिकी तंत्र (Forest Ecosystem): उष्णकटिबंधीय वर्षावन, शंकुधारी वन।
- घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र (Grassland Ecosystem): सवाना, टुंड्रा।
- मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Desert Ecosystem): थार मरुस्थल, सहारा।
(iii) आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र (Wetland Ecosystem)
- दलदल, कच्छ का रण, सुंदरबन।
पारिस्थितिकी तंत्र प्रकृति की एक संतुलित इकाई है, जिसमें जैविक और अजैविक घटकों का जटिल अंतःसंबंध होता है। ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्रों के माध्यम से यह संतुलन बना रहता है। पारिस्थितिकी तंत्र का सतत उपयोग और संरक्षण आवश्यक है, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे और पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रह सके।