पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology of India)
पर्यावरण और पारिस्थितिकी पृथ्वी पर जीवन को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत अपनी भौगोलिक विविधता और जलवायु के कारण समृद्ध जैव विविधता वाला देश है, लेकिन तेजी से होते औद्योगीकरण, शहरीकरण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण पर्यावरणीय समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। इस अध्याय में जैव विविधता, राष्ट्रीय उद्यान, पर्यावरणीय समस्याएँ, और भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाई गई नीतियों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
- जैव विविधता और उसके संरक्षण के प्रयास
- राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य
- पर्यावरणीय समस्याएँ: प्रदूषण, भूमि क्षरण
- भारत में पर्यावरणीय नीति और कानून
1. जैव विविधता और उसके संरक्षण के प्रयास (Biodiversity and Conservation Efforts)
(i) जैव विविधता क्या है?
जैव विविधता (Biodiversity) का तात्पर्य पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों – पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, सूक्ष्मजीवों आदि – की विविधता से है।
(ii) भारत में जैव विविधता का महत्व
- भारत विश्व का 8वां सबसे अधिक जैव विविधता वाला देश है।
- भारत में हॉटस्पॉट क्षेत्र – हिमालय, पश्चिमी घाट, सुंदरबन, और पूर्वोत्तर राज्य।
- वनों और जीवों की विविधता का महत्व: पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना, औषधीय पौधों का संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ।
(iii) जैव विविधता पर खतरे
- वनों की कटाई।
- जलवायु परिवर्तन।
- शिकार और अवैध तस्करी।
- औद्योगीकरण और शहरीकरण।
(iv) जैव विविधता संरक्षण के प्रयास
- राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम, 2002।
- बायोस्फीयर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना।
- प्रोजेक्ट टाइगर और अन्य संरक्षण योजनाएँ।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972।
2. राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य (National Parks and Wildlife Sanctuaries)
(i) राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
राष्ट्रीय उद्यान वे संरक्षित क्षेत्र हैं, जहां वन्यजीव और पारिस्थितिकी को बचाने के लिए किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधियाँ निषिद्ध होती हैं।
| राष्ट्रीय उद्यान | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|
| जिम कॉर्बेट | उत्तराखंड | भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान (1936)। |
| काजीरंगा | असम | एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध। |
| रणथंभौर | राजस्थान | बाघों के लिए प्रसिद्ध। |
| गिर राष्ट्रीय उद्यान | गुजरात | एशियाई शेरों का एकमात्र निवास स्थान। |
| सुंदरबन | पश्चिम बंगाल | रॉयल बंगाल टाइगर और मैंग्रोव वनस्पति। |
(ii) वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries)
वन्यजीव अभ्यारण्य वे क्षेत्र हैं, जहां जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन कुछ नियंत्रित मानवीय गतिविधियाँ अनुमत होती हैं।
| वन्यजीव अभ्यारण्य | राज्य | प्रमुख प्राणी |
|---|---|---|
| केवलादेव | राजस्थान | पक्षियों के लिए प्रसिद्ध। |
| पेरियार | केरल | हाथी और बाघों के लिए प्रसिद्ध। |
| भितरकनिका | ओडिशा | मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध। |
(iii) बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves)
भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- नंदा देवी (उत्तराखंड)
- सिंहभूम (झारखंड)
- अगस्थ्यमलई (केरल, तमिलनाडु)
3. पर्यावरणीय समस्याएँ (Environmental Problems)
(i) प्रदूषण (Pollution)
पर्यावरणीय प्रदूषण प्राकृतिक और मानवजनित कारणों से उत्पन्न होता है और यह पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है।
- वायु प्रदूषण – वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआँ, पराली जलाने से उत्पन्न।
- जल प्रदूषण – औद्योगिक कचरा, अपशिष्ट जल, रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग।
- भूमि प्रदूषण – प्लास्टिक कचरा, रासायनिक कचरे का अत्यधिक निस्तारण।
- ध्वनि प्रदूषण – शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक ट्रैफिक, कारखानों और लाउडस्पीकरों का उपयोग।
(ii) भूमि क्षरण (Land Degradation)
- मृदा अपरदन – अत्यधिक वनों की कटाई और खेती से मृदा का क्षरण।
- मरुस्थलीकरण – राजस्थान और मध्य भारत में अधिक प्रभावित क्षेत्र।
4. भारत में पर्यावरणीय नीति और कानून (Environmental Policies and Laws in India)
(i) पर्यावरण संरक्षण कानून
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 – वायु, जल और भूमि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए।
- जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 – जल संसाधनों की सुरक्षा के लिए।
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 – औद्योगिक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए।
(ii) जलवायु परिवर्तन और राष्ट्रीय योजना
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)।
- अंतरराष्ट्रीय समझौते:
- क्योटो प्रोटोकॉल (ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लिए)।
- पेरिस समझौता (Paris Agreement, 2015) – जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए।
(iii) पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी
- स्वच्छ भारत अभियान – स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा।
- वन महोत्सव और वृक्षारोपण अभियान।
- रिसाइक्लिंग और प्लास्टिक के उपयोग में कमी।
भारत अपनी अद्वितीय जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ इसके पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही हैं। सतत विकास (Sustainable Development) और कड़े पर्यावरणीय कानूनों का पालन करके भारत अपने पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रख सकता है। सरकार, नागरिकों और उद्योगों को मिलकर प्रयास करना होगा ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो और भावी पीढ़ियों को एक स्वस्थ पर्यावरण मिल सके।