भारतीय संविधान का निर्माण (The Making of the Indian Constitution)

 

भारतीय संविधान का निर्माण (The Making of the Indian Constitution)

भारतीय संविधान का निर्माण विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और अद्वितीय घटनाओं में से एक है। यह प्रक्रिया संविधान सभा द्वारा संचालित की गई, जिसमें विभिन्न वर्गों, समुदायों और विचारधाराओं के प्रतिनिधित्व के साथ भारत के भविष्य का खाका तैयार किया गया। संविधान के निर्माण के प्रमुख पहलुओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है।


1. संविधान सभा की संरचना और उद्देश्य

(a) संविधान सभा का गठन

  • संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत किया गया।

  • संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे, जिनमें से:

    • 292 सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा चुने गए।

    • 93 सदस्य देशी रियासतों द्वारा नामित किए गए।

    • 4 सदस्य चंडीगढ़, दिल्ली और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते थे।

  • स्वतंत्रता और विभाजन के बाद संविधान सभा में केवल 299 सदस्य बचे।

(b) सदस्यों का प्रतिनिधित्व

  • संविधान सभा में सभी प्रमुख वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया।

  • प्रमुख सदस्य:

    • डॉ. भीमराव अंबेडकर (मसौदा समिति के अध्यक्ष)

    • जवाहरलाल नेहरू

    • सरदार वल्लभभाई पटेल

    • मौलाना अबुल कलाम आजाद

    • राजेंद्र प्रसाद (संविधान सभा के अध्यक्ष)

(c) संविधान सभा के उद्देश्य

  • एक ऐसा संविधान तैयार करना जो भारत को स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाए।

  • नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार सुनिश्चित करना।

  • देश की विविधता और एकता को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक ढांचा तैयार करना।


2. मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया

(a) प्रारंभिक चरण

  • संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 को अपनी पहली बैठक की।

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया।

  • 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने “उद्देश्य प्रस्ताव” प्रस्तुत किया, जिसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया। यह प्रस्ताव संविधान की मुख्य विशेषताओं का आधार बना।

(b) विभिन्न समितियों का गठन

संविधान सभा ने संविधान निर्माण के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया। प्रमुख समितियाँ थीं:

  1. मसौदा समिति (Drafting Committee):

    • अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर

    • कार्य: संविधान का प्रारूप तैयार करना।

  2. संघ शक्ति समिति:

    • अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू

    • कार्य: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन।

  3. राज्य समिति:

    • अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल

    • कार्य: राज्यों के अधिकार और संबंध।

  4. संघीय न्यायपालिका समिति:

    • कार्य: न्यायपालिका की संरचना।

  5. धार्मिक अल्पसंख्यक समिति:

    • अध्यक्ष: हरि सिंह गौड़

    • कार्य: अल्पसंख्यकों के अधिकार।

(c) संविधान का मसौदा

  • मसौदा समिति ने संविधान के प्रारूप को तैयार करने के लिए अन्य देशों के संविधानों का गहन अध्ययन किया।

  • 4 नवंबर 1947 को संविधान का पहला मसौदा प्रस्तुत किया गया।

  • मसौदे पर विस्तृत चर्चा के लिए 166 दिनों तक बहस चली, जो लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिनों तक चली।

(d) संविधान में प्रमुख विशेषताओं का समावेश

  • मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)

  • संघीय ढांचा और संसदीय प्रणाली

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता

  • सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता


3. संविधान का अंगीकरण और प्रवर्तन

(a) अंगीकरण की प्रक्रिया

  • 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।

  • इसे 26 जनवरी 1950 से प्रभावी किया गया। इस दिन को इसलिए चुना गया क्योंकि 1930 में इसी दिन कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया था।

(b) संविधान की विशेषताएँ

  • यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है।

  • इसमें 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं (अब संशोधनों के बाद 25 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं)।

  • भारतीय संविधान में अन्य देशों के संविधानों की सर्वोत्तम विशेषताओं को सम्मिलित किया गया।

(c) संविधान का प्रवर्तन

  • 26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना और संविधान लागू हुआ।

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने।

  • संविधान ने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया।


संविधान निर्माण की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

  1. लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना:

    • संविधान ने भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

  2. सामाजिक न्याय का लक्ष्य:

    • जाति, धर्म, लिंग और वर्ग के आधार पर भेदभाव समाप्त करने के लिए प्रावधान।

  3. संविधान की लचीलापन:

    • इसे समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया जा सकता है।


भारतीय संविधान का निर्माण न केवल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का प्रतीक है, बल्कि यह दुनिया के सबसे जटिल और विविध समाजों में से एक को एकजुट रखने का माध्यम भी है।