सौर विकिरण और पृथ्वी का तापीय संतुलन – Solar Radiation and Heat Budget of Earth

 सौर विकिरण और पृथ्वी का तापीय संतुलन (Solar Radiation and Heat Budget of Earth)

सूर्य पृथ्वी के लिए ऊष्मा और ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। पृथ्वी तक पहुँचने वाली सौर ऊर्जा को सौर विकिरण (Solar Radiation) कहा जाता है। यह ऊर्जा पृथ्वी के जलवायु, मौसम, महासागरों की धाराओं और जैव मंडल को प्रभावित करती है। इस अध्याय में हम सौर विकिरण, पृथ्वी के तापीय संतुलन और ग्रीनहाउस प्रभाव को विस्तार से समझेंगे।

  • सौर विकिरण का पृथ्वी पर प्रभाव
  • पृथ्वी का तापीय संतुलन
  • ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग

  • 1. सौर विकिरण का पृथ्वी पर प्रभाव (Impact of Solar Radiation on Earth)

    सौर विकिरण विद्युत-चुंबकीय तरंगों के रूप में पृथ्वी तक पहुँचता है। यह विकिरण मुख्य रूप से तीन प्रकार की तरंगदैर्ध्य (Wavelengths) में विभाजित होता है:

    1. पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet Rays) – लगभग 8%
    2. दृश्यमान प्रकाश (Visible Light) – लगभग 39%
    3. इन्फ्रारेड किरणें (Infrared Rays) – लगभग 53%

    सौर विकिरण को प्रभावित करने वाले कारक

    सौर विकिरण की मात्रा और इसकी तीव्रता को कई कारक प्रभावित करते हैं:

    1. अक्षांश (Latitude): विषुवत रेखा (Equator) पर सूर्य का विकिरण अधिक तीव्र होता है, जबकि ध्रुवों पर यह कम होता है।
    2. सूर्य का कोण (Solar Angle): जब सूर्य की किरणें सीधी गिरती हैं, तो ऊर्जा अधिक केंद्रित होती है। तिरछी किरणें लंबी दूरी तय करती हैं और फैल जाती हैं, जिससे ऊर्जा का घनत्व कम हो जाता है।
    3. मौसम (Season): पृथ्वी की घूर्णन धुरी झुकी होने के कारण अलग-अलग मौसमों में सूर्य का विकिरण अलग-अलग होता है।
    4. दिन की अवधि (Length of Day): गर्मियों में दिन लंबा होने के कारण अधिक सौर विकिरण प्राप्त होता है, जबकि सर्दियों में कम।
    5. मौसम और बादल (Cloud Cover): बादल सौर विकिरण को अवरुद्ध करते हैं, जिससे सतह पर पहुँचने वाली ऊष्मा कम हो जाती है।
    6. स्थलीय और समुद्री प्रभाव (Land and Water Contrast): जल की ऊष्मा धारिता (Heat Capacity) अधिक होती है, जिससे महासागरों और भूमि के तापमान में भिन्नता आती है।

    2. पृथ्वी का तापीय संतुलन (Earth’s Heat Budget)

    तापीय संतुलन का अर्थ है कि जितनी ऊर्जा पृथ्वी को सूर्य से प्राप्त होती है, उतनी ही ऊर्जा पृथ्वी से अंतरिक्ष में लौट जाती है। यदि यह संतुलन बिगड़ता है, तो पृथ्वी का तापमान अस्थिर हो जाता है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

    तापीय संतुलन की प्रक्रिया

    1. सौर ऊर्जा का पृथ्वी तक पहुँचना:

      • सूर्य से आने वाली ऊर्जा में से 100% पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है।
      • इसका लगभग 30% वायुमंडल, बादलों और पृथ्वी की सतह से परावर्तित होकर वापस अंतरिक्ष में चला जाता है (जिसे अल्बीडो (Albedo) कहते हैं)।
      • शेष 70% ऊर्जा पृथ्वी द्वारा अवशोषित की जाती है, जिससे इसका तापमान बढ़ता है।
    2. ऊष्मा का पुनः उत्सर्जन (Terrestrial Radiation):

      • पृथ्वी अपने द्वारा अवशोषित ऊर्जा को इन्फ्रारेड विकिरण के रूप में उत्सर्जित करती है।
      • यह विकिरण ग्रीनहाउस गैसों (CO₂, CH₄, H₂O आदि) द्वारा अवशोषित किया जाता है और वायुमंडल में वापस लौटता है।
    3. ऊष्मा का वायुमंडल में संचार:

      • वायुमंडल में ऊष्मा चालन (Conduction), संवहन (Convection), और विकिरण (Radiation) द्वारा स्थानांतरित होती है।
      • संवहनीय धाराएँ (Convection Currents) गर्म और ठंडी हवा के प्रवाह को संतुलित रखती हैं।

    ऊष्मा संतुलन का महत्व

    • पृथ्वी के तापमान को स्थिर बनाए रखता है।
    • वायुमंडलीय परिसंचरण और महासागरीय धाराओं को नियंत्रित करता है।
    • जलवायु प्रणाली को संतुलित बनाए रखता है।
    • जीवन के अनुकूल वातावरण बनाए रखने में सहायता करता है।

    3. ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग (Greenhouse Effect and Global Warming)

    ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect)

    ग्रीनहाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है, जिसमें पृथ्वी की सतह से निकलने वाली इन्फ्रारेड किरणें (Infrared Radiation) वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं और पुनः पृथ्वी की ओर लौटाई जाती हैं। इससे पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ जाता है।

    मुख्य ग्रीनहाउस गैसें और उनका योगदान

    ग्रीनहाउस गैस वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान
    जलवाष्प (H₂O) 60%
    कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) 26%
    मीथेन (CH₄) 6%
    नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) 6%
    क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) 2%

    लाभ:
    ✔ ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी का औसत तापमान 15°C बना रहता है, जो जीवन के लिए उपयुक्त है।
    ❌ यदि ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का कारण बनती है।

    ग्लोबल वार्मिंग और इसके प्रभाव

    ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ है पृथ्वी के औसत तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि। औद्योगिक क्रांति के बाद CO₂ और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि के कारण पृथ्वी का तापमान लगभग 1.1°C बढ़ चुका है।

    प्रमुख प्रभाव:

    1. जलवायु परिवर्तन: मौसम की चरम स्थितियाँ (अत्यधिक गर्मी, सूखा, तूफान) बढ़ रही हैं।
    2. समुद्र स्तर में वृद्धि: ग्लेशियर और बर्फ की चादरें पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ रहा है।
    3. वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव: कई जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
    4. खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव: कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
    5. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: अधिक गर्मी से हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।

    ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय

    ✅ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन, जलविद्युत) का उपयोग बढ़ाएँ।
    ✅ कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें।
    ✅ वनों की कटाई को रोकें और अधिक वृक्षारोपण करें।
    ✅ उद्योगों और वाहनों से निकलने वाले ग्रीनहाउस गैसों को नियंत्रित करें।
    पेरिस समझौता (Paris Agreement) जैसे वैश्विक प्रयासों को अपनाएँ।

    सौर विकिरण पृथ्वी की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है और यह जलवायु, महासागरों और जीवमंडल को प्रभावित करता है। पृथ्वी का तापीय संतुलन वायुमंडलीय प्रक्रियाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है। लेकिन ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसके प्रभावों को कम करने के लिए हमें पर्यावरणीय संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कार्य करना आवश्यक है।