पर्यावरण का परिचय (Chapter 1: Introduction to Environment)
पर्यावरण (Environment) वह समग्र प्राकृतिक और मानव निर्मित परिवेश है, जिसमें जीव-जंतु, वनस्पति, जल, वायु और भूमि सहित सभी तत्व परस्पर क्रिया करते हैं। यह मानव जीवन और पृथ्वी के समस्त जैविक तथा अजैविक घटकों को नियंत्रित करने वाली एक जटिल प्रणाली है।
- पर्यावरण की परिभाषा और घटक: जैविक और अजैविक घटक
- पारिस्थितिकी (Ecology) का परिचय: परिभाषा, महत्त्व
- पर्यावरणीय प्रणाली: पारिस्थितिकी तंत्र, जैवमंडल, जलमंडल, वायुमंडल
- पारिस्थितिकी विज्ञान की शाखाएँ: समुदाय पारिस्थितिकी, तंत्र पारिस्थितिकी, संगठक पारिस्थितिकी
1. पर्यावरण की परिभाषा और घटक (Definition and Components of Environment)
(i) पर्यावरण की परिभाषा (Definition of Environment)
पर्यावरण वह प्राकृतिक प्रणाली है, जिसमें जीवों और उनके चारों ओर उपस्थित अजैविक घटकों के बीच परस्पर क्रियाएँ होती हैं। “पर्यावरण” शब्द संस्कृत के “परि” (चारों ओर) और “आवरण” (घेरने वाला) से बना है, जिसका अर्थ है—हमारे चारों ओर का परिवेश।
विभिन्न विद्वानों द्वारा पर्यावरण की परिभाषाएँ:
- पी. गोरेनफ्लोटर: “पर्यावरण उन सभी कारकों का समूह है, जो किसी जीव के जीवन को प्रभावित करते हैं।”
- ई.पी. ओडम: “पर्यावरण वह है, जो किसी जीव को प्रभावित करता है और उसके अस्तित्व को निर्धारित करता है।”
(ii) पर्यावरण के घटक (Components of Environment)
पर्यावरण के मुख्य रूप से दो घटक होते हैं:
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जैविक घटक (Biotic Components) – वे घटक, जो जीवित हैं और पारिस्थितिकी में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
- उत्पादक (Producers): हरे पौधे, शैवाल, फाइटोप्लांकटन
- उपभोक्ता (Consumers): शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी
- अपघटक (Decomposers): बैक्टीरिया, कवक (Fungi)
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अजैविक घटक (Abiotic Components) – वे घटक, जो निर्जीव होते हैं और जीवों को प्रभावित करते हैं।
- भौतिक कारक: सूर्य का प्रकाश, तापमान, आर्द्रता, वायुदाब
- रासायनिक कारक: जल, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन
- भौगोलिक कारक: मिट्टी, जल निकाय, स्थलरूप
2. पारिस्थितिकी (Ecology) का परिचय
(i) पारिस्थितिकी की परिभाषा (Definition of Ecology)
पारिस्थितिकी (Ecology) एक विज्ञान है, जो जीवों और उनके पर्यावरण के बीच परस्पर संबंधों का अध्ययन करता है।
“पारिस्थितिकी” शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के “Oikos” (गृह) और “Logos” (अध्ययन) से हुई है, जिसका अर्थ है “प्राकृतिक पर्यावरण का अध्ययन”।
(ii) पारिस्थितिकी का महत्व (Importance of Ecology)
- पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना
- जैव विविधता का संरक्षण
- पारिस्थितिक सेवाओं की सुरक्षा (जैसे—जल शुद्धिकरण, परागण)
- जलवायु परिवर्तन का अध्ययन
3. पर्यावरणीय प्रणाली (Environmental System)
पर्यावरण विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों और भौतिक मंडलों से मिलकर बना है।
(i) पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)
यह एक जैविक समुदाय (Biotic Community) और उसके अजैविक घटकों के बीच अंतःक्रियाओं की प्रणाली है। उदाहरण: जंगल, तालाब, समुद्र, रेगिस्तान आदि।
(ii) जैवमंडल (Biosphere)
यह पृथ्वी का वह भाग है, जहाँ जीवन संभव है। इसमें सभी पारिस्थितिक तंत्र शामिल होते हैं।
(iii) जलमंडल (Hydrosphere)
यह पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल निकायों को दर्शाता है, जैसे महासागर, नदियाँ, झीलें, भूजल।
(iv) वायुमंडल (Atmosphere)
यह पृथ्वी के चारों ओर फैली गैसों की परत है, जो जीवन के लिए आवश्यक गैसों की आपूर्ति करता है।
4. पारिस्थितिकी विज्ञान की शाखाएँ (Branches of Ecology)
पारिस्थितिकी विज्ञान को विभिन्न स्तरों पर अध्ययन करने के लिए कई शाखाओं में विभाजित किया गया है:
(i) समुदाय पारिस्थितिकी (Community Ecology)
- यह विभिन्न जीवों के समुदायों के परस्पर संबंधों और उनके पर्यावरण के अध्ययन से संबंधित है।
- इसमें जीवों की विभिन्न प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा, सहजीवन और परभक्षण की क्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है।
(ii) तंत्र पारिस्थितिकी (System Ecology)
- यह पारिस्थितिक तंत्र के ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र के अध्ययन से संबंधित है।
- इसमें जैव-भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है।
(iii) संगठक पारिस्थितिकी (Organizational Ecology)
- यह एक ही प्रजाति के जीवों के बीच जनसंख्या संरचना, अनुकूलन और विकास से संबंधित है।
- उदाहरण: किसी विशेष क्षेत्र में बाघों की संख्या और उनके रहन-सहन का अध्ययन।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी विज्ञान न केवल जीवों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र के बीच संबंधों को समझने में मदद करता है, बल्कि यह मानव जाति के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता क्षरण, वनों की कटाई और प्रदूषण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए पारिस्थितिकी विज्ञान का अध्ययन अत्यंत आवश्यक हो गया है।