ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारतीय संविधान का विकास (The Historical Background of the Indian Constitution)
भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए यह आवश्यक है कि हम भारत में संवैधानिक विकास के उन प्रमुख चरणों को समझें जो ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुए। यह प्रक्रिया 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन से प्रारंभ हुई और 1947 में भारत की स्वतंत्रता तक चली। इन चरणों ने भारत के वर्तमान संवैधानिक ढांचे की नींव रखी।
1. ब्रिटिश शासन की विरासत
ब्रिटिश शासन ने भारत में प्रशासनिक, राजनीतिक, और न्यायिक ढांचे की नींव रखी। हालांकि, उनका मुख्य उद्देश्य अपने उपनिवेश का शोषण था, लेकिन उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में आधुनिक प्रशासनिक संरचनाओं का आरंभ किया। प्रमुख प्रभावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
(a) ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन और नियंत्रण
-
1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा व्यापार के लिए चार्टर प्रदान किया गया।
-
कंपनी ने धीरे-धीरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार केंद्र स्थापित किए।
-
प्लासी (1757) और बक्सर (1764) की लड़ाइयों के बाद कंपनी ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर नियंत्रण प्राप्त किया।
(b) प्रारंभिक प्रशासनिक सुधार
-
प्रशासन के शुरुआती चरण में, कंपनी के अधिकारी वाणिज्य और प्रशासन दोनों का प्रबंधन करते थे।
-
1773 का नियामक अधिनियम (Regulating Act) पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक कार्यों पर ब्रिटिश संसद का नियंत्रण लाया।
(c) संवैधानिक सुधार और राजनीतिक चेतना
-
ब्रिटिश शासन के अधीन कई संवैधानिक सुधार हुए, जिन्होंने भारतीय राजनीतिक चेतना को प्रभावित किया।
-
अंग्रेजों ने शिक्षा, प्रेस और रेलवे के माध्यम से आधुनिकता की शुरुआत की, जिसने भारतीय समाज को नई दिशा दी।
2. 1947 से पहले के प्रमुख अधिनियम
ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय संविधान का विकास कई अधिनियमों के माध्यम से हुआ। इन अधिनियमों ने भारत में संवैधानिक विकास के मार्ग प्रशस्त किए।
(a) नियामक अधिनियम, 1773
-
यह अधिनियम कंपनी के व्यापार और प्रशासनिक कार्यों को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा पारित पहला कानून था।
-
इसमें बंगाल के गवर्नर जनरल का पद सृजित किया गया, जिसे मद्रास और बंबई के गवर्नर पर नियंत्रण दिया गया।
-
कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई।
(b) पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
-
इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक और व्यावसायिक कार्यों को अलग कर दिया।
-
भारत में ब्रिटिश प्रशासन की देखरेख के लिए एक बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना की गई।
(c) चार्टर अधिनियम (Charter Acts)
1. चार्टर अधिनियम, 1813
-
कंपनी के व्यापार एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, लेकिन चाय और चीन के व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
-
भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए 1 लाख रुपये वार्षिक अनुदान स्वीकृत किया गया।
2. चार्टर अधिनियम, 1833
-
यह अधिनियम भारत में गवर्नर जनरल को पूरे भारत का गवर्नर जनरल बना देता है।
-
बंगाल के गवर्नर जनरल विलियम बेंटिंक भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।
-
भारत में कानूनों का निर्माण करने के लिए एक विधायी परिषद स्थापित की गई।
3. चार्टर अधिनियम, 1853
-
पहली बार भारतीयों को सिविल सेवाओं में भाग लेने का अवसर दिया गया।
-
विधायिका के कामों को अलग किया गया।
(d) भारत सरकार अधिनियम (Government of India Acts)
1. भारत सरकार अधिनियम, 1858
-
1857 के विद्रोह के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया।
-
भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
-
वायसराय का पद सृजित किया गया। लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
2. भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
-
भारतीयों को कानून निर्माण में भाग लेने का अवसर दिया गया।
-
प्रांतीय विधान परिषदों की स्थापना की गई।
3. भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
-
इस अधिनियम ने विधायिका में भारतीयों की संख्या बढ़ाई।
-
भारतीयों को बजट पर चर्चा करने का अधिकार दिया गया।
4. भारत सरकार अधिनियम, 1909 (मिंटो-मॉर्ले सुधार)
-
मुस्लिमों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की शुरुआत की गई।
-
विधान परिषदों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई।
5. भारत सरकार अधिनियम, 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार)
-
केंद्र और प्रांतों के बीच द्वैध शासन (Diarchy) की शुरुआत हुई।
-
भारतीयों को पहली बार प्रांतीय सरकारों में अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया।
6. भारत सरकार अधिनियम, 1935
-
यह ब्रिटिश भारत में सबसे व्यापक और विस्तृत अधिनियम था।
-
प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की गई।
-
संघीय न्यायालय की स्थापना की गई।
-
भारतीय संघ की अवधारणा प्रस्तुत की गई।
7. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
-
भारत को स्वतंत्रता प्रदान की गई।
-
भारत और पाकिस्तान के रूप में देश का विभाजन हुआ।
-
संविधान सभा को भारत का संविधान बनाने का अधिकार दिया गया।
भारतीय संविधान के विकास पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव
(a) न्यायिक प्रणाली का विकास
-
ब्रिटिशों ने भारत में आधुनिक न्यायिक प्रणाली की नींव रखी।
-
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसे संस्थानों की स्थापना की गई।
(b) लोकतांत्रिक विचारधारा का प्रवेश
-
चुनावी प्रणाली, पृथक निर्वाचक मंडल, और प्रतिनिधित्व की अवधारणा भारतीय राजनीति में आई।
(c) संविधान सभा की प्रेरणा
-
ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित विधायी और कार्यकारी संस्थानों ने भारतीय नेताओं को संवैधानिक ढांचा तैयार करने की प्रेरणा दी।
इस प्रकार, भारतीय संविधान का विकास एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें ब्रिटिश शासन की कानूनी और प्रशासनिक विरासत का महत्वपूर्ण योगदान रहा।