न्यायपालिका (Judiciary)
भारतीय संविधान में न्यायपालिका को कानून की रक्षा करने और नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंग के रूप में स्थापित किया गया है। यह तीन स्तरों पर कार्य करती है: उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, और अधीनस्थ न्यायालय।
क. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)
भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च अंग उच्चतम न्यायालय है। यह संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 के अंतर्गत स्थापित किया गया है। उच्चतम न्यायालय को संविधान का संरक्षक और अंतिम अपील का न्यायालय माना जाता है।
1. संरचना
- मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI):
- उच्चतम न्यायालय का प्रमुख।
- राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त।
- अन्य न्यायाधीश:
- संविधान के अनुसार, न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या संसद द्वारा निर्धारित की जाती है।
- वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 न्यायाधीश।
2. शक्तियाँ और अधिकार क्षेत्र
(a) मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction)
- केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को सुलझाना।
- अनुच्छेद 131 के तहत किसी भी विवाद की सुनवाई।
- संघ और राज्यों के बीच संवैधानिक मुद्दों का समाधान।
(b) अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction)
- उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनना।
- आपराधिक, नागरिक, और संवैधानिक मामलों में अपील।
(c) परामर्शात्मक अधिकारिता (Advisory Jurisdiction)
- अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेना।
(d) रिट जारी करने का अधिकार (Writ Jurisdiction)
- अनुच्छेद 32 के तहत मूल अधिकारों की सुरक्षा के लिए रिट जारी करना।
- पाँच प्रकार की रिट:
- हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus)
- मंडामस (Mandamus)
- प्रोहिबिशन (Prohibition)
- सर्टिओरारी (Certiorari)
- क्यो वारंटो (Quo Warranto)
(e) न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
- संसद और राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा।
(f) संविधान की व्याख्या
- संविधान के अनुच्छेदों की व्याख्या करना।
- “मूल संरचना सिद्धांत” की रक्षा।
3. अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित विवादों का निपटारा।
- संसद द्वारा महाभियोग के मामलों में निर्णय।
ख. उच्च न्यायालय (High Court)
उच्च न्यायालय राज्य या राज्यों के समूह के न्यायिक प्रशासन का सर्वोच्च अंग है। यह संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 के तहत स्थापित किया गया है।
1. संरचना
- प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होते हैं।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- सेवानिवृत्ति की आयु: 62 वर्ष।
2. अधिकार क्षेत्र
(a) मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction)
- अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी करना।
- नागरिक और आपराधिक मामलों की सुनवाई।
(b) अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction)
- अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनना।
(c) पर्यवेक्षी अधिकारिता (Supervisory Jurisdiction)
- अधीनस्थ न्यायालयों के कार्यों की निगरानी।
- अधीनस्थ न्यायालयों के लिए दिशानिर्देश जारी करना।
(d) न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
- राज्य द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा।
3. उच्च न्यायालय का नियंत्रण
- राज्य न्यायपालिका के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण।
- न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण।
ग. अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts)
1. संरचना और वर्गीकरण
- अधीनस्थ न्यायालय राज्य के न्यायिक ढांचे के तहत काम करते हैं।
- दो मुख्य प्रकार के न्यायालय:
- सिविल न्यायालय (Civil Courts): दीवानी मामलों की सुनवाई।
- फौजदारी न्यायालय (Criminal Courts): अपराध संबंधी मामलों की सुनवाई।
2. अधीनस्थ न्यायालयों का वर्गीकरण
- जिला न्यायालय (District Courts):
- जिले का सर्वोच्च न्यायालय।
- एक जिला न्यायाधीश के नेतृत्व में।
- तहसील न्यायालय (Tehsil/Sub-Divisional Courts):
- स्थानीय स्तर के विवादों का निपटारा।
- आदालतों की विशेष श्रेणियाँ:
- पारिवारिक न्यायालय।
- श्रम न्यायालय।
- उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग।
3. कार्य और शक्तियाँ
- जिला न्यायालय उच्च न्यायालय के नियंत्रण में कार्य करता है।
- सिविल और आपराधिक मामलों की सुनवाई।
- न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों का संचालन।
भारतीय न्यायपालिका अपने संघीय ढांचे के साथ एकीकृत और स्वतंत्र है। उच्चतम न्यायालय संविधान का संरक्षक है, जबकि उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय न्यायिक प्रक्रिया को राज्य और स्थानीय स्तर पर लागू करते हैं। न्यायपालिका का यह ढांचा भारत में न्यायिक प्रणाली को मजबूत और प्रभावी बनाता है।