पर्यावरणीय आंदोलन (Environmental Movements)

पर्यावरणीय आंदोलन (Environmental Movements)

पर्यावरणीय आंदोलन ऐसे सामाजिक आंदोलन हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और पर्यावरणीय नीतियों में सुधार के लिए कार्य करते हैं। भारत में कई पर्यावरणीय आंदोलनों ने वन संरक्षण, जल स्रोतों के बचाव और सतत विकास को बढ़ावा दिया है।

  • प्रमुख पर्यावरणीय आंदोलन: चिपको आंदोलन, अपी आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन
  • पर्यावरणीय आंदोलन का प्रभाव और उसकी सफलता
  • भारत में पर्यावरणीय जागरूकता और भूमिका

1. प्रमुख पर्यावरणीय आंदोलन

1.1. चिपको आंदोलन (Chipko Movement) – 1973

🌿 “पेड़ों से चिपक जाओ, उन्हें कटने मत दो!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश)
📍 नेता: सुन्दरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी
📍 उद्देश्य: वनों की अंधाधुंध कटाई रोकना
📍 कार्यप्रणाली:

  • ग्रामीण महिलाएँ पेड़ों से चिपक गईं ताकि उन्हें काटा न जा सके।
  • सरकार को वन कटाई पर रोक लगाने के लिए मजबूर किया गया।
    📍 परिणाम:
    वन संरक्षण अधिनियम, 1980 लागू हुआ।
    ✅ हिमालयी क्षेत्रों में वनों की कटाई पर प्रतिबंध लगा।

1.2 अपीको आंदोलन (Appiko Movement) – 1983

🌳 “पेड़ों को बचाओ, जीवन बचाओ!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: कर्नाटक (पश्चिमी घाट)
📍 नेता: पंडुरंग हेगड़े
📍 उद्देश्य: वन संरक्षण और वनों की कटाई रोकना
📍 कार्यप्रणाली:

  • ग्रामीणों ने पेड़ों से चिपककर कटाई रोकी।
  • जन-जागरूकता अभियान चलाया।
    📍 परिणाम:
    ✅ सरकार ने वन कटाई पर प्रतिबंध लगाया।
    ✅ स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में शामिल किया गया।

1.3 नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) – 1985

🌊 “नर्मदा घाटी के लोगों के लिए न्याय!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र
📍 नेता: मेधा पाटकर, बाबा आमटे
📍 उद्देश्य:

  • सरदार सरोवर बांध परियोजना से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की माँग।
  • बड़े बांधों के पर्यावरणीय प्रभावों का विरोध।
    📍 परिणाम:
    ✅ विश्व बैंक ने परियोजना से वित्तीय सहायता वापस ले ली।
    ✅ पुनर्वास नीति में सुधार किया गया।

1.4 साइलेंट वैली आंदोलन (Silent Valley Movement) – 1978

🌱 “वनों को नष्ट मत करो!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: केरल
📍 नेता: केरल सरकार, वैज्ञानिक समुदाय
📍 उद्देश्य:

  • साइलेंट वैली के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों को हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना से बचाना।
    📍 परिणाम:
    1985 में सरकार ने परियोजना रद्द कर दी।
    ✅ साइलेंट वैली को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।

1.5 बिश्नोई आंदोलन (Bishnoi Movement) – 1730

🌿 “प्रकृति की रक्षा के लिए बलिदान!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: राजस्थान
📍 नेता: अमृता देवी
📍 उद्देश्य:

  • वनों और वन्यजीवों की रक्षा।
    📍 कार्यप्रणाली:
  • अमृता देवी और 363 बिश्नोई समाज के लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए लेकिन पेड़ों को कटने नहीं दिया।
    📍 परिणाम:
    ✅ इस आंदोलन से वन संरक्षण की परंपरा मजबूत हुई।
    वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के निर्माण में प्रेरणा मिली।

1.6 तेह्री बांध विरोध आंदोलन (Tehri Dam Protest) – 1990s

🚧 “गंगा बचाओ, गांव बचाओ!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: उत्तराखंड
📍 नेता: सुन्दरलाल बहुगुणा
📍 उद्देश्य:

  • तेह्री बांध के पर्यावरणीय प्रभावों का विरोध।
    📍 परिणाम:
    ✅ सरकार ने बांध निर्माण की समीक्षा की।
    ✅ विस्थापितों के पुनर्वास के लिए नीतियाँ बनीं।

1.7. कोयल-कारो आंदोलन (Koel-Karo Movement)

“खनन से आदिवासियों और पर्यावरण की रक्षा!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: झारखंड
📍 नेता: स्थानीय आदिवासी समूह
📍 उद्देश्य:

  • जलविद्युत परियोजना से आदिवासी विस्थापन रोकना।
    📍 परिणाम:
    ✅ परियोजना को रद्द कर दिया गया।

1.8 वेदांत विरोध आंदोलन (Vedanta Protest) – 2000s

🏞 “खनन परियोजना के खिलाफ संघर्ष!”

मुख्य बिंदु:

📍 स्थान: ओडिशा
📍 नेता: डोंगरिया कोंध जनजाति
📍 उद्देश्य:

  • बॉक्साइट खनन से पारिस्थितिकी और जनजातीय भूमि की रक्षा।
    📍 परिणाम:
    भारत सरकार ने परियोजना को रोक दिया।

2. पर्यावरणीय आंदोलन का प्रभाव और सफलता

(i) पर्यावरण संरक्षण पर प्रभाव

✅ जंगलों की कटाई पर रोक लगी।
✅ वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा हुई।
✅ सरकार ने वन संरक्षण और जल प्रबंधन पर कानून बनाए।

(ii) समाज पर प्रभाव

✅ जन-जागरूकता बढ़ी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ी।
✅ विस्थापित लोगों के पुनर्वास की नीतियों में सुधार हुआ।
✅ महिलाओं की भागीदारी बढ़ी (जैसे, चिपको आंदोलन में)।

(iii) पर्यावरणीय कानूनों पर प्रभाव

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 लागू किया गया।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 बना।
जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 को मजबूत किया गया।


3. भारत में पर्यावरणीय जागरूकता और भूमिका

(i) सरकार की पहल:

📜 राष्ट्रीय वन नीति, 1988 – वनों का संरक्षण और प्रबंधन।
💧 गंगा और यमुना सफाई अभियान – नदियों को प्रदूषण से बचाना।
🌱 राष्ट्रीय जैव विविधता मिशन – जैव विविधता संरक्षण।
स्वच्छ भारत मिशन – स्वच्छता और कचरा प्रबंधन।

(ii) जनता की भागीदारी:

🚮 प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान – प्लास्टिक कचरे को कम करने की पहल।
🌿 सतत कृषि पद्धतियाँ – जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
🌍 वृक्षारोपण अभियान – पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए सामुदायिक भागीदारी।

(iii) मीडिया और शिक्षा की भूमिका:

📰 पर्यावरणीय मुद्दों पर समाचार पत्र और डिजिटल मीडिया में जागरूकता।
📚 विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पर्यावरण अध्ययन को बढ़ावा।
📺 डॉक्यूमेंट्री और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जन-चेतना बढ़ाना।


4. महत्वपूर्ण पर्यावरणीय आंदोलन

आंदोलन स्थान नेता/संगठन उद्देश्य
साइलेंट वैली आंदोलन (Silent Valley Movement) – 1978 केरल केरल सरकार, वैज्ञानिक समुदाय साइलेंट वैली के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों को हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से बचाना
तेह्री बांध विरोध आंदोलन (Tehri Dam Protest) – 1990s उत्तराखंड सुन्दरलाल बहुगुणा गंगा नदी पर बड़े बांध के खिलाफ संघर्ष
बिश्नोई आंदोलन (Bishnoi Movement) – 1730 राजस्थान अमृता देवी वन संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए बलिदान
कोयल-कारो आंदोलन (Koel-Karo Movement) झारखंड स्थानीय आदिवासी जलविद्युत परियोजना से आदिवासी विस्थापन रोकना
वेध परियोजना विरोध आंदोलन (Vedanta Protest) – 2000s ओडिशा डोंगरिया कोंध जनजाति बॉक्साइट खनन से पारिस्थितिकी और जनजातीय भूमि की रक्षा

भारत में पर्यावरणीय आंदोलनों ने वन, जल, भूमि और पारिस्थितिकी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन आंदोलनों की वजह से कई पर्यावरणीय कानून बने, पुनर्वास नीतियों में सुधार हुआ और जन-जागरूकता बढ़ी।

➡ हमें भी पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूक नागरिक बनना चाहिए और सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में कार्य करना चाहिए। 🌍♻