भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ (Key features of the Indian Constitution)
भारतीय संविधान दुनिया के सबसे विस्तृत और विशिष्ट संविधानों में से एक है। यह विभिन्न देशों के संविधानों से सर्वोत्तम विशेषताएँ लेकर तैयार किया गया है और इसे भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अनुकूलित किया गया है। भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. संघात्मक ढांचा (Federal Structure) और एकात्मक झुकाव
(a) संघात्मक ढांचे की विशेषताएँ
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भारतीय संविधान भारत को “संघ” (Union) घोषित करता है।
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सत्ता का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है:
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संविधान की संघ सूची (Union List): इसमें 97 विषय शामिल हैं, जिन पर केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
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राज्य सूची (State List): इसमें 66 विषय हैं, जिन पर राज्य सरकार कानून बना सकती है।
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समवर्ती सूची (Concurrent List): इसमें 47 विषय हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
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(b) एकात्मक झुकाव
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संविधान में एकात्मक तत्व भी हैं, जैसे:
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राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
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राष्ट्रपति के पास आपातकालीन स्थितियों में राज्यों पर नियंत्रण का अधिकार है।
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
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भारतीय न्यायपालिका की एकीकृत संरचना और अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS) संघात्मक ढांचे को एकात्मक झुकाव देती हैं।
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2. संसदीय प्रणाली (Parliamentary System)
(a) विशेषताएँ
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भारत में संसदीय प्रणाली को ब्रिटिश प्रणाली से अपनाया गया है।
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संसदीय प्रणाली का मुख्य आधार कार्यपालिका का विधायिका के प्रति उत्तरदायित्व है।
(b) राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भूमिका
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राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और संसदीय सलाह के अनुसार कार्य करते हैं।
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प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है।
(c) द्विसदनीय विधायिका
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भारतीय संसद दो सदनों से मिलकर बनती है:
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लोकसभा (निम्न सदन): यह जनता के प्रत्यक्ष प्रतिनिधियों का सदन है।
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राज्यसभा (उच्च सदन): यह राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
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(d) कार्यपालिका की उत्तरदायित्व
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प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
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यदि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
3. सबसे लंबा संविधान
(a) विशालता का कारण
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भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसके प्रारंभिक रूप में 22 भाग, 395 अनुच्छेद, और 8 अनुसूचियाँ थीं। वर्तमान में:
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25 भाग
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448 अनुच्छेद
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12 अनुसूचियाँ हैं।
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(b) विस्तार के कारण
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भारत की सांस्कृतिक, भाषाई, और सामाजिक विविधता।
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केंद्र-राज्य संबंधों का विस्तार।
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नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों का समावेश।
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विभिन्न देशों के संविधानों से सर्वोत्तम विशेषताओं को अपनाना।
4. लचीलापन और कठोरता का मिश्रण
(a) लचीलापन
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संविधान में संशोधन की प्रक्रिया सरल भी है।
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संसद साधारण बहुमत से कुछ अनुच्छेदों में संशोधन कर सकती है।
(b) कठोरता
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कुछ संशोधनों के लिए संसद में विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है।
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यह कठोरता संवैधानिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
(c) अनुच्छेद 368
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संविधान के संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में निर्धारित की गई है। इसमें तीन प्रकार के संशोधन शामिल हैं:
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साधारण विधायी प्रक्रिया द्वारा संशोधन।
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विशेष बहुमत द्वारा संशोधन।
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विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति द्वारा संशोधन।
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5. मौलिक अधिकार और कर्तव्य (Fundamental Rights and Duties)
(a) मौलिक अधिकार
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संविधान में अनुच्छेद 12 से 35 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान है। इनमें शामिल हैं:
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समानता का अधिकार
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स्वतंत्रता का अधिकार
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शोषण के विरुद्ध अधिकार
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धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
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सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
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संवैधानिक उपचार का अधिकार
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(b) मौलिक कर्तव्य
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42वें संशोधन (1976) के तहत अनुच्छेद 51A में 11 मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया।
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ये कर्तव्य नागरिकों को राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों का एहसास कराते हैं।
6. धर्मनिरपेक्षता (Secularism)
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भारतीय संविधान भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है।
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राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है।
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सभी धर्मों को समान सम्मान दिया जाता है और किसी भी नागरिक के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
7. न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary)
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भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र और निष्पक्ष है।
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यह कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र है।
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न्यायपालिका को संविधान की संरक्षक के रूप में जाना जाता है।
भारतीय संविधान का संघात्मक ढांचा, संसदीय प्रणाली, विशालता, और लचीलेपन के साथ कठोरता का संतुलन इसे अद्वितीय बनाता है। साथ ही, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता, और न्यायपालिका की स्वतंत्रता इसे एक सशक्त और समावेशी दस्तावेज बनाते हैं। यह न केवल भारत की विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समाहित करता है, बल्कि बदलते समय और परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित भी हो सकता है।