1. कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire) उत्पत्ति और पृष्ठभूमि
- कुषाण मूलतः युए-ची (Yuezhi) जाति की एक शाखा थे।
- युए-ची लोग मध्य एशिया (चीन के पश्चिमी भाग) से निकले और धीरे-धीरे बैक्ट्रिया (Bactria), गांधार और काबुल घाटी पर अधिकार कर लिया।
- युए-ची जनजाति पाँच शाखाओं में बंटी थी, जिनमें से एक शाखा को कुषाण कहा गया।
- बाद में इस शाखा ने सबसे शक्तिशाली होकर पूरे क्षेत्र पर शासन स्थापित किया।
2. कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire) – साम्राज्य का विस्तार
- प्रारंभिक कुषाण शासकों ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत में अपनी सत्ता जमाई।
- सबसे महान शासक कनिष्क (Kanishka) था, जिसके समय में साम्राज्य का विस्तार काबुल, कंधार, पंजाब, गंगा-यमुना का दोआब और काशी तक हुआ।
- कुषाण साम्राज्य का प्रभाव मध्य एशिया से लेकर गंगा घाटी और पश्चिम में रोमन साम्राज्य तक फैला हुआ था।
3. प्रमुख कुषाण शासक
(A) कुजुल कडफिसेस (Kujula Kadphises)
- कुषाणों का प्रथम महत्वपूर्ण शासक।
- इसने बैक्ट्रिया और गांधार पर अधिकार किया।
- सिकंदर और मौर्यों के बाद उत्तर-पश्चिम भारत को राजनीतिक रूप से एकजुट किया।
(B) विम कडफिसेस (Vima Kadphises)
- कुजुल का उत्तराधिकारी।
- भारत में स्थायी रूप से प्रवेश किया।
- पहली बार सोने के सिक्के (Gold Coins) जारी किए।
- उसके सिक्कों पर शिव और नंदी की छवि मिलती है।
(C) कनिष्क (Kanishka) – महानतम शासक
- कुषाण वंश का सबसे शक्तिशाली सम्राट।
- राजधानी: पुरुषपुर (पेशावर) और ग्रीष्मकालीन राजधानी: मथुरा।
- साम्राज्य की सीमा काबुल से लेकर वाराणसी तक और मध्य एशिया तक फैली।
- कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति (Fourth Buddhist Council) बुलाई, जो कश्मीर में हुई।
- कला, धर्म और व्यापार का स्वर्णयुग कनिष्क के काल में हुआ।
4. प्रशासनिक व्यवस्था
- कुषाण राजाओं की सत्ता अत्यंत शक्तिशाली थी।
- राजा की उपाधियाँ: “दैवपुत्र” (Son of God), “शाहनशाह” (King of Kings)।
- सिक्कों पर ग्रीक, ईरानी और भारतीय देवताओं की छवियाँ मिलती हैं।
- राज्य में सातवाहनों और रोमन साम्राज्य से व्यापारिक संबंध विकसित हुए।
5. धर्म और संस्कृति
- कुषाण शासक धार्मिक रूप से सहिष्णु थे।
- उन्होंने बौद्ध धर्म (विशेषकर महायान शाखा) को संरक्षण दिया।
- कनिष्क स्वयं बौद्ध धर्म का महान संरक्षक था, परंतु उसने अन्य धर्मों का भी सम्मान किया।
- कुषाण सिक्कों पर बौद्ध, हिंदू, ग्रीक और ईरानी देवताओं की छवियाँ मिलती हैं।
6. कला और स्थापत्य
- कुषाण काल में गंधार कला (Greco-Buddhist Art) और मथुरा कला का उत्कर्ष हुआ।
- गंधार कला में यूनानी प्रभाव स्पष्ट है – बुद्ध की प्रतिमाएँ ग्रीक शैली में।
- मथुरा कला पूरी तरह भारतीय शैली में – लाल बलुआ पत्थर से बनी प्रतिमाएँ।
- इस समय बोधिसत्व और बुद्ध प्रतिमाओं का निर्माण प्रारंभ हुआ।
7. साहित्य और विद्या
- कनिष्क के समय बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ।
- प्रसिद्ध विद्वान: अश्वघोष (बुद्धचरित के लेखक), नागार्जुन, वसुबंधु और चरक (चरक संहिता के रचयिता)।
- संस्कृत भाषा का पुनर्जागरण हुआ।
8. अर्थव्यवस्था और व्यापार
- कुषाण काल में भारत और रोम के बीच सक्रिय व्यापार था।
- भारत से मसाले, रत्न, हाथीदांत, वस्त्र निर्यात होते थे।
- रोमन साम्राज्य से सोना-चाँदी आता था।
- समुद्री और स्थलीय सिल्क रूट (Silk Route) पर व्यापार की समृद्धि।
9. सिक्के
- कुषाणों के सिक्के प्राचीन भारतीय इतिहास के उत्कृष्ट स्रोत हैं।
- पहली बार बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए गए।
- सिक्कों पर यूनानी, ईरानी और भारतीय देवताओं के चित्र अंकित थे।
10. पतन
- तीसरी शताब्दी ईस्वी के बाद कुषाण साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
- आंतरिक विद्रोह और आर्थिक कठिनाइयों ने साम्राज्य को कमजोर किया।
- अंततः ससानी राजाओं (Persians) और गुप्त साम्राज्य के उदय ने कुषाणों को समाप्त कर दिया।
कुषाण साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय था।
- इसने भारत को मध्य एशिया और पश्चिमी एशिया से जोड़ा।
- बौद्ध धर्म का महायान रूप पूरे एशिया में फैला।
- गंधार और मथुरा कला ने भारतीय कला की दिशा बदल दी।
- कनिष्क को सही मायनों में भारत का “एशियाई सम्राट” कहा जा सकता है।
FAQs – कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire) Quiz
Q1. कुषाण साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?
A. कुषाण साम्राज्य की स्थापना कुजुल कडफिसेस (Kujula Kadphises) ने प्रथम शताब्दी ईस्वी में की थी।
Q2. कुषाणों की राजधानी कौन-सी थी?
A. प्रारंभिक राजधानी पुरुषपुर (Peshawar) और बाद में मथुरा थी।
Q3. कुषाण साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
A. कनिष्क कुषाण साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक था।
Q4. कुषाण काल में कौन-सा धर्म विशेष रूप से फल-फूल रहा था?
A. बौद्ध धर्म विशेष रूप से महायान शाखा के रूप में उत्कर्ष पर था।
Q5. कुषाण साम्राज्य के सिक्कों की क्या विशेषता थी?
A. कुषाणों ने स्वर्ण मुद्राएँ जारी कीं जिन पर यूनानी और भारतीय देवताओं की आकृतियाँ अंकित थीं।
Q6. कुषाण साम्राज्य के समय कौन-सा प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा गया?
A. अश्वघोष द्वारा रचित बुद्धचरित इसी काल में लिखा गया था।
Q7. कुषाण काल की कला किस नाम से प्रसिद्ध है?
A. इस काल की कला गंधार शैली और मथुरा शैली के रूप में प्रसिद्ध हुई।
Q8. कुषाण साम्राज्य की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
A. व्यापार, विशेषकर रेशम मार्ग (Silk Route) के कारण, साम्राज्य अत्यंत समृद्ध था।
Q9. कनिष्क के समय कौन-सी महत्वपूर्ण परिषद् आयोजित हुई थी?
A. चौथी बौद्ध संगीति (Fourth Buddhist Council) कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर में हुई थी।
Q10. कुषाण साम्राज्य का पतन कब हुआ?
A. तीसरी शताब्दी ईस्वी के मध्य में कुषाण साम्राज्य का पतन प्रारंभ हुआ।