गैर-संवैधानिक निकायें ( Non-Constitutional Bodies in India)
गैर-संवैधानिक निकायों का गठन संविधान में प्रावधानित नहीं है, बल्कि इन्हें कानूनों, कार्यकारी आदेशों, या सरकारी नीतियों के माध्यम से स्थापित किया जाता है। इनका उद्देश्य प्रशासनिक, आर्थिक, और सामाजिक प्रबंधन में सहायक भूमिका निभाना है। इनमें नीति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), आदि प्रमुख हैं।
1. नीति आयोग
(a) स्थापना और उद्देश्य
- स्थापना: 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना की गई।
- उद्देश्य: सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और देश के विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ तैयार करना।
(b) संरचना
- अध्यक्ष: प्रधानमंत्री।
- गवर्निंग काउंसिल: इसमें सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल शामिल होते हैं।
- उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त।
- विशेषज्ञ और सलाहकार: विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ आयोग का हिस्सा होते हैं।
(c) कार्य और भूमिका
- नीतियों का निर्माण:
- विकास के लिए दीर्घकालिक और मध्यम अवधि की योजनाओं का निर्माण।
- राज्यों का सहयोग:
- राज्यों को नीति-निर्माण में भागीदार बनाना।
- परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग:
- योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा।
- संस्थागत सुधार:
- शिक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि जैसे क्षेत्रों में सुधार के सुझाव।
(d) महत्व और आलोचना
- महत्व: सहकारी संघवाद और स्थानीय जरूरतों के अनुकूल विकास को बढ़ावा।
- आलोचना: नीति आयोग के पास कानूनी अधिकार नहीं हैं, जिससे इसकी सिफारिशें अनिवार्य नहीं होतीं।
2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
(a) स्थापना और उद्देश्य
- स्थापना: 12 अक्टूबर 1993 को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत।
- उद्देश्य: मानव अधिकारों की रक्षा और उनके उल्लंघन की जांच।
(b) संरचना
- अध्यक्ष: सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश।
- सदस्य:
- उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश।
- मानवाधिकार और समाज सेवा के क्षेत्र के विशेषज्ञ।
- अधिकार: केंद्र और राज्य सरकारों से रिपोर्ट मांगना।
(c) कार्य और शक्तियाँ
- मानवाधिकार उल्लंघन की जांच।
- सरकार को सिफारिशें देना।
- मानवाधिकारों के प्रचार और जागरूकता अभियान।
- संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
(d) चुनौतियाँ और आलोचना
- NHRC के पास निर्णय लागू करने की शक्ति नहीं है।
- वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता की कमी।
3. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
(a) स्थापना और उद्देश्य
- स्थापना: 1941 में “स्पेशल पुलिस एस्टाब्लिशमेंट” के रूप में; 1963 में CBI का गठन हुआ।
- उद्देश्य: भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध, और उच्च-स्तरीय आपराधिक मामलों की जांच।
(b) संरचना
- निदेशक:
- कैबिनेट की चयन समिति द्वारा नियुक्त।
- कार्यकाल 2 वर्ष।
- विभाग:
- भ्रष्टाचार-निरोधक शाखा।
- आर्थिक अपराध शाखा।
- विशेष अपराध शाखा।
(c) कार्य और शक्तियाँ
- भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों की जांच।
- अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराधों की जांच।
- न्यायालयों के निर्देशानुसार मामलों की जांच।
- केंद्र और राज्य सरकारों को सहायता।
(d) चुनौतियाँ और आलोचना
- चुनौतियाँ:
- राजनीतिक दबाव।
- राज्यों द्वारा मामलों को सौंपने में बाधा।
- आलोचना:
- इसे “पिंजरे का तोता” कहा जाता है क्योंकि इसे स्वतंत्रता नहीं है।
4. अन्य गैर-संवैधानिक निकायें
(a) केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
- भ्रष्टाचार की रोकथाम और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए।
- CVC की स्थापना 1964 में की गई थी।
(b) राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
- महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए।
- 1992 में इसकी स्थापना हुई।
(c) राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM)
- धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना।
- 1992 में इसकी स्थापना हुई।
गैर-संवैधानिक निकाय भारत के शासन तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। ये संस्थाएँ नीति निर्माण, मानव अधिकारों की रक्षा, भ्रष्टाचार की रोकथाम, और सामाजिक न्याय को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, इन निकायों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए इन्हें अधिक स्वतंत्रता और कानूनी शक्तियाँ प्रदान करने की आवश्यकता है।