गुप्त साम्राज्य के पतन (6वीं शताब्दी ई.) के बाद उत्तरी भारत में अनेक क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण वंश था मौखरी वंश( Maukharis Dynasty ), जिसने उत्तर भारत विशेषकर कन्नौज (कन्यकुब्ज) को अपनी राजधानी बनाकर राजनीति में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।
मौखरी वंश का उदय गुप्तों की शक्ति के क्षीण होने के पश्चात हुआ और 6वीं शताब्दी से 7वीं शताब्दी तक इन्होंने उत्तरी भारत के एक बड़े भूभाग पर शासन किया।
1. मौखरी वंश का उद्गम
- मौखरी वंश की उत्पत्ति के बारे में स्पष्ट प्रमाण नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे मूलतः पूर्वी उत्तर प्रदेश (कन्नौज और उसके आसपास) के क्षत्रिय शासक थे।
- प्रारंभिक अवस्था में वे गुप्त साम्राज्य के सामंत (Feudatory Chiefs) थे, किंतु गुप्त शक्ति के क्षय के बाद स्वतंत्र शासक बन गए।
- कुछ शिलालेखों से संकेत मिलता है कि मौखरी वंश का संबंध मगध और कन्नौज क्षेत्र से रहा।
2. मौखरी वंश की राजधानी
- मौखरी शासकों की राजधानी कन्यकुब्ज (आधुनिक कन्नौज, उत्तर प्रदेश) थी।
- कन्नौज एक समृद्ध नगर था, जो आगे चलकर उत्तर भारत का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना।
- कन्नौज की भौगोलिक स्थिति गंगा के मैदानी क्षेत्र में होने के कारण राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
3. प्रमुख शासक
(क) हरिवर्मन
- मौखरी वंश का संस्थापक हरिवर्मन माना जाता है।
- उसने गुप्त साम्राज्य की अधीनता स्वीकार की थी।
- उसके समय तक मौखरी अभी एक छोटे क्षेत्रीय सामंत राज्य के रूप में था।
(ख) इशानवर्मन (554–560 ई.)
- मौखरी वंश का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक।
- उसने गुप्तों से स्वतंत्र होकर अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित किया।
- उसने हूणों को हराया और कन्नौज क्षेत्र को सुरक्षित किया।
- इशानवर्मन के समय मौखरी राज्य ने उत्तरी भारत में एक महाशक्ति का रूप ले लिया।
- उसका उल्लेख हर्षचरित (बाणभट्ट) और विभिन्न अभिलेखों में मिलता है।
(ग) सरववर्मन
- इशानवर्मन का उत्तराधिकारी।
- सरववर्मन ने भी राज्य की प्रतिष्ठा बनाए रखी और कन्नौज को सुदृढ़ राजधानी के रूप में विकसित किया।
- उसका नाम बिहार और मध्य भारत के शिलालेखों में पाया जाता है।
(घ) अवंति वर्मन
- मौखरी वंश के शासकों में एक प्रमुख नाम।
- इसके समय तक मौखरी राज्य का प्रभाव उत्तर भारत में विद्यमान था।
(ङ) ग्रहार्जुन
- यह मौखरी वंश का अंतिम प्रमुख शासक माना जाता है।
- इसी काल में वर्धन वंश (पुष्यभूति वंश) का उदय हुआ।
- मौखरी वंश की एक राजकुमारी का विवाह वर्धन वंश के प्रमुख शासक प्रभाकरवर्धन से हुआ।
- इस वैवाहिक संबंध के कारण मौखरी वंश धीरे-धीरे वर्धन साम्राज्य में विलीन हो गया।
4. मौखरी वंश और वर्धन वंश का संबंध
- मौखरी और वर्धन वंश का आपसी संबंध राजनीतिक और वैवाहिक दोनों प्रकार का था।
- ग्रहार्जुन की पुत्री का विवाह प्रभाकरवर्धन (हर्षवर्धन के पिता) से हुआ।
- प्रभाकरवर्धन की मृत्यु के बाद, हर्षवर्धन ने मौखरी साम्राज्य को अपने नियंत्रण में लिया और कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया।
- इस प्रकार मौखरी वंश का अंत हुआ और उसका उत्तराधिकारी बना हर्ष का साम्राज्य (7वीं शताब्दी ई.)।
5. प्रशासनिक व्यवस्था
- मौखरी शासकों ने गुप्त प्रशासन को ही अपनाया।
- राजा सर्वोच्च शासक था, परंतु उसे मंत्रिपरिषद, सामंतों और स्थानीय प्रशासकों का सहयोग लेना पड़ता था।
- भूमि से कर वसूली होती थी और व्यापारिक कर भी राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था।
- सेना में हाथी, घोड़े और रथों का उपयोग किया जाता था।
6. धर्म एवं संस्कृति
- मौखरी शासक हिंदू धर्म के अनुयायी थे।
- वे विशेषकर वैष्णव और शैव धर्म के संरक्षक रहे।
- बौद्ध धर्म को भी संरक्षण मिला।
- कन्नौज के आसपास अनेक मंदिर और मठ स्थापित किए गए।
7. साहित्य और विद्या
- मौखरी काल में संस्कृत भाषा और साहित्य का विकास हुआ।
- विद्वानों और कवियों को संरक्षण मिला।
- बाणभट्ट की रचना हर्षचरित में मौखरी वंश का उल्लेख मिलता है।
- कन्नौज एक महत्वपूर्ण शिक्षा और विद्यानगरी के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
8. मौखरी वंश का पतन
- मौखरी वंश का अंतिम शासक ग्रहार्जुन था।
- उसकी पुत्री का विवाह वर्धन वंश में हुआ, जिसके बाद धीरे-धीरे मौखरी राज्य वर्धनों के अधीन हो गया।
- अंततः हर्षवर्धन ने मौखरी साम्राज्य को अपने विशाल साम्राज्य में मिला लिया।
- इस प्रकार मौखरी वंश का अंत हो गया।
9. महत्व और योगदान
- मौखरी वंश ने गुप्त साम्राज्य के पतन और वर्धन साम्राज्य के उदय के बीच संगम की भूमिका निभाई।
- कन्नौज को एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र बनाने का श्रेय इन्हीं को जाता है।
- हूणों के आक्रमणों से उत्तर भारत की रक्षा की।
- धर्म और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- आगे चलकर कन्नौज त्रिकोणीय संघर्ष (हर्ष, पाल, राष्ट्रकूट) का केंद्र बना – जिसका आधार मौखरी वंश की स्थापना थी।
मौखरी वंश का इतिहास गुप्त साम्राज्य के पतन और हर्षवर्धन साम्राज्य के उदय के बीच का एक महत्त्वपूर्ण सेतु है।
इस वंश ने कन्नौज को उत्तरी भारत के राजनीतिक परिदृश्य में अग्रणी स्थान दिलाया और वैवाहिक संबंधों के माध्यम से वर्धनों को सत्ता-हस्तांतरण किया।
मौखरी वंश से संबंधित Questions and Answers
Q1. मौखरी वंश किस काल में उभरा था?
Ans: मौखरी वंश 6वीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उभरा था।
Q2. मौखरी वंश की राजधानी कहाँ थी?
Ans: मौखरी वंश की राजधानी कन्नौज (कन्यकुब्ज) थी।
Q3. मौखरी वंश का संस्थापक कौन था?
Ans: मौखरी वंश का संस्थापक हरीवर्मन (Harivarman) को माना जाता है।
Q4. मौखरी वंश के सबसे शक्तिशाली शासक कौन थे?
Ans: मौखरी वंश के सबसे शक्तिशाली शासक इशानवर्मन (Ishanavarman) थे, जिन्होंने हूणों और गुप्तों के विरुद्ध संघर्ष किया।
Q5. मौखरी वंश और वर्धन वंश का क्या संबंध था?
Ans: मौखरी वंश की एक राजकुमारी का विवाह वर्धन वंश के राजकुमार प्रभाकरवर्धन से हुआ था, जिससे दोनों वंशों में राजनैतिक और वैवाहिक संबंध स्थापित हुए।
Q6. मौखरी वंश का प्रमुख शत्रु कौन था?
Ans: मौखरी वंश का प्रमुख शत्रु मालवा के औलिकर वंश (Aulikara Dynasty) और हूण थे।
Q7. मौखरी वंश का अंतिम शासक कौन था?
Ans: मौखरी वंश का अंतिम शासक गृहवर्मन (Grahavarman) था, जिसे मालवा के शासक देवगुप्त ने पराजित किया।
Q8. मौखरी वंश का पतन कब और कैसे हुआ?
Ans: मौखरी वंश का पतन 606 ईस्वी के लगभग हुआ, जब गृहवर्मन की मृत्यु के बाद वर्धन वंश ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया।
Q9. मौखरी वंश से संबंधित कौन-सी प्रमुख अभिलेखीय साक्ष्य मिलते हैं?
Ans: मौखरी वंश से संबंधित जानकारी हमें अभिलेखों (inscriptions) और चीनी यात्री ह्वेनसांग के विवरणों से मिलती है।
Q10. प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, PCS) में मौखरी वंश से क्या प्रश्न पूछे जाते हैं?
Ans: प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं – मौखरी वंश की राजधानी, प्रमुख शासक, हूणों से संघर्ष, गृहवर्मन की हार और वर्धन वंश से संबंध।







