सतत विकास (Sustainable Development)
सतत विकास (Sustainable Development) ऐसा विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करता है, बिना भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को प्रभावित किए। इसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
- सतत विकास की परिभाषा और सिद्धांत
- सतत विकास के लक्ष्य (SDGs): संयुक्त राष्ट्र के 17 लक्ष्य
- पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन
- संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण
1. सतत विकास की परिभाषा और सिद्धांत
परिभाषा:
ब्रुंटलैंड आयोग (1987) की रिपोर्ट “Our Common Future” के अनुसार:
“सतत विकास वह विकास है जो भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करता है।”
सिद्धांत:
- पर्यावरणीय संतुलन – पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
- आर्थिक समृद्धि – दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
- सामाजिक समानता – सभी वर्गों के लोगों को समान अवसर प्रदान करना।
- नवीकरणीय संसाधनों का संरक्षण – जल, वन, खनिज और ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग।
- तकनीकी नवाचार – हरित प्रौद्योगिकी और पुनर्चक्रण को अपनाना।
- साझेदारी और भागीदारी – सरकार, उद्योग, और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी।
2. सतत विकास के लक्ष्य (SDGs)
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2015 में 2030 तक सतत विकास के लिए 17 लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) तय किए। ये लक्ष्य गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, और समावेशी विकास पर केंद्रित हैं।
संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्य:
| क्र. सं. | लक्ष्य |
|---|---|
| 1 | गरीबी का अंत (No Poverty) |
| 2 | भूखमरी समाप्त करना और खाद्य सुरक्षा (Zero Hunger) |
| 3 | सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well-being) |
| 4 | गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) |
| 5 | लैंगिक समानता (Gender Equality) |
| 6 | स्वच्छ जल और स्वच्छता (Clean Water and Sanitation) |
| 7 | सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा (Affordable and Clean Energy) |
| 8 | अच्छा रोजगार और आर्थिक विकास (Decent Work and Economic Growth) |
| 9 | नवाचार और आधारभूत संरचना (Industry, Innovation and Infrastructure) |
| 10 | असमानता में कमी (Reduced Inequalities) |
| 11 | सतत शहर और समुदाय (Sustainable Cities and Communities) |
| 12 | ज़िम्मेदारीपूर्वक उपभोग और उत्पादन (Responsible Consumption and Production) |
| 13 | जलवायु परिवर्तन से लड़ना (Climate Action) |
| 14 | समुद्री जीवन का संरक्षण (Life Below Water) |
| 15 | स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा (Life on Land) |
| 16 | न्याय, शांति और मजबूत संस्थाएँ (Peace, Justice and Strong Institutions) |
| 17 | सतत विकास के लिए वैश्विक साझेदारी (Partnerships for the Goals) |
3. पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन
(i) सतत विकास के लिए पारिस्थितिकीय संतुलन क्यों आवश्यक है?
- अनियंत्रित औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ता है।
- जंगलों की कटाई से जैव विविधता का नुकसान और जलवायु परिवर्तन होता है।
- प्राकृतिक संसाधनों का अधिक दोहन भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर सकता है।
(ii) संतुलन बनाए रखने के उपाय:
- पर्यावरण-अनुकूल तकनीक (Eco-friendly Technology) अपनाना।
- ग्रीन बिल्डिंग और ऊर्जा दक्षता को प्रोत्साहित करना।
- स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।
- पर्यावरणीय नीतियाँ और नियमों को कड़ाई से लागू करना।
4. संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण
(i) जल संसाधन संरक्षण:
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) अपनाना।
- नदियों और जलाशयों का पुनरुद्धार करना।
- टपक (Drip) सिंचाई जैसी कुशल जल तकनीकों का प्रयोग।
(ii) वन संसाधन संरक्षण:
- वृक्षारोपण और वनीकरण कार्यक्रम को बढ़ावा देना।
- वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं को लागू करना।
- संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) के तहत समुदायों को शामिल करना।
(iii) ऊर्जा संसाधनों का सतत उपयोग:
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाना, जैसे सौर और पवन ऊर्जा।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) बढ़ाने वाली तकनीकों का उपयोग।
- फॉसिल फ्यूल के प्रयोग को कम करके ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना।
(iv) कृषि संसाधन संरक्षण:
- जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देना।
- मृदा संरक्षण तकनीक अपनाना, जैसे कृषि वानिकी (Agroforestry)।
- फसल चक्र (Crop Rotation) और संवहनीय सिंचाई को अपनाना।
5. सतत विकास के लिए भारत सरकार के प्रमुख प्रयास
| कार्यक्रम / योजना | लक्ष्य |
|---|---|
| राष्ट्रीय जैव ऊर्जा मिशन | नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना |
| स्वच्छ भारत मिशन | स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में सुधार |
| अटल नवीकरणीय ऊर्जा मिशन | सौर और पवन ऊर्जा का विकास |
| नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (NAPCC) | जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना |
| जल जीवन मिशन | सभी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना |
| स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया | नवाचार और सतत औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना |
सतत विकास आज की वैश्विक आवश्यकता है, जिससे पर्यावरण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाया जा सके। भारत सहित विश्व के सभी देश सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाया जाए, तो सतत विकास संभव है और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण मिल सकता है।