जैव विविधता – Biodiversity

जैव विविधता (Biodiversity)

  • जैव विविधता की परिभाषा और स्तर: आनुवंशिक, प्रजाति, पारिस्थितिकी
  • भारत में जैव विविधता का महत्व
  • जैव विविधता का संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य
  • जैव विविधता संकट: विलुप्त होने की स्थिति और संरक्षण योजनाएँ

1. जैव विविधता की परिभाषा और स्तर (Definition and Levels of Biodiversity)

(i) जैव विविधता की परिभाषा (Definition of Biodiversity)

जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विभिन्नता। इसमें सभी प्रकार के वनस्पति, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव, उनके पारिस्थितिक तंत्र, और आनुवंशिक विभिन्नताएँ शामिल होती हैं।

डब्ल्यू. जी. रोसेन (W.G. Rosen) के अनुसार:
“जैव विविधता किसी पारिस्थितिकी तंत्र, जीवमंडल, या संपूर्ण पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता को दर्शाती है।”

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार:
“जैव विविधता एक जटिल प्रणाली है, जिसमें सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं।”


(ii) जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)

  1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)

    • किसी प्रजाति के भीतर मौजूद आनुवंशिक (Genetic) विभिन्नता।
    • उदाहरण: गेहूँ, चावल, और मक्का की विभिन्न प्रजातियाँ।
  2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity)

    • विभिन्न प्रजातियों की संख्या और उनका वितरण।
    • उदाहरण: भारत में बाघ, हाथी, मोर, गैंडा आदि की विविधता।
  3. पारिस्थितिकी विविधता (Ecosystem Diversity)

    • विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों की विविधता।
    • उदाहरण: भारत में वन, घासभूमि, आर्द्रभूमि, मरुस्थल, पर्वतीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र।

2. भारत में जैव विविधता का महत्व (Importance of Biodiversity in India)

भारत जैव विविधता की दृष्टि से एक मेगाडायवर्स (Mega-diverse) देश है। भारत में 10 जैव भौगोलिक क्षेत्र और 4 जैव विविधता हॉटस्पॉट (Himalayas, Indo-Burma, Western Ghats, Sundaland) हैं।

(i) पारिस्थितिकीय महत्व (Ecological Importance)

  • जैव विविधता पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखती है।
  • यह पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण (Nutrient Cycling) में सहायक होती है।
  • वनों और प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करती है।

(ii) आर्थिक महत्व (Economic Importance)

  • कृषि और औषधीय पौधों की विविधता।
  • लकड़ी, रेशे, फल, और औषधियों का स्रोत।
  • इकोटूरिज्म (Ecotourism) के माध्यम से आर्थिक लाभ।

(iii) सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व (Cultural and Spiritual Importance)

  • भारतीय संस्कृति और परंपराओं में कई जीव-जंतुओं का महत्व (जैसे पीपल, तुलसी, गाय, हाथी)।
  • विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में जैव विविधता की भूमिका।

3. जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)

(i) जैव विविधता संरक्षण के प्रकार (Types of Biodiversity Conservation)

  1. सीमित संरक्षण (In-situ Conservation)

    • प्राकृतिक पर्यावास में जीवों का संरक्षण।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य, जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र।
  2. बहिर्स्थ संरक्षण (Ex-situ Conservation)

    • प्राकृतिक पर्यावास के बाहर जैव विविधता का संरक्षण।
    • उदाहरण: चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, डीएनए बैंक।

(ii) भारत में जैव विविधता संरक्षण के प्रयास (Biodiversity Conservation Efforts in India)

  1. राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)

    • संरक्षित क्षेत्र, जहाँ वन्य जीवों के शिकार और मानव गतिविधियाँ निषिद्ध होती हैं।
    • उदाहरण:
      • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम) – एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध।
      • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) – भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान।
  2. वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries)

    • यहाँ वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास में संरक्षित किया जाता है।
    • उदाहरण:
      • भरतपुर घाना पक्षी अभयारण्य (राजस्थान) – प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध।
      • सुंदरबन अभयारण्य (पश्चिम बंगाल) – रॉयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध।
  3. जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves)

    • यहाँ जैव विविधता के साथ मानव समुदायों को भी रहने की अनुमति होती है।
    • उदाहरण:
      • नीलगिरी जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक)
      • सुनदरबन जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र (पश्चिम बंगाल)
  4. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972)

    • इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभ्यारण्यों और आरक्षित वनों की सुरक्षा दी गई है।
  5. जैव विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002)

    • जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और परंपरागत ज्ञान की सुरक्षा के लिए बनाया गया।
  6. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environmental Protection Act, 1986)

    • पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

4. जैव विविधता संकट और संरक्षण योजनाएँ (Biodiversity Crisis and Conservation Plans)

(i) जैव विविधता संकट (Biodiversity Crisis)

  1. विलुप्ति की दर में वृद्धि (Increased Rate of Extinction)

    • प्राकृतिक और मानवजनित कारणों से कई प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।
    • उदाहरण: चीता (भारत से विलुप्त), गुलाबी सिर वाला बतख।
  2. वनों की कटाई (Deforestation)

    • कृषि, शहरीकरण, और औद्योगीकरण के कारण जैव विविधता प्रभावित हो रही है।
  3. जलवायु परिवर्तन (Climate Change)

    • ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जैव विविधता संकटग्रस्त हो रही है।
  4. पर्यावरण प्रदूषण (Environmental Pollution)

    • जल, वायु और मृदा प्रदूषण जैव विविधता को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

(ii) संरक्षण योजनाएँ (Conservation Plans)

  1. पर्यावरण जागरूकता अभियान (Environmental Awareness Programs)

    • वन महोत्सव, पर्यावरण दिवस, स्कूलों में जैव विविधता शिक्षा।
  2. सरकारी योजनाएँ और परियोजनाएँ (Government Schemes and Projects)

    • प्रोजेक्ट टाइगर (1973): बाघों के संरक्षण हेतु।
    • प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992): हाथियों के संरक्षण हेतु।
    • राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना (National Biodiversity Action Plan, 2008)।

जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत, जैव विविधता से समृद्ध राष्ट्र है, जहाँ विभिन्न प्रकार के वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं। किन्तु आधुनिक विकास और मानवीय गतिविधियों के कारण जैव विविधता संकट में है। अतः, इसके संरक्षण हेतु जागरूकता, नीतियाँ, और सतत विकास आवश्यक हैं।