चट्टानों का अध्ययन (Rocks and Rock Cycle)

चट्टानों का अध्ययन (Rocks and Rock Cycle)


  • चट्टानों के प्रकार:
    • आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks)
    • अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks)
    • कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks)
  • चट्टान चक्र (Rock Cycle)
  • पृथ्वी की पपड़ी में चट्टानों का वितरण और महत्व
  • चट्टानें पृथ्वी की सतह और आंतरिक भाग का मूलभूत घटक हैं। ये विभिन्न खनिजों के समूह से बनी ठोस संरचनाएँ होती हैं। चट्टानों का अध्ययन भूविज्ञान (Geology) की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो पृथ्वी की संरचना, उसकी उत्पत्ति और उसके विकास को समझने में सहायता करता है।

    चट्टानें विभिन्न भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं से बनती और बदलती रहती हैं। इस प्रक्रिया को चट्टान चक्र (Rock Cycle) कहा जाता है। चट्टानों को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है:

    1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks)
    2. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks)
    3. कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks)

    1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks)

    आग्नेय चट्टानें उन चट्टानों को कहते हैं जो पृथ्वी के अंदर या बाहर मैग्मा (Magma) और लावा (Lava) के ठंडा होने और जमने से बनती हैं। इन्हें प्राथमिक चट्टानें (Primary Rocks) भी कहा जाता है क्योंकि अन्य चट्टानों का निर्माण इन्हीं से होता है।

    आग्नेय चट्टानों के प्रकार

    1. अंतःस्रावी (Intrusive) आग्नेय चट्टानें

      • ये चट्टानें मैग्मा के पृथ्वी की सतह के नीचे ठंडा होने से बनती हैं।
      • विशेषताएँ:
        • धीरे-धीरे ठंडा होने के कारण इनके कण बड़े होते हैं।
        • ये कठोर और सघन होती हैं।
      • उदाहरण: ग्रेनाइट (Granite), डायराइट (Diorite)।
    2. बहिर्स्रावी (Extrusive) आग्नेय चट्टानें

      • ये चट्टानें ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान लावा के सतह पर आकर ठंडा होने से बनती हैं।
      • विशेषताएँ:
        • तेजी से ठंडा होने के कारण इनमें छोटे कण होते हैं।
        • ये कम घनी होती हैं।
      • उदाहरण: बेसाल्ट (Basalt), ओब्सिडियन (Obsidian)।

    महत्व और उपयोग

    • ग्रेनाइट का उपयोग भवन निर्माण और मूर्तियों में किया जाता है।
    • बेसाल्ट से सड़क निर्माण सामग्री बनाई जाती है।
    • पूमिस (Pumice) सौंदर्य प्रसाधनों और सफाई के लिए उपयोग किया जाता है।

    2. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks)

    अवसादी चट्टानें वे चट्टानें होती हैं जो पानी, हवा और बर्फ के माध्यम से एकत्रित अवसादों (Sediments) के दबाव और जमाव से बनती हैं।

    अवसादी चट्टानों के प्रकार

    1. मशीनी अवसादी चट्टानें (Mechanically Formed Sedimentary Rocks)

      • ये भौतिक अपक्षय (Physical Weathering) द्वारा बनने वाले कणों के संचित होने से बनती हैं।
      • उदाहरण: बलुआ पत्थर (Sandstone), कंकड़ पत्थर (Conglomerate)।
    2. रासायनिक अवसादी चट्टानें (Chemically Formed Sedimentary Rocks)

      • ये चट्टानें पानी में घुले पदार्थों के जमने से बनती हैं।
      • उदाहरण: चूना पत्थर (Limestone), डोलोमाइट (Dolomite)।
    3. जैविक अवसादी चट्टानें (Organically Formed Sedimentary Rocks)

      • ये चट्टानें जीवाश्मों और जैविक अवशेषों के जमाव से बनती हैं।
      • उदाहरण: कोयला (Coal), चूना पत्थर (Limestone)।

    महत्व और उपयोग

    • कोयला और पेट्रोलियम ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होते हैं।
    • चूना पत्थर का उपयोग सीमेंट और कंक्रीट निर्माण में किया जाता है।
    • बलुआ पत्थर भवन निर्माण में प्रयुक्त होता है।

    3. कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks)

    कायांतरित चट्टानें वे चट्टानें होती हैं जो अत्यधिक दबाव (Pressure), तापमान (Temperature) और रासायनिक क्रियाओं (Chemical Reactions) के प्रभाव से अपने मूल स्वरूप को बदल लेती हैं।

    कायांतरित चट्टानों के प्रकार

    1. प्रादेशिक कायांतरण (Regional Metamorphism)

      • यह प्रक्रिया बड़े क्षेत्रों में उच्च ताप और दबाव के कारण होती है।
      • उदाहरण: शिस्ट (Schist), नीस (Gneiss)।
    2. संपर्क कायांतरण (Contact Metamorphism)

      • यह तब होता है जब मैग्मा किसी अवसादी या आग्नेय चट्टान के संपर्क में आता है।
      • उदाहरण: संगमरमर (Marble), क्वार्टजाइट (Quartzite)।

    महत्व और उपयोग

    • संगमरमर का उपयोग भवन निर्माण और मूर्तिकला में किया जाता है।
    • नीस और शिस्ट का उपयोग सजावटी पत्थरों के रूप में किया जाता है।
    • क्वार्टजाइट को औद्योगिक प्रयोजनों में उपयोग किया जाता है।

    4. चट्टान चक्र (Rock Cycle)

    चट्टान चक्र (Rock Cycle) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक प्रकार की चट्टान धीरे-धीरे दूसरी प्रकार की चट्टान में बदल जाती है।

    चट्टान चक्र की प्रक्रिया:

    1. आग्नेय चट्टानें ऊष्मा और दबाव के कारण कायांतरित चट्टानों में बदल सकती हैं।
    2. आग्नेय चट्टानें का अपक्षय और अपरदन (Weathering & Erosion) होकर अवसादी चट्टानों में परिवर्तित हो सकती हैं।
    3. अवसादी चट्टानें दबाव और तापमान से कायांतरित चट्टानों में बदल सकती हैं।
    4. कायांतरित चट्टानें अत्यधिक तापमान पर पिघलकर फिर से आग्नेय चट्टानों में परिवर्तित हो सकती हैं।

    5. पृथ्वी की पपड़ी में चट्टानों का वितरण और महत्व

    • पृथ्वी की पपड़ी का 95% भाग आग्नेय और कायांतरित चट्टानों से बना होता है, लेकिन सतह पर 75% अवसादी चट्टानें पाई जाती हैं।
    • महाद्वीपों में ग्रेनाइट और अवसादी चट्टानों का प्रभुत्व रहता है, जबकि समुद्री पटल पर बेसाल्ट अधिक पाया जाता है।
    • खनिज और धातु विभिन्न चट्टानों में पाए जाते हैं, जो औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    चट्टानों का आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व

    1. निर्माण उद्योग: सीमेंट, ईंट, और भवन निर्माण में चट्टानों का उपयोग।
    2. खनिज संसाधन: लोहा, तांबा, सोना, और कोयला चट्टानों से प्राप्त होते हैं।
    3. मृदा निर्माण: चट्टानों के अपक्षय से मिट्टी बनती है, जो कृषि के लिए आवश्यक है।
    4. जल संरक्षण: चट्टानें जल भंडारण और भूजल पुनर्भरण में सहायक होती हैं।

    चट्टानें पृथ्वी के भूगोल और पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चट्टानों के प्रकार, उनके निर्माण की प्रक्रिया और चट्टान चक्र को समझकर हम पृथ्वी की संरचना और उसके विकास को बेहतर समझ सकते हैं।